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जेल नहीं, सिर्फ जुर्माना: 100 से ज्यादा वित्तीय गड़बड़ी अब अपराध नहीं; सजा के बजाए 30% पेनल्टी लगेगी
Sun, 01 Feb, 2026
1 min read

100 से ज्यादा छोटे वित्तीय अपराध डीक्रिमनलाइज
बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जन विश्वास बिल (Jan Vishwas Bill 2.0) का ऐलान किया है। इसके तहत इनकम टैक्स और दूसरे फाइनेंशियल कानूनों के तहत 100 से ज्यादा छोटे-मोटे अपराधों को डीक्रिमनलाइज (Decriminalize) किया जाएगा, यानी अब ये अपराध की कैटेगरी में नहीं आएंगे।
अब बुक्स ऑफ अकाउंट्स पेश न करना, डॉक्यूमेंट्स न दिखाना या TDS जमा करने में मामूली देरी जैसे मामलों में आपराधिक केस नहीं चलेगा। ऐसे टेक्निकल वॉयलेशन को अब जेल के बजाय पेनल्टी या सिविल कंपाउंडिंग के जरिए निपटाया जाएगा।
उदाहरण के लिए, अगर कोई छोटा टैक्सपेयर ITR देर से फाइल करता है या फॉर्म 16ए जमा नहीं कर पाता, तो पहले जेल का खतरा था, अब सिर्फ जुर्माना लगेगा।
दूसरे हिस्से में अंडररिपोर्टिंग और मिसरिपोर्टिंग के मामलों में इम्युनिटी फ्रेमवर्क को बढ़ाया गया है। 20 लाख रुपए से कम वैल्यू वाले फॉरेन एसेट्स के नॉन-डिस्क्लोजर पर 1 अक्टूबर 2024 से रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट के साथ प्रॉसिक्यूशन से छूट मिलेगी।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई सैलरीड कर्मचारी गलती से 50 हजार रुपए की ओवरसीज रेमिटेंस डिक्लेयर करना भूल जाता है, यानी विदेश रकम भेजने की बात बताना भूल जाता है तो अब ब्लैक मनी एक्ट के तहत 120% पेनल्टी और जेल का डर नहीं रहेगा। ऐसे मामलों को वन-टाइम डिस्क्लोजर स्कीम या सिंपल पेनल्टी से सेटल किया जा सकेगा। इससे कंप्लायंस आसान होगा और गैरजरूरी केस कम होंगे।
रूल बेस्ड ऑटोमेटेड प्रोसेस लागू होगा
निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब कम या जीरो टीडीएस सर्टिफिकेट के लिए असेसिंग ऑफिसर के पास अप्लीकेशन करने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए एक रूल बेस्ड ऑटोमेटेड प्रोसेस लागू किया जाएगा। इससे टैक्सपेयर्स का समय बचेगा और प्रोसेस आसान होगी। सरकार का मकसद है कि टैक्स सिस्टम को सरल बनाया जाए। लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाना पड़े।
टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन में बड़े बदलाव का प्रावधान
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में टैक्स असेसमेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने का एलान किया है। अब टैक्स असेसमेंट और पेनल्टी की कार्रवाई अलग-अलग नहीं होगी। दोनों को मिलाकर एक ही कॉमन ऑर्डर जारी किया जाएगा। इससे टैक्सपेयर्स को दो अलग ऑर्डर्स का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इससे विवाद लंबा खिंचने की समस्या कम होगी और टैक्स से जुड़े मामलों में समय पर निपटारा हो सकेगा।
री-असेसमेंट के बाद भी अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने का मौका मिलेगा
बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को एक और मौका दिया गया है। अब री-असेसमेंट प्रोसेस शुरू होने के बाद भी अपडेटेड रिटर्न फाइल की जा सकेगी। इसके लिए संबंधित फाइनेंशियल ईयर के टैक्स के ऊपर 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैक्स देना होगा। एक बार अपडेटेड रिटर्न दाखिल होने के बाद असेसिंग ऑफिसर उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। इसका मकसद स्वेच्छा से गलती सुधारने को बढ़ावा देना है।
टैक्स अपील के लिए कम प्री-डिपॉजिट
सरकार ने टैक्स अपील दाखिल करने के लिए जरूरी प्री-डिपॉजिट की शर्त भी आसान कर दी है। अब अपील के लिए टैक्स डिमांड का सिर्फ 10 प्रतिशत जमा करना होगा। पहले यह सीमा 20 प्रतिशत थी। साथ ही यह रकम केवल मूल टैक्स डिमांड पर लागू होगी, पेनल्टी और ब्याज पर नहीं। इससे टैक्सपेयर्स के लिए अपील करना सस्ता होगा और गैरजरूरी प्रेशर कम होगा।
पेनल्टी पर ब्याज से राहत
बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को पेनल्टी से जुड़ी बड़ी राहत भी दी गई है। अगर कोई टैक्सपेयर पहले अपीलेट अथॉरिटी के सामने अपील करता है, तो उस दौरान पेनल्टी की रकम पर कोई ब्याज नहीं लगेगा। यह राहत अपील के नतीजे से अलग होगी। अभी तक अपील पेंडिंग रहने के दौरान भी ब्याज जुड़ जाता था, जिससे टैक्सपेयर्स पर एक्सट्रा बोझ बढ़ता था। सरकार इसे टैक्स डिस्पयूट कम करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।
कैंसर की 17 दवाओं पर ड्यूटी खत्म
यूनियन बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। सरकार ने 17 जरूरी कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है, जिससे इम्पोर्टेड दवाएं सस्ती होंगी और इलाज का खर्च कम होगा। इसके साथ ही 7 रेयर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को भी पर्सनल इम्पोर्ट पर कस्टम्स ड्यूटी से छूट दी गई है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से महंगे ट्रीटमेंट ज्यादा लोगों की पहुंच में आएंगे और हेल्थकेयर को किफायती बनाने में मदद मिलेगी।
TCS क्या है और बजट 2026 में क्या बदला
TCS यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स एक इनडायरेक्ट टैक्स मैकेनिज्म है, जिसमें सेलर जैसे फॉरेन एक्सचेंज डीलर या टूर ऑपरेटर, तय लेनदेन पर खरीदार से टैक्स वसूल कर सरकार के खाते में जमा करता है। विदेशी शिक्षा और ओवरसीज मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए किए जाने वाले पेमेंट पर एलआरएस के तहत TCS लागू होता है।
बजट 2026 में सरकार ने शिक्षा और मेडिकल दोनों कैटेगरी में TCS रेट कम करने का फैसला किया है, जो पहले 20 प्रतिशत तक थी। इस सिस्टम में सेलर सर्विस या रेमिटेंस अमाउंट के ऊपर एडिशनल टैक्स लेता है, जिसे खरीदार बाद में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय क्रेडिट के रूप में क्लेम कर सकता है। उदाहरण के तौर पर 10 हजार डॉलर की एजुकेशन रेमिटेंस पर कटा TCS फॉर्म 26क्यूबी में दिखता है, जिसे बाद में क्लेम किया जा सकता है।
एजुकेशन और मेडिकल पर TCS घटा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलआरएस यानी लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि एजुकेशन और मेडिकल जरूरतों के लिए भेजी जाने वाली रकम पर टीसीएस की रेट 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया। इससे विदेश में पढ़ाई या इलाज कराने वालों को राहत मिलेगी और खर्च कम होगा।
फॉर्म 15G और 15H में बदलाव
फाइनेंस मिनिस्ट ने कहा कि जिन इनवेस्टर्स के शेयर और सिक्योरिटीज कई कंपनियों में हैं, उन्हें भी राहत दी जाएगी। अब ऐसे निवेशक फॉर्म 15G या फॉर्म 15H सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे। डिपॉजिटरी यह जानकारी संबंधित कंपनियों को खुद उपलब्ध कराएगी। इससे अलग-अलग कंपनियों में फॉर्म जमा करने की परेशानी खत्म होगी और टीडीएस से जुड़ी दिक्कतें कम होंगी।
विदेशी आय और एसेट्स के लिए 6 महीने की स्कीम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में विदेशी आय और एसेट्स के अघोषित खुलासे के लिए 6 महीने की विशेष वॉलंटरी स्कीम का ऐलान किया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट से जोड़ा गया है। स्कीम दो कैटेगरी में होगी।
नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल से लागू होगा
सरकार ने नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 तैयार किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। ऐसे में यूनियन बजट में पुराने एक्ट से नए एक्ट में ट्रांजिशन को लेकर साफ प्रॉविजन्स का ऐलान किया गया है। टैक्स रूल्स, पॉलिसी और कंप्लायंस को आसान बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार का मकसद है कि आम टैक्सपेयर को नियम समझने में दिक्कत न हो और सिस्टम ज्यादा ट्रांसपेरेंट बने।
टैक्स स्लैब में हुए हैं बड़े बदलाव
इनकम टैक्स सिस्टम में समय के साथ बड़े बदलाव हुए हैं। आजादी के बाद 11 टैक्स स्लैब थे, जबकि अब न्यू टैक्स रिजीम में सिर्फ 7 स्लैब हैं। 2025 के बजट में 12 लाख रुपए तक की सालाना इनकम को टैक्स फ्री किया गया था। वहीं ओल्ड टैक्स रिजीम में अब भी ज्यादा डिडक्शन मिलते हैं, लेकिन टैक्स रेट ऊंचे हैं। यही वजह है कि टैक्सपेयर दोनों सिस्टम में उलझे रहते हैं।
2025 के बड़े फैसले
पिछले बजट में सरकार ने कई अहम फैसले लिए थे। न्यू टैक्स रिजीम में 12 लाख तक जीरो टैक्स, अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की लिमिट दो साल से बढ़ाकर चार साल की गई। रेंट पर TDS की लिमिट 2.40 लाख से बढ़ाकर 6 लाख रुपए कर दी गई। न्यू टैक्स स्लैब में 0 से 4 लाख पर टैक्स नहीं, जबकि 24 लाख से ऊपर 30 फीसदी टैक्स तय किया गया था।
कौन सा रिजीम बेहतर
ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम में कौन सा बेहतर है, इसका जवाब हर टैक्सपेयर के लिए अलग है। जिनके पास ज्यादा डिडक्शन हैं, उनके लिए ओल्ड रिजीम फायदेमंद हो सकता है। वहीं कम डिडक्शन वालों को न्यू रिजीम राहत देने वाला है। बिजनेस इनकम वालों के लिए स्विच करने के नियम सख्त हैं, जबकि सैलरीड क्लास हर साल ऑप्शन चुन सकती है। सही फैसला तुलना के बाद ही लेना बेहतर है।

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