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अर्थव्यवस्था

स्काईमेट ने कहा इस साल कमजोर होगी वर्षा, लोगों पर पड़ेगी महंगाई की मार, बचाव की तैयारी में जुटी केंद्र सरकार

Aniruddh pratap singh

राज एक्सप्रेस। मौसम का पूर्वानुमान देने वाली प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट ने इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान जताया है। स्काईमेट के मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए केंद्र सरकार ने अभी से तैयारी करनी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार का कहना है कि उसका पूरा फोकस इस समय खाद्य पदार्थों के खुदरा मूल्य स्थिर रखने पर है। इसके लिए खास रणनीति पर काम किया जाएगा। केंद्र सरकार में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमारा फोकस इस बात पर रहने वाला है कि खाद्यान्न के उत्पादन पर मौसम का ज्यादा असर न होने पाए और खाद्य वस्तुओं की सप्लाई जरूरत के मुताबिक जारी रहे। कहा जा रहा है कि हाल ही में बारिश और आंधी तूफान की वजह से गेंहूं की फसल पर आंशिक असर पड़ा है। अगर उत्पादन कम हुआ तो गेंहू की महंगाई बढ़ना तय है। अब सरकार प्रयास कर रही है कि इसका असर कम से कम आए।

वर्षा का अर्थव्यवस्था से सीधा नाता

गौरतलब है कि स्काईमेट ने बताया है कि लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) की 94 फीसदी बारिश हो सकती है। यदि मानसून एलपीए का 96 से 104 फीसदी रहता है तो इसे सामान्य बारिश कहा जाता है। इसी तरह यदि बारिश 90 से 96 फीसदी के बीच होती है, तो इसे सामान्य से कम कहा जाता है। 90 फीसदी से कम बारिश को सूखा पड़ना कहा जाता है। आज के समय में भी हमारे देश में 70 फीसदी से ज्यादा किसान सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में उनकी पैदावार पूरी तरह से मानसून के अच्छे या खराब रहने पर निर्भर करती है। खराब मानसून का सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था से संबंध होता है। खराब बारिश हुई तो महंगाई बढ़ती है। अगर कृषि उत्पादन कम हुआ तो इसका व्यापक असर देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और आम लोगों पर देखा जा सकता है।

कम हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

चुनावी साल में केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने का सिलसिला शुरू कर दिया है। पहले स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई। होम लोन को और महंगा नहीं किया गया। इसके बाद नेचुरल गैस की कीमत तय करने के फॉर्मूले में बदलाव कर गैस को सस्ता किया गया। सूत्रों के अनुसान इसी क्रम में सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर आम आदमी को एक और राहत दे सकती है। इस बारे में मंथन जारी है। तेल कंपनियों की बैलेंस शीट को देखने के अलावा इस बात का आकलन किया जा रहा है कि एक्साइज ड्यूटी की कटौती इस प्रकार की जाए कि आम आदमी को राहत मिलें, साथ ही सरकार की कमाई पर ज्यादा असर ना हो। जो असर पड़े उसकी भरपाई भी आसानी से हो सके।

आय और खर्च में संतुलन साधने की चुनौती

सूत्रों का कहना है कि मुफ्त अनाज देने पर दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया जा रहा है। सरकार ने इसको एक साल के लिए बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि खर्च और आमदनी के अंतर को तय लक्ष्य के भीतर कैसे रखा जाए। सरकार पर कुल कर्ज 150 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है। यही कारण है कि आम लोगों को राहतें भी काफी कुछ कैलकुलेशन करके दी जा रही है। केंद्र ने 21 मई, 2022 को पेट्रोल पर आठ रुपये और डीजल पर छह रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। इस कटौती के बाद पेट्रोल पर 19.90 और डीजल पर 15.80 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूली जा रही है। गौरतलब है कि एक अप्रैल, 2014 को पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.56 रुपये प्रति लीटर थी। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। कच्चे तेल के दाम में उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम करीब नौ महीनों से नहीं बढ़ाए हैं।

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