BRICS Summit 2026 : पुतिन-जिनपिंग का हाथ थामे दिखे मोदी, बोले- हम किसी के खिलाफ नहीं; शी ने कहा- साथ तरक्की करेंगे
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रूस और चीन के राष्ट्रपतियों के साथ मोदी की इस तस्वीर को भारत की बैलेंस्ड डिप्लोमेसी से जोड़कर देखा जा रहा है। (फोटो: ANI)
इंटरनेशनल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार शाम दिल्ली में बाइलेटरल मीटिंग हुई। सात साल बाद भारत आए जिनपिंग के साथ बातचीत में सीमा विवाद, ट्रेड और इन्वेस्टमेंट पर फोकस रहा। मोदी ने जिनपिंग का स्वागत करते हुए कहा- भारत की BRICS चेयरमैनशिप के दौरान चीन से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद। अब हमें बाइलेटरल कोऑपरेशन पर चर्चा करने का मौका मिला है।
इससे एक दिन पहले मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी बाइलेटरल मीटिंग की थी। BRICS समिट के दौरान मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक-दूसरे का हाथ थामे भी नजर आए।
जिनपिंग बोले- अब तक 21 बार मोदी से मिल चुका
जिनपिंग ने कहा- मुझे 15 जून को अपने जन्मदिन पर भारत आने का न्यौता मिला था। हम अब तक 21 बार मिल चुके हैं और कई अहम मुद्दों पर सहमति बनाई है। इन मुलाकातों ने भारत और चीन के रिश्तों को स्थिर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद की है। चीन हमेशा भारत के साथ अपने रिश्तों को स्ट्रैटजिक और लॉन्ग टर्म नजरिए से देखता है।
दोनों देश एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं
जिनपिंग ने कहा- भारत और चीन के हालात अलग हैं, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं। हम एक-दूसरे का साथ देकर और साथ काम करके तरक्की कर सकते हैं। दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश और ग्लोबल साउथ के अहम सदस्य होने के नाते भारत और चीन पर बड़ी जिम्मेदारी है। दोनों देशों को बराबरी वाली मल्टीपोलर दुनिया बनाने और ग्लोबल पीस, स्थिरता और विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
एकतरफा जंग के खिलाफ BRICS का जॉइंट डिक्लेरेशन
BRICS देशों के बीच शनिवार को समिट के पहले दिन जॉइंट डिक्लेरेशन पर सहमति बन गई। इसमें पहलगाम हमने की निंदा की गई। मोदी ने बताया कि सभी सदस्य देशों ने इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। डिक्लेरेशन में किसी भी देश की ओर से एकतरफा जंग शुरू करने की निंदा की गई है।

भारत की बैलेंस्ड डिप्लोमेसी
मोदी की वर्ल्ड लीडर्स के साथ कई तस्वीरें सामने आई हैं। इनमें से एक तस्वीर में मोदी बीच में खड़े हैं। उनके एक तरफ पुतिन और दूसरी तरफ जिनपिंग नजर आ रहे हैं। तीनों नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कैमरे के सामने पोज दिया। रूस और चीन के राष्ट्रपतियों के साथ मोदी की इस तस्वीर को भारत की बैलेंस्ड डिप्लोमेसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

मोदी ने BRICS समिट की शुरुआत की
मोदी ने शनिवार को दिल्ली में 18वीं BRICS समिट की शुरुआत की। ओपनिंग स्पीच में उन्होंने कहा- हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। सभी देशों को साथ लेकर और सहमति बनाकर आगे बढ़ना हमारा मकसद है। इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सात साल बाद भारत पहुंचे। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव किया। आज शाम 5:45 बजे मोदी और जिनपिंग के बीच बाइलेटरल मीटिंग होगी।

मोदी बोले- किसी के खिलाफ नहीं है BRICS
BRICS लीडर्स को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा- हम एक-दूसरे के नजरिए का सम्मान करते हैं और सहमति के साथ आगे बढ़ते हैं। हम किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। BRICS के अंदर बनी एकता और सहमति को अब ग्लोबल लेवल पर ठोस नतीजों में बदलने का समय आ गया है।

पेजेशकियान और प्रबोवो भी नजर आए

प्रधानमंत्री की ओर से शेयर की गई दूसरी तस्वीरों में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी नजर आए। मोदी ने समिट में पहुंचे सदस्य देशों के नेताओं के बीच बातचीत और ग्रुप फोटो के विजुअल्स अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट से शेयर किए हैं।

