PAK से जंग रुकवाने का क्रेडिट नहीं मिलने से ट्रम्प का ईगो हर्ट हुआ: रघुराम राजन बोले- भारत पर टैरिफ बढ़ाने की वजह रूस से तेल खरीद नहीं, ट्रम्प की पर्सनल खुन्नस
Published:
3 min read

इंटरनेशनल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और जाने-माने अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने बड़ा दावा किया है। अमेरिका ने भारत पर लगाए 50% टैरिफ की असली वजह भारत का रूसी तेल खरीदना नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पर्सनल खुन्नस थी। भारत ने ट्रम्प के उस दावे को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान जंग में सीजफायर का क्रेडिट खुद को दिया था।
स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के UBS सेंटर फॉर इकॉनोमिक्स इन सोसाइटी में 4 दिसंबर को बोलते हुए राजन ने कहा- इस पूरे मामले में व्हाइट हाउस में बैठी पर्सनैलिटी सबसे अहम फैक्टर थी। हालांकि, इस मामले में पाकिस्तान ने स्थिति को सही तरीके से संभाला, जबकि भारत ने इसके उलट ट्रम्प के सीजफायर क्रेडिट को सरे से नकार दिया। साथ ही यह साफ किया कि सीजफायर दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत से हुआ, न कि अमेरिकी मध्यस्थता से।
चार दिन की जंग के बाद बढ़ी तनातनी
राजन उस चार दिन की जंग का जिक्र कर रहे थे, जो मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 लोगों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की थी। जवाब में पाकिस्तान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद भारतीय सेना ने उसके सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। हालात बिगड़ते देख पाकिस्तान को अमेरिका से मदद मांगनी पड़ी।
सीजफायर के बाद पाकिस्तान ने ट्रम्प की खुलकर तारीफ की, जबकि भारत ने साफ किया कि पाकिस्तान ने खुद से दो बार संपर्क कर संघर्ष रोकने की अपील की थी।
तेल नहीं, राजनीति बनी वजह
जब राजन से पूछा गया कि क्या रूस से कम तेल खरीदना ट्रम्प को खुश करने का तरीका हो सकता है, तो उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि रूसी तेल कभी मुख्य मुद्दा था। हमने देखा कि ट्रम्प ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के मामले में तेल खरीद पर आंख बंद कर ली।
असल मुद्दा ट्रम्प की पर्सनैलिटी थी। भारत की ओर से उनके दावे को नकारना ही टैरिफ की वजह बना। इसे ट्रम्प अपने इगो पर ले गए। भारत का ट्रम्प के दावे को खारिज करने का नतीजा यह हुआ कि भारत पर 50% टैरिफ लगे, जबकि पाकिस्तान पर सिर्फ 19%।
भारत ने मध्यस्थता से किया इनकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के जरिए ट्रम्प को यह साफ मैसेज दिया कि भारत-पाक जंग में किसी तरह की मध्यस्थता पर चर्चा नहीं हुई। बाद में मोदी ने इसे दोहराया, भारत न पहले किसी मध्यस्थता को मानता था और न भविष्य में मानेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि सीजफायर पूरी तरह आर्मी लेवल पर दोनों देशों के बीच संपर्क का नतीजा था।
टैरिफ विवाद बना कड़वा
अगस्त में ट्रम्प सरकार ने भारत से एक्सपोर्ट होने वाले प्रोडक्ट पर 50% तक टैरिफ लगा दिए थे। इसे रूस से तेल खरीद और एकतरफा व्यापार करार दिया गया। इस दौरान ट्रम्प के सहयोगियों, जैसे पीटर नवारो और स्टीफन मिलर, ने भारत की लीडरशिप पर प्रोवोकेटिव बयान दिए, जिससे मामला और बिगड़ गया।
राजन ने आखिर में कहा- उन्हें नहीं पता कि पर्दे के पीछे अमेरिका और भारत के बीच क्या हुआ, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि लंबे समय में दोनों पक्षों में साझेदारी बढ़ेगी।

