एस्ट्राजेनेका ने कोरोना वैक्सीन का उत्पादन बंद किया
एस्ट्राजेनेका ने कोरोना वैक्सीन का उत्पादन बंद कियाRaj Express

एस्ट्राजेनेका ने कोरोना वैक्सीन का उत्पादन बंद किया, वापस लेगी अपनी वैक्सीन

ब्रिटिश की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अपनी कोरोना वैक्सीन का उत्पादन बंद कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने कोविड-19 वैक्सीन को वापस लेने का निर्णय लिया है।

हाईलाइट्स

  • कंपनी ने कहा उसके इस निर्णय की वजह साइड इफेक्ट नहीं

  • एस्ट्राजेनेका के इसी फैसले से भारत में बनी थी कोवीशील्ड

  • कंपनी बोली इस समय बाजार में कई प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध

राज एक्सप्रेस । ब्रिटिश की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनिया भर में अपनी कोविड-19 वैक्सीन की खरीद-बिक्री बंद करने का निर्णय लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन उत्पादन और आपूर्ति बंद कर दी है। एस्ट्राजेनेका ने कहा कि उसने इस वैक्सीन का उत्पादन और आपूर्ति बंद करने का निर्णय वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स की वजह से नहीं लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि हमने व्यावसायिक वजहों से वैक्सीन को बाजारों से हटाने का निर्णय लिया है। एस्ट्राजेनेका ने कहा मौजूदा समय में बाजार में कई अन्य वैक्सीन उपलब्ध हैं, जो प्रभाव में ज्यादा बेहतर हैं। यही वजह है, हमने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का उत्पादन और आपूर्ति बंद कर दी है। यह ताजा घटनाक्रम एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन के विरुद्ध ब्रिटिश अदालत में चार दर्जन से अधिक केस दर्ज किए जाने के बाद सामने आया है। जिनमें कंपनी से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की मुआवजा राशि मांगी गई है।

कंपनी ने 7 मई से बंद किया उत्पादन और आपूर्ति

मीडिया रिपोर्ट में एस्ट्राजेनेका के हवाले से बताया गया है कि कंपनी ने इस साल 5 मार्च को वैक्सीन वापस लेने के लिए आवेदन दिया था। इस पर उसे मंजूरी मिल गई है और कंपनी ने मंगलवार 7 मई से अपना उत्पादन और आपूर्ति बंद कर दी है। अब यूरोपीय संघ में वैक्सीन का उपयोग नहीं किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि एस्ट्राजेनेका ने 2020 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ संयुक्त रूप से कोरोना की वैक्सीन बनाई थी। भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ने भी बाद में इसी फार्मूले के आधार पर कोवीशील्ड नाम से वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया था।

एस्ट्राजेनेका ने माना हो सकते हैं साइड़ इफेक्ट

एस्ट्राजेनेका ने फरवरी माह में एक सुनवाई के दौरान ब्रिटिश उच्च न्यायालय को बताया था कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन के खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। कंपनी ने कोर्ट में जमा किए गए अपने दस्तावेजों में स्वीकार किया कि उसकी कोरोना वैक्सीन से कुछ मामलों में थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी टीटीएस के लक्षण देखने को मिल सकते हैं। टीटीएस से शरीर में खून के थक्के जम जाते हैं और प्लेटलेट्स की संख्या घट जाती है। हालांकि, ऐसा दुर्लभ मामलों में ही देखने को मिल सकता है। एस्ट्राजेनेका के खिलाफ ब्रिटिश उच्च न्यायालय में 51 केस चल रहे हैं। जिनमें कंपनी से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक का हर्जाने की मांग की गई है।

अब तक 51 केस दर्ज, जेमी स्कॉट ने किया था पहला केस

एस्ट्राजेनेका पर सबसे पहले ब्रिटिश नागरिक जेमी स्कॉट ने केस किया है। जेमी स्कॉट ने अप्रैल 2021 में यह वैक्सीन लगवाई थी। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई। उनके खून के थक्के जमने लगे। जिसका सीधा असर उनके दिमाग पर पड़ा। इसकी वजह से जेमी स्कॉट के ब्रेन में इंटर्नल ब्लीडिंग भी देखने को मिली। उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि डॉक्टरों ने उनकी पत्नी से कह दिया था कि अब स्कॉट का बचना असंभव है। इसके बाद ही जेमी स्कॉट के परिजनों ने पिछले साल एस्ट्राजेनेका के खिलाफ केस दर्ज कराने का निर्णय लिया। 2023 में स्कॉट के आरोपों के जवाब में कंपनी ने दावा किया था कि उनकी वैक्सीन से टीटीएस नहीं हो सकता। हालांकि, बाद में उसने स्वीकार किया कुछ मामलों में ऐसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, वैक्सीन में किस चीज की वजह से यह बीमारी होती है, इसकी जानकारी फिलहाल कंपनी के पास नहीं है।

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