परिवार में 200 साल बाद बेटी हुई: हॉस्पिटल से रथ में लेकर आए, ढोल-नगाड़े के साथ जुलूस निकाला; घर के बुजुर्ग बोले- यह दिन देखने के लिए आंखें तरस गई थीं
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बीड़ जिले में महिला-पुरुष रेशियो बेहद खराब है। ऐसे में बेटी होने पर इस तरह के जश्न को सोशल मीडिया पर खूब सराहा जा रहा है।
नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र के बीड़ जिले में हाल ही में निकाला गया एक जुलूस सुर्खियां बटोर रहा है। यह जुलूस घर में बेटी के जन्म पर निकाला गया। दिलचस्प बात यह थी कि परिवार में 200 साल बाद बिटिया आई थी। ऐसे में हॉस्पिटल से ही मां-बेटी को रथ में बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाया गया।
घर के लोगों का कहना है कि बीते 200 साल से परिवार में एक भी बेटी नहीं हुई। बीती 4 पीढ़ियों से बस लड़के पैदा हो रहे थे। बेटी की कमी जब इस बार पूरी हो गई तो सभी की इच्छा थी कि इस पल को उत्सव के साथ मनाया जाए इसीलिए इस तरह से बेटी का वेलकम करने का फैसला लिया गया।
यहां एक और दिलचस्प बात यह भी है कि बेटी के जन्म पर यह उत्सव उस इलाके में मनाया गया, जहां कन्या भ्रूण हत्या के कई मामले सामने आते रहे हैं। 2011 की जनगणना में इस इलाके में महिला-पुरुष रेशियो भी डराने वाला था। इसके मुताबिक यहां प्रति 1000 लड़के पर महज 801 लड़कियां थीं। सख्त कानून और जागरूकता अभियान के बाद यहां कुछ हद तक स्थिति सुधरी है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि यहां अब प्रति 1000 लड़कों पर 865 लड़कियां हैं, हालांकि यह भी 1:1 का अनुपात नहीं है।

दादा बोले- भाग्य खुल गए, दादी ने कहा- लक्ष्मी आई है
बच्ची के दादाजी लिम्बाजी दहीफले इस मौके पर इमोशनल नजर आए। एक वीडियो में वह यह कहते हुए नजर आए कि घर में बेटी का पैदा होना बड़े सौभाग्य की बात है। हमने हमारी बिटियां का नाम गार्गी रखा है। इसे हम ‘फूल’ की तरह बड़ी करेंगे। बच्ची की दादीजी भी इसी तरह कहती नजर आईं कि यह दिन देखने के लिए आंख तरस गई थी, अब जाकर हमारे घर लक्ष्मी हुई है।
सोशल मीडिया पर परिवार के इस सेलिब्रेशन की खूब तारीफ हो रही है। कोई कह रहा है कि बेटी के जन्म पर इस तरह के उत्सव से समाज में एक अच्छा मैसेज जाएगा। तो किसी ने कहा कि समाज में आज भी उस माइंडसेट के लोग हैं, जो बेटे-बेटी में भेदभाव रखते हैं और बेटी के जन्म को अशुभ तक मान लेते हैं। ऐसे में बेबी गर्ल का यह वेलकम लोगों की मानसिकता बदलने में मदद करेगा।
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