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स्मृति शेष : आशा भोसले के गीतों में नजर आती थी ग्वालियर घराने की झलक; कलाकार बोले- उनसे जुड़ना हमारे लिए गौरव की बात
Mon, 13 Apr, 2026
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आशा भोसले आईटीएम यूनिवर्सिटी में साल 2006 में नाद एम्पीथिएटर का उद्घाटन करने आई थीं।
"आशा भोसले के पिता ग्वालियर घराने के सिद्धहस्त कलाकार थे। उन्होंने अपनी बेटियों को भी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी, जिसका प्रभाव उनकी गायकी में साफ नजर आता है। कठिन तानें लेने के बाद जिस तरह वो सम पर आती थीं, वो कोई पारंगत शास्त्रीय कलाकार ही कर सकता है।"
"विश्वविख्यात स्वर साधिका आशा जी के आकस्मिक निधन से संपूर्ण विश्व के रसिक स्तब्ध और आहत हैं। वे सिने जगत की अज़ीम शख्सियत थीं। शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा उन्होंने पिता स्वर्गीय पंडित दीनानाथ मंगेशकर से ली थी, जो ग्वालियर घराने की समृद्ध गायन परंपरा में पारंगत थे। जिसकी वजह से उनके गायन में ग्वालियर घराने की गायकी की झलक नजर आती थी।"
"स्व. आशा भोसले ने जिस तरह संगीत की साधना कर अपनी पहचान बनाई, ऐसे में उनके बारे में कुछ भी कहना सूरज को दीपक दिखाने के समान है, लेकिन हम ग्वालियर के कलाकरों के लिए यह गर्व की बात है कि उनका ताल्लुक ग्वालियर घराने की गायकी से था।"

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