एथेनॉल को रसोई तक लाने का प्लान नहीं: सरकार ने कहा- कुकिंग फ्यूल में अभी इसे अनिवार्य नहीं किया; डीजल में भी ब्लेंडिंग की संभावना खारिज की
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बिजनेस डेस्क। ट्रांसपोर्ट फ्यूल के तौर पर एथेनॉल का इस्तेमाल भले ही तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन इसे रसोई तक लाने का सरकार का अभी कोई प्लान नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए डीजल में एथेनॉल मिलाने की संभावना को भी खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस स्टेट मिनिस्टर सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा में बताया कि इथेनॉल को खाना पकाने के ईंधन (कुकिंग फ्यूल) के तौर पर मंजूरी या अनिवार्य नहीं किया गया है। फिलहाल घरेलू इस्तेमाल के लिए इसे लाने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है।
दरअसल, सवाल उठ रहे थे कि क्या सरकार LPG के साथ-साथ एथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के तौर पर बढ़ावा देने की कोई नीति तैयार कर रही है। क्या इसके सितंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। इसी सवाल पर मंत्री ने क्लेरिफिकेशन दिया।
किचन में एथेनॉल लाने की कोई पॉलिसी नहीं
सरकार ने कहा, अभी एथेनॉल को घरेलू फ्यूल के तौर पर मंजूरी देने या अनिवार्य करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसका मतलब है कि फिलहाल, देश की मौजूदा घरेलू एनर्जी के तहत LPG ही खाना पकाने का मुख्य ईंधन बना हुआ है। हालांकि, सरकार ने ये माना है कि भविष्य में एथेनॉल खाना पकाने के अल्टरनेटिव फ्यूल के तौर पर भूमिका निभा सकता है। मंत्री के मुताबिक, एथेनॉल बेस्ड खाना पकाने की तकनीक से भारत की इम्पोर्टेड LPG पर निर्भरता कम होगी। साथ ही खाना पकाने का एक और साफ-सुथरा ऑप्शन मिलेगा। उन्होंने ये भी कहा कि इस कदम से देश में एथेनॉल प्रोडक्शन की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।

डीजल में एथेनॉल मिलाने की संभावना खारिज
हालांकि, अभी एथेनॉल वाले कुकिंग फ्यूल पर विचार नहीं किया जा रहा है। लेकिन सरकार ने डीजल में एथेनॉल मिलाने की संभावना को भी खारिज कर दिया है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अपनी रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर्स के जरिए एथेनॉल-डीजल मिश्रण (ब्लेंड) का साइंटिफिक इवेलुएशन किया। ये स्टडीज मान्यता प्राप्त लैबोरेटरीज और ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों के सपोर्ट से की गई थीं। इन स्टडीज के नतीजों से सुरक्षा से जुड़ी एक अहम चिंता सामने आई।
टेस्ट में पाया गया कि एथेनॉल मिला डीजल जरूरी फ्लैश पॉइंट के स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरा। क्योंकि एथेनॉल की मौजूदगी से ये काफी कम हो गया था। कम फ्लैश पॉइंