FIR में देरी पर नाराज सिंधिया
FIR में देरी पर नाराज सिंधिया Social Media
मध्य प्रदेश

FIR में देरी पर नाराज सिंधिया- SP पर गिरी गाज, बीजेपी आई बचाव में

Author : Priyanka Yadav

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश की लोकसभा सीट गुना से भाजपा सांसद केपी यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में देरी करना अशोकनगर के पुलिस अधीक्षक को भारी पड़ गया है। राज्य सरकार ने सोमवार देर शाम उन्हें अशोकनगर एसपी के पद से हटाकर सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय भोपाल पदस्थ कर दिया है। फिलहाल जिले में नए पुलिस अधीक्षक की तैनाती नहीं की गई है।

दरअसल गुना भाजपा सांसद केपी यादव क्रीमिलेयर के एक मामले में फंसे हुए थे। सांसद केपी यादव ने पुत्र के स्कॉलपशिप के लिए स्कॉलरशिप के लिए अपनी प्रतिवर्ष आय 8 लाख रुपए से कम दिखाई थी। वहीं इसी वर्ष हुए लोकसभा चुनाव के दौरान जब उन्होंने सम्पति का ब्यौरा चुनाव आयोग को दिया, तो उन्होंने अपनी आय प्रतिवर्ष 39 लाख रुपए प्रदर्शित की।

एफआईआर में देरी पर नाराज सिंधिया

इस मामले को कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी प्रमुखता से उठाया था। इस मामले की जांच की गई, जिसमें 3 दिन पहले ही अशोकनगर एडीएम ने क्रीमिलेयर होने के बाद भी कम आय प्रदर्शित करने का दोषी माना था। इस दौरान कम आमदनी प्रदर्शित कर राज्य सरकार की छात्रवृति योजना का फायदा लेने को अनुचित करार दिया गया था।

माना जा रहा है कि एफआईआर में देरी होने से सिंधिया नाराज थे। उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस बारे में चर्चा भी की थी। इसके बाद ही यादव व उनके बेटे पर एफआईआर दर्ज की गई और फिर एसपी की रवानगी भी कर दी गई।

एडीएम ने पुलिस को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश की थी, लेकिन तीन दिन बाद भी पुलिस अधीक्षक कुमावत ने हीला-हवाली देखते हुए तत्परता से कार्रवाई नहीं की। हांलाकि बाद में उन्होंने सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। लेकिन तब तक वे सरकार की नाराजगी मोल ले चुके थे। जिसका खामियाजा आखिरकार उनको सोमवार देर शाम को भुगतना पड़ा और आखिरकार उन्हें जिले के पुलिस अधीक्षक पद से हटा दिया गया।

BJP आई बचाव में

दूसरी और एफआईआर से नाराज भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन तैयार किया है, जिसमें यादव पर दर्ज केस रद्द कराने की मांग की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि पूर्व सांसद सिंधिया के दबाव में यादव पर एफआईआर की गई है।

यह है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, यह मामला सन् 2014 का है जिसमें गुना सांसद केपी यादव ने अपने पुत्र सार्थक को पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का लाभ दिलाने और फायदा लेने के लिए अपनी आय को क्रीमीलेयर के 8 लाख रुपए से कम बताया गया था वहीं लोकसभा चुनाव के समय भी अपनी आय के खुलासे में आय 39 लाख के करीब बताया गया था, जिसे लेकर दोनों आयों में अंतर पाए जाने पर कांग्रेस विधायक ब्रजेंद्र सिंह यादव ने इस मामले में शिकायत एसडीएम से की थी।

जिसके आधार पर एसडीएम ने जांच करते हुए पाया कि, उनकी आय 8 लाख रुपए से ज्यादा है, जिस पर कार्रवाई करते हुए उनके जाति प्रमाण-पत्र को निरस्त कर इसका प्रतिवेदन एडीएम को भेजा गया। बता दें कि, हाल ही में 2019 में लोकसभा चुनाव में सांसद केपी यादव गुना सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर सांसद निर्वाचित हुए थे, जिसके बाद से वे चर्चा में थे।

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