पेपर लीक रोकने के लिए टास्क फोर्स: टेक जायंट नंदन नीलेकणि लीड करेंगे; Ex IB-ISRO चीफ समेत 6 एक्सपर्ट
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नंदन नीलेकणि इन्फोसिस को फाउंडर हैं और उन्हें भारत की आधार सेवा शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।
नेशनल डेस्क. NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध के बाद मोदी सरकार इस दिशा में लगातार कठोर कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब पेपर लीक रोकने और शिक्षा में सुधार के लिए हाई लेवल टास्क फोर्स का गठन किया है। नंदन नीलेकणि इस टास्क फोर्स को लीड करेंगे। इतना ही नहीं आज सरकार पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 में संशोधन से जुड़ा बिल भी पेश करेगी। इसके तहत पेपर लीक मामले में दोषियों को कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा।
टास्क फोर्स में होंगे 6 सदस्य
1- नंदन नीलेकणि (अध्यक्ष)
2- एस सोमनाथ (पूर्व ISRO चीफ)
3- तपन डेका (पूर्व IB चीफ)
4- वी कामकोटि (IIT मद्रास के डायरेक्टर)
5- अनीता करवाल (CBSE की पूर्व चेयरमैन, स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट की पूर्व सचिव)
6- अमृत लाल मीणा (बिहार के पूर्व प्रमुख सचिव)
कौन हैं नंदन नीलेकणि
भारत के टेक्नोलॉजी इंटरप्रेन्योर हैं। वे इन्फोसिस के को-फाउंडर हैं और उन्हें भारत में आधार सेवा शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। 2009 से 2014 तक वे कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ UIDAI (Unique Identification Authority of India) के पहले अध्यक्ष रहे।

UPI सिस्टम को बढ़ावा देने में भी नीलेकणि की भूमिका रही है। उन्होंने डिजिटल पेमेंट पर RBI समिति की अगुवाई की। वे G20 Digital Task Force में भी शामिल रहे। पीएम मोदी ने उन्हें टास्क फोर्स लीड करने की जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि वे एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर परीक्षाओं को सुरक्षित, पारदर्शी बनाने के लिए सुझाव देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
डॉ. एस. सोमनाथ





क्या काम करेगा टास्क फोर्स
दरअसल, ये पैनल शिक्षा और पेपर सिस्टम सुधार के लिए स्ट्रक्चरल और टेक्नोलॉजी सुधारों की सिफारिश करेगा। टास्क फोर्स भारत की परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, विश्वनीय, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने के लिए जरूरी सुझाव देगा।
पेपर लीक पर आज संशोधन बिल भी लाएगी सरकार
मोदी सरकार आज सदन में पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 में संशोधन से जुड़ा बिल पेश करेगी। इसे शुक्रवार को कैबिनेट से भी मंजूरी मिल गई है। इससे पहले पीएम मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। इन अदालतों को तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी करके फैसला और सजा सुनानी होगी। पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए अधिकतम सजा 10 साल और जुर्माना बढ़ाकर ₹10 करोड़ तक करने की तैयारी है।
CJP ने NEET को लेकर चल रहा प्रोटेस्ट खत्म किया
इससे पहले शनिवार को CJP ने सरकार के साथ बैठक के बाद जंतर-मंतर पर करीब 1 महीने से चल रहा विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया था। दरअसल, CJP ने तीन मांगें रखी थीं। सरकार ने इन तीनों मांगों को मान लिया था। इसके बाद CJP ने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की थी।
क्या थीं CJP की मांगें
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- सुसाइड करने वाले NEET स्टूडेंट्स के परिजनों को मुआवजा
- 20 जुलाई को प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर दर्ज FIR वापस हों

