SIR पर मतभेद की रिपोर्ट पर EC की सफाई: आयोग ने कहा- अलग राय होना आम बात, फैसले तीनों चुनाव आयुक्त की सहमति से ही हुए
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एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू व डॉ. विवेक जोशी एकमत नहीं थे। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के अंदर मतभेद की रिपोर्ट पर सफाई आ गई है। आयोग ने बुधवार (23 सितंबर) को एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि किसी मुद्दे पर अलग राय या सुझाव सामने आना सामान्य बात है और संस्था के कामकाज की सामान्य प्रोसेस का हिस्सा है। आयोग ने बताया कि उसके सभी फैसले और आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से ही लिए गए हैं।
दरअसल, 'द इंडियन एक्सप्रेस' की बुधवार (23 सितंबर) को आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि SIR और इससे जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच मतभेद थे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की।
तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए सभी फैसले
आयोग ने अपने प्रेस नोट में कहा कि वह संविधान के आर्टिकल 324 के तहत काम करने वाली संस्था है, जिसमें कई लोग काम करते हैं। यहां नोट, सुझाव, तकनीकी सवाल और अंदरूनी जांच-पड़ताल के जरिए ही फैसले लिए जाते हैं।
आयोग ने बताया उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद ही जारी होते हैं और तय लीगल प्रोसेस का पालन करते हैं।
प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि किसी फैसले की तैयारी के दौरान चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवाल या दिए गए सुझाव एक सामान्य एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस का हिस्सा हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि संस्था के अंतिम फैसले में मतभेद है।
EC के मुताबिक, आयोग का हर अधिकारी चुनाव व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव और अपनी राय दे सकता है। सिर्फ तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग के अधिकारी भी अपनी बात रखने के लिए आजाद हैं।

रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ था?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी की आपत्तियां वोटर लिस्ट से जुड़े कई अहम मामलों पर थीं। इनमें नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन, वोटर के नाम हटाने, वोटर डेटा संभालने वाले सॉफ्टवेयर और पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से जुड़ी अपील शामिल थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाया था कि क्या उनकी जानकारी और मंजूरी के बिना कुछ फैसले लिए गए। इन आपत्तियों की लिखित कॉपी CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी।
Form 6 में बदलाव पर सवाल
नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए Form 6 का इस्तेमाल होता है। इसमें SIR से जुड़े सवाल जोड़े गए। नए आवेदकों से पूछा गया था कि उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में था या नहीं।
रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि Form 6 चुनाव नियमों के तहत तय है और इसमें इस तरह का बदलाव नियम बदले बिना नहीं किया जा सकता। बाद में संधू ने भी जोशी की शिकायत को सपोर्ट किया। संधू ने इसे अनअथॉराइज्ड और अवैध बताते हुए हटाने की बात कही थी।
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वोटर डेटा को लेकर सवाल
रिपोर्ट में बताया गया कि जोशी ने वोटर डेटा के धीरे-धीरे दिल्ली में सेंट्रलाइज्ड होने पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव कानून के तहत अधिकार प्राप्त अधिकारी ही करें और इसके लिए ऑडिट भी किया जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में संधू ने भी इलेक्टोरल रोल से जुड़े काम के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर 'ERONet' तक राज्य के अधिकारियों की पहुंच न होने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा था कि कई राज्यों के चुनाव अधिकारियों के पास सिस्टम का प्रॉपर और कम्पलीट एक्सेस नहीं है।
पश्चिम बंगाल और गोवा का मामला
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान वोटर नाम हटाने और दोबारा जोड़ने का मामला काफी चर्चा में रहा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, संधू ने सवाल उठाया था कि न्यायिक जांच के बाद जिन वोटर के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखे गए थे, उन्हें हटाने की अपील किसने और किस अधिकार के तहत दाखिल कीं।
रिपोर्ट में गोवा का भी जिक्र है। इसमें कहा गया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने 97 वोटर्स के नाम वापस जोड़ने की अपील को सही पाया लेकिन सॉफ्टवेयर ने उन अफसरों को यह करेक्शन करने की परमिशन नहीं दी।
संधू और जोशी ने चुनाव आयोग के IT सिस्टम में किए जा रहे बदलावों को लेकर कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को भी पत्र लिखा था। दोनों को आशंका थी कि इन बदलावों से वोटर लिस्ट से जुड़े सिस्टम की मॉनिटरिंग और कंट्रोल में बदलाव हो सकता है।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिए?
चुनाव आयोग ने प्रेस नोट में पिछले 10 महीनों के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि इस टाइम पीरियड में उसने करीब 40 नई पहल और चुनाव सुधार से जुड़े काम शुरू किए हैं।
इनमें देशभर में इलेक्टोरल रोल की समीक्षा और SIR जैसे काम भी शामिल हैं। आयोग ने दावा किया कि ये सभी फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए।
EC ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET को लेकर कहा कि उसके डिजिटल सिस्टम में डेटा की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम हैं, ताकि कोई बिना परमिशन डेटा में बदलाव या छेड़छाड़ न कर सके।

