सिर्फ भूखे-प्यासे रहना नहीं बल्कि पाक नियत की जरूरत है 'रोज़ा'

Kavita Singh Rathore

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमज़ान को पवित्र महीने का दर्जा मिला है। इन दिनों मुसलमान उपवास रखते हुए प्रार्थना और चिंतन करते हैं। इसे समुदाय के महीने के तौर पर मनाते हैं। इस दौरान वह सुबह से सूर्यास्त तक भोजन, पेय और अन्य शारीरिक ज़रूरतों से दूरी बनाकर रखते हैं। इस उपवास को उर्दू में “रोज़ा” नाम दिया गया है। साथ ही कठीन आत्म-अनुशासन का अभ्यास करते हैं।

क्या है रोज़ा ? | Aayush khochale - RE

रमज़ान के दिनों को इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना गया है। इतना ही नहीं रमज़ान मुस्लिम के विश्वास की नींव हैं। रमज़ान के दिनों में कड़े नियमों का पालन करना होता है। बता दें, इस्लाम के पांच स्तंभ शाहदा, सलाह, ज़कात, सॉम (रमज़ान के रोज़े) और हज हैं।

इस्लाम के पांच स्तंभ | Aayush khochale - RE

इस्लामी मान्यताओं इस दौरान कुरान, पैगंबर मोहम्मद पर नाज़िल (अवतरित) हुआ था। वहीं, ग्रंथों की मानें तो, रमज़ान में सच्चे और पाक दिल से दुआ करने पर अल्लाह सभी दुआएं पूरी होती हैं। इसके अलावा अपने सारे गुनाह भी माफ हो जाते हैं। इसलिए इस्लाम में रोज़े का बहुत महत्त्व है।

रोज़ा का महत्व | Aayush khochale - RE

रोज़ा रखना सिर्फ शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है। जिसका मुख्य उद्देश्य हमारे अंदर धैर्य, सहानुभूति और भक्ति जैसे गुण विकसित करना है। रोज़ा रखने के नियमों में ईमानदारी सबसे जरूरी है क्योंकि, रमजान का पालन करते हुए आप अल्लाह के करीब जाने की तलाश में होते हैं। रोज़े के दौरान मानसिक, शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति को फिद्या (दान) प्रदान करना चाहिए।

रोज़े रखने के नियम | Aayush khochale - RE

रमज़ान के दौरान जो महिलाएं मासिक धर्म में हो या हाल ही में उन्होंने बच्चे को जन्म दिया हो। वो रक्तस्राव तक रोज़ा नहीं रख सकती। हालांकि, वह ईद के बाद इन छूटे हुए रोजों को पूरा कर सकती हैं। इसके अलावा गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी अपनी सेहत देखते हुए रोज़ा रखना चाहिए।

कौन नहीं रख सकता रोज़ा | Aayush khochale - RE

रोज़े के घंटों के दौरान भोजन या पेय पदार्थ लेने, उल्टी होने और संभोग करने पर रोज़ा ख़त्म हो जाता है। इतना ही नहीं अगर अपने रोज़े के दौरान ये सब किया तो आपका रोज़ा अमान्य ही मन जाएगा।

क्या करने पर अमान्य होगा रोज़ा | Aayush khochale - RE

रोज़े के दौरान खाना-पीना तो वर्जित रहता ही है। साथ ही समय का दुरूपयोग, नापाक कार्य जैसे किसी भी तरह का नशा, पार्टी करना वर्जित है। इन दिनों आपको मन साफ़ रखते हुए किसी की चुगली, झूठ बोलना, किसी को बुरा बोलना, बुराई करना या कोई भी गलत काम नहीं करना चाहिए। इन दिनों में लोग बुरे काम तक छोड़ देते हैं।

रोज़े में क्या है वर्जित | Aayush khochale - RE

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