भारत समेत 6 देश का अलायंस बनाएगा इजराइल: नेतन्याहू बोले- इंडिया ग्लोबल पावर और मोदी अच्छे दोस्त, PAK PM ने कहा-मुस्लिम एकता पर हमला
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इंटरनेशनल डेस्क। इजराइल एक नया अलायंस बनाने की तैयारी कर रहा है। इस गुट में भारत समेत 6 देश शामिल होंगे। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने PM नरेंद्र मोदी के दौरे से ठीक एक दिन पहले कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया। उन्होंने इस दौरान भारत की तारीफ की। नेतन्याहू ने कहा- भारत एक ग्लोबल पावर है और मोदी मेेरे अच्छे दोस्त हैं। नेतन्याहू का यह कदम मिडिल ईस्ट में ईरान और साउथ एशिया में पाकिस्तान को रोकने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। वहीं इससे तुर्किये की टेंशन भी बढ़ेगी।
एशिया के कुछ देश इस गुट में शामिल होंगे हालांकि, इस वक्त मैं नामों का ऐलान नहीं कर सकता। ये सारे देश ऐसे हैं जिनकी सोच एक जैसी होगी। यह सभी देश क्षेत्रीय शांति के लिए मिलकर काम करेंगे। ये गुट कट्टरपंथी ताकतों से लड़ेगा।
वहीं पाकिस्तान इस घोषणा से बिफर पड़ा है। पाकिस्तान की संसद में इस ऐलान के खिलाफ 24 फरवरी को प्रस्ताव पारित हुआ। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि यह मुस्लिम एकता पर हमला है। यह मुस्लिम उम्मा को पॉलिटिकल और आइडियोलॉजिकल बेसिस पर अलग-थलग करने की कोशिश है।
इस गुट में कौन-कौन से देश शामिल होंगे
नेतन्याहू ने कहा कि इस गुट में अरब देश, अफ्रीकी देश, ग्रीस और साइप्रस और एशिया के कुछ देश शामिल होंगे। मैँ फिलहाल इस बारे में ज्यादा डिटेल नहीं देना चाहता। मैं इसे ऑर्गनाइज्ड तरीके से सामने रखूंगा। इस अलायंस से इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर( IMEC) को पूरा करने में आसानी होगा। यह ऐसा कोरीडोर होगा, जिसके तहत भारत से इजराइल तक करने का नया ट्रेड रूट तैयार हो जाएगा। यह रूट भारत से UAE होते हुए गुजरेगा और पाकिस्तान की टेरिटरी में जाने की जरूरत नहीं होगी।
पाकिस्तान की संसद में इजराइल की आलोचना
पाकिस्तान की पार्लियामेंट में हेक्सागन अलायंस के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव PPP नेता पलवाशा मोहम्मद जई खान ने पेश किया। इसमें कहा गया था कि इजराइल की लीडरशिप की ओर से मुस्लिम देशों के खिलाफ उकसाने वाला बयान दिया गया है बताया गया। इजरायल की ओर से दिसंबर 2025 में सोमालिया से अलग हुए सोमालीलैंड को मान्यता देने की भी आलोचना की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि सोमालीलैंड को मान्यता देना अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी है।
पाकिस्तान को इस अलायंस से क्या नुकसान
सीधा समझें तो IMEC पाकिस्तान को बायपास कर देगा। गुजरात के कांडला पोर्ट से कार्गो शिप्स UAE के जेबेल अली और सऊदी के दमाम पोर्ट से होते हुए इजराइल के हाइफा बंदरगाह पहुंच जाएंगे। नेतन्याहू ने अपने इस गुट को बनाने में सिक्योरिटी पर फोकस किया है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू इस ग्रुप को बनाकर एक साथ दो रीजन में दबदबा कायम कर लेंगे। मिडिल ईस्ट में ईरान और तुर्की को तो साउथ एशिया में पाकिस्तान का प्रभाव कम करेगा। इससे ग्वादर पोर्ट से जहाजों का मूवमेंट कम होगा और पाकिस्तान को नुकसान होगा।

अगर नेतन्याहू का प्लान सफल हुआ तो इससे तु़र्किये के ऑयल बिजनेस पर असर पड़ेगा। अलायंस में ग्रीस और साइप्रस को जोड़ने का इरादा है। ये दोनों देश तु़र्किये को अपना दुश्मन मानता है। ग्रीस और साइप्रस दोनों के साथ एजियन सी में कच्चे तेल की लड़ाई चल रही है। तु़र्किये इन दोनों देशों के कई इलाकों पर दावा करता है। ऐसे में इजराइल और भारत का साथ मिलने पर ये दोनों देश खुले तौर पर तु़र्किये के खिलाफ बगावत पर उतर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इजराइल इस गुट से सिक्योरिटी नेटवर्क को मजबूत करने की बात कह रहा है। तुर्की-साइप्रस और इजराइल ने भूमध्य सागर में पाइपलाइन बिछा ली तो तु़र्किये के 100 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) से तेल की सप्लाई घट जाएगी। तु़र्किये को सालाना 20 अरब डॉलर यानी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
इस प्लान से ईरान को काउंटर करने का प्लान
नेतन्याहू के हेक्सागन अलायंस को ईरान को घेरने की कोशिश भी माना जा रहा है। इसका कॉन्सेप्ट NATO जैसा होगा। यानी इन 6 देशों में से किसी पर भी हमला, सभी देशों पर हमला माना जाएगा। यह ईरान को 6 डायरेक्शन से घेरने की स्ट्रैटेजी है। ईरान खुद को रेडिकल शिया एक्सिस का लीडर मानता है। हिजबुल्लाह (लेबनान), हमास (गाजा) और हूती (यमन) जैसे संगठन ईरान के प्रॉक्सी माने जाते हैं। ईरान होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की धमकी देता है। नया कॉरीडोर बना तो ईरान की इस धमकी का तोड़ निकल आएगा। इस बात की संभावना है कि अरब देशों से ईरान का संपर्क कटेगा। ऐसे में पहले से ही खराब इकोनॉमिक कंडिशन से जूझ रहे ईरान को और ज्यादा नुकसान होगा।
क्या इस अलायंस में शामिल होगा भारत
भारत कभी हार्डकोर गुट में नहीं जाता। अमेरिका, रूस और चीन से एक साथ रिश्ते रखता है। ईरान से भी पुराने संबंध हैं। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। वहां से बड़ी रकम भारत आती है। ऐसे में किसी एक धुरी से जुड़ना आसान फैसला नहीं होगा। एक्सपर्ट का मानना है, भारत रक्षा, टेक्नोलॉजी और व्यापार पर ध्यान देगा, न कि किसी सैन्य संधि पर।अब तक किसी देश ने खुलकर हां नहीं कही है। ग्रीस और साइप्रस इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के सदस्य हैं। आईसीसी ने गाजा मामले में नेतन्याहू के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया है। ऐसे में इन दोनों देशों का अगला कदम क्या होगा, ये देखना दिलचस्प होगा।

