मूंदड़ा बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी मैनुफैक्चरिंग हब, अडाणी समूह ने शुरू की तैयारी

अडाणी सोलर के सेल्स और मार्केटिंग हेड राहुल भूटियानी ने बताया अडाणी समूह ने मूंदड़ा को दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी मैनुफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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हाईलाइट्स

  • यहां पॉलीसिलिकॉन, इनगॉट्स, वेफर्स, सेल, सोलर मॉड्यूल व विंड टर्बाइन बनाए जाएंगे

  • यहां पर वे सभी उपकरण भी बनाए जाएंगे जिनकी ग्रीन एनर्जी बनाने जरूरत पड़ती है

राज एक्सप्रेस। अडाणी समूह की कंपनी अडाणी सोलर के सेल्स और मार्केटिंग हेड राहुल भूटियानी ने बताया कि अडाणी समूह ने गुजरात के मूंदड़ा को दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी मैनुफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। अडाणी सोलर के राहुल भूटियानी ने बताया कियहां पॉलीसिलिकॉन, इनगॉट्स, वेफर्स, सेल, सोलर मॉड्यूल और विंड टर्बाइन के साथ वे सभी चीजें बनाई जाएंगी जिनकी ग्रीन एनर्जी बनाने में जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही, इन चीजों को बनाने में जिन चीजों की जरूरत पड़ेगी, उन्हें भी यहीं पर तैयार किया जाएगा।

अडाणी सोलर के राहुल भूटियानी ने बताया यहां ग्लास, एथिलीन विनाइल एसीटेट (ईवीए) फिल्म्स, बैकशीट और एलुमिनियम फ्रेम (जिनका इस्तेमाल सोलर पैनल में होता है) का उत्पादन किया जाता है। अडाणी समूह की क्षमता 4 गीगावॉट का सोलर मॉड्यूल बनाने की है। इस साल 3.8 गीगावॉट सोलर माड्यूल बनाया जाएगा। इसमें से 3-3.1 गीगावॉट निर्यात करने की योजना है। बाकी की बिक्री घरेलू मार्केट में होगी, क्योंकि यहां मांग कम है। अडाणी सोलर और अडाणी विंड को अडाणी समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज ने बनाया है। अब समूह ने कम से कम लागत पर रिन्यूएबल एनर्जी और प्रोडक्ट्स तैयार करने के लिए अडाणी न्यू इंडस्ट्रीज तैयार की है जिसमें जल्द ही अडाणी सोलर और अडाणी विंड को मिला दिया जाएगा।

अडाणी सोलर के सेल्स और मार्केटिंग हेड राहुल भूटियानी का दावा है कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा प्लांट है, जहां रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़ी सभी चीजें तैयार की जाएंगी। इसके अलावा अडाणी विंड भी मूंदड़ा में हीं विंड टर्बाईन बनाने की क्षमता 1.5 गीगावॉट से बढ़ाकर 5 गीगावॉट करने जा रही है। राहुल का दावा है कि इस समय दुनिया के किसी भी देश में एक ही जगह सभी चीजें तैयार नहीं होती हैं, चीन में भी नहीं।

उनका कहना है कि चीन में एक ही कंपनी की सोलर मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी 20-40 गीगावॉट या इससे अधिक हो सकती है लेकिन उनका भी फोकस सप्लाई चेन के सिर्फ एक ही प्रोडक्ट पर है। जैसे कि कोई कंपनी चीन में वेफर्स बना रही है तो यह सिर्फ 100 गीगावॉट के लिए वेफर्स ही बनाएगी। दूसरी कंपनी 50 गीगावॉट के लिए पॉलीसिलिकॉन ही बनाएगी और तीसरी कंपनी 50 गीगावॉट का सेल।

अडाणी सोलर के सेल्स और मार्केटिंग हेड राहुल के मुताबिक अडाणी समूह इन सभी चीजों को एक ही जगह बनाएगी तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि काम में तेजी आएगी और सस्ता भी पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि ट्रांसपोर्टेशन चार्ज तेजी से गिर जाएगा। मूंदड़ा पावर प्लांट की वजह से बिजली की दिक्कत नहीं आएगी। पॉलीसिलिकॉन, इनगॉट्स और वेफर बनाने में बहुत बिजली लगती है। अब मैनुफैक्चरिंग के बाद सप्लाई करना हो तो अडाणी ग्रुप के पास मूंदड़ा पोर्ट भी है जैसे कि चेन्नई सप्लाई करना हो तो पोर्ट के जरिए समुद्री रास्ते से इसे फटाफट पहुंचाया जा सकता है। अड़ाणी सोलर 10-10 गीगावॉट के वेफर्स, सेल्स, पॉलीसिलिकॉन, इनगॉट्स और सोलर मॉड्यूल बनाने के लिए प्लांट तैयार करेगी। इसकी क्षमता 4 गीगावॉट सोलर मॉड्यूल, 4 गीगावॉट सेल्स और 2 गीगावॉट वेफर्स बनाने की है, जिन्हें बढ़ाकर 10-10 गीगावॉट करना है। इन्हें सेटअप करने में करीब 20 हजार करोड़ का खर्च आएगा।

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