ग्लोबल साउथ को डिसीजन मेकर बनाने की मांग
प्रधानमंत्री ने कहा- ग्लोबल साउथ इंटरनेशनल संस्थानों की आगे वाली कतार में बैठता है, लेकिन फैसले लेने के मामले में अब भी पीछे है। ग्लोबल साउथ को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला भी बनना होगा। इसके लिए ग्लोबल संस्थानों में डेवलपिंग नेशंस की हिस्सेदारी और उनकी आवाज बढ़ानी होगी।

पिरामिड ऑफ प्रिविलेज बदलने की अपील
मोदी ने मौजूदा ग्लोबल सिस्टम को पिरामिड ऑफ प्रिविलेज बताया। उन्होंने कहा- हमें इस पिरामिड ऑफ प्रिविलेज को प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप में बदलना होगा। ऐसा प्लेटफॉर्म जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर कोशिश के केंद्र में मानवता की तरक्की हो।

BRICS रिफॉर्म रोडमैप का प्रपोजल
मोदी ने अगली समिट से पहले BRICS रिफॉर्म रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस में बदलाव के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने को कहा। यह रोडमैप रिप्रेजेंटेशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल-मेकिंग के तीन मुख्य पिलर्स पर आधारित होगा। इसका मकसद ग्लोबल संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाना है।
मोदी बोले- UNSC में सुधार अब और नहीं टाल सकते
PM ने कहा- UN सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने इससे जुड़ी बातचीत के लिए तय टाइमलाइन और साफ नतीजों की मांग की। मोदी ने कहा कि इंटरनेशनल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में वोटिंग पावर, लीडरशिप पोजिशन और पॉलिसी से जुड़ी प्रायोरिटी मौजूदा इकोनॉमिक हालात के मुताबिक होनी चाहिए।

अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा बनाने की अपील
मोदी ने कहा कि पिछले 20 साल में BRICS ने ग्लोबल लेवल पर अपनी अलग पहचान बनाई है। संगठन अब मैच्योरिटी और जिम्मेदारी के नए दौर में पहुंच गया है। उन्होंने सदस्य देशों से अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा- भारत की BRICS चेयरमैनशिप पीपुल-सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित है।
लीडर्स ने भारत इनोवेट्स एग्जीबिशन देखा
BRICS देशों के नेता भारत मंडपम में लगाई गई भारत इनोवेट्स एग्जीबिशन का दौरा किया। इसमें AI बेस्ड कैंसर स्क्रीनिंग, फ्लोटिंग सोलर सिस्टम, मरीन रोबोटिक्स और मदर-फीटल मॉनिटरिंग समेत 37 डीप-टेक इनोवेशन दिखाए जा रहे हैं। इसके बाद लीडर्स का फैमिली फोटो और जॉइंट ट्री-प्लांटेशन होगा।

जिनपिंग भारत पहुंचे
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंच गए। उनका प्लेन करीब 12:25 बजे पालम एयर फोर्स स्टेशन पर लैंड हुआ। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव किया।

जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यौते पर 18वीं BRICS समिट में हिस्सा लेने भारत आए हैं। शाम 5:45 बजे दोनों नेताओं के बीच बाइलेटरल मीटिंग हुई। मीटिंग में दोनों नेताओं ने आपसी ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने समेत दोनों देशों के मार्केट को एक दूसरे के मुफीद बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

सीनियर लीडर्स के साथ दिल्ली पहुंचे जिनपिंग
जिनपिंग शनिवार सुबह बीजिंग से भारत के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर लीडर काई ची और फॉरेन मिनिस्टर वांग यी भी दिल्ली पहुंचे। जिनपिंग ने BRICS समिट में स्पीच दी। इसके अलावा उन्होंने मौजूदा इंटरनेशनल हालात पर सदस्य देशों के नेताओं के साथ बातचीत भी की।
चीन बोला- भारत के साथ मतभेद खत्म करेंगे
भारत में चीन के एम्बेसडर शू फेइहोंग ने मोदी-जिनपिंग मीटिंग से पहले कहा- चीन और भारत दोनों नेताओं के स्ट्रैटजिक गाइडेंस में साथ काम करेंगे। हम आपसी बातचीत बढ़ाएंगे, सहयोग मजबूत करेंगे और मतभेदों को सही तरीके से संभालेंगे। उन्होंने दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की कामयाबी में मदद करने वाला पार्टनर बनने की बात भी कही।

लगातार तीसरे साल मिले मोदी-जिनपिंग
मोदी और जिनपिंग लगातार तीसरे साल मुलाकात की। दोनों नेता 2024 में रूस के कजान में BRICS समिट के दौरान मिले थे। इसके बाद 2025 में चीन के तियानजिन में उनकी मुलाकात हुई थी। हालांकि, जिनपिंग 2019 के बाद पहली बार भारत पहुंचे हैं। वह पिछली इंडिया विजिट के दौरान चेन्नई के पास मामल्लपुरम में इनफॉर्मल समिट में शामिल हुए थे।
ब्राजील के विदेश मंत्री दिल्ली पहुंचे

ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा 18वीं BRICS समिट में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंच गए हैं। वे राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जगह ब्राजील को रिप्रेजेंट करेंगे। लूला अपने देश में इलेक्शन कैंपेन के चलते भारत नहीं आए हैं। हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनसे मुलाकात की।
समिट में ये बड़े नेता शामिल
समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी शामिल हो रहे हैं। इनके अलावा मलेशियाई PM अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद, इथियोपियाई PM अबी अहमद अली और वियतनाम के PM ले मिन्ह हुंग भी समिट में पहुंचे हैं।

मोदी ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से मुलाकात की

PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट से अलग अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बाइलेटरल मीटिंग की। दोनों नेताओं के बीच ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, एनर्जी सिक्योरिटी और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय बोला- बेहतर बातचीत की उम्मीद
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा- हमें बेहतर बातचीत की उम्मीद है। BRICS कोऑपरेशन बढ़ाने के साथ ज्यादा बैलेंस्ड, रिप्रेजेंटेटिव और मल्टीपोलर वर्ल्ड बनाने में भी मदद कर रहा है।

काले कवर में दिखीं जिनपिंग के काफिले की कारें
जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद उनके काफिले की कारों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें कारें काले कवर से ढकी नजर आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाड़ियों को इस्तेमाल से पहले सुरक्षित तरीके से ट्रांसपोर्ट करने के लिए कवर किया गया था। इसे किसी खास सिक्योरिटी थ्रेट से जोड़ने वाला कोई सबूत सामने नहीं आया है।

विदेश मंत्रालय ने ब्रेकफास्ट वाली रिपोर्ट को फेक बताया
विदेश मंत्रालय ने BRICS समिट के वेन्यू पर वर्ल्ड लीडर्स को ब्रेकफास्ट परोसे जाने वाली रिपोर्ट्स को खारिज किया है। मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने कहा- यह फेक न्यूज है। आज समिट वेन्यू पर वर्ल्ड लीडर्स को ब्रेकफास्ट नहीं परोसा गया। वायरल विजुअल भारत मंडपम के इंटरनेशनल मीडिया सेंटर का है।

वियतनाम के PM से मिले मोदी

मोदी ने BRICS समिट से अलग वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग के साथ बाइलेटरल मीटिंग की। दोनों नेताओं ने भारत-वियतनाम रिश्तों और अलग-अलग सेक्टर्स में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
दोनों नेताओं के मीटिंग में इन मुद्दों पर फोकस
- लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर शांति बनाए रखना
- सीमा से सैनिकों को पीछे हटाने का प्रोसेस आगे बढ़ाना
- दोनों देशों के बीच भरोसा दोबारा मजबूत करना
- चीन के साथ बढ़ते भारतीय ट्रेड डेफिसिट को कम करना
- इंडियन प्रोडक्ट्स के लिए चीनी मार्केट में एंट्री आसान बनाना
- चीनी इन्वेस्टमेंट और जॉइंट वेंचर्स को मंजूरी देना
- कैलाश मानसरोवर यात्रा और वीजा प्रोसेस आसान करना
- डाइरेक्ट फ्लाइट और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना
- BRICS और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर कोऑपरेशन बढ़ाना
- अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी और ग्लोबल टैरिफ से बने हालात से निपटना
दोनों देशों के बीच फ्लाइट्स सामान्य हो रहीं
भारत और चीन के बीच 2020 में बंद हुई डाइरेक्ट फ्लाइट्स इस साल धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं। एयर इंडिया ने फरवरी में दिल्ली से चीन के लिए सर्विस बहाल की। इंडिगो ने मार्च में कोलकाता-शंघाई फ्लाइट शुरू की। एयर चाइना भी बीजिंग-दिल्ली रूट पर लौट चुकी है। अब चाइना सदर्न एयरलाइंस ने 21 सितंबर से ग्वांगझू-दिल्ली फ्लाइट शुरू करने का ऐलान किया है।
रिश्ते सुधारने की कोशिश, भरोसा अब भी चुनौती
दोनों देशों ने बॉर्डर टेंशन घटाने और डिप्लोमैटिक बातचीत बढ़ाने की कोशिश की है। इसके बावजूद भारत और चीन के बीच भरोसे की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। सीमा विवाद के अलावा ट्रेड डेफिसिट, चीनी कंपनियों पर जांच और स्ट्रैटजिक कॉम्पिटिशन जैसे मुद्दे अभी भी बरकरार हैं। ऐसे में मोदी-जिनपिंग मीटिंग से रिश्ते दोबारा पटरी पर लौटने की उम्मीद है।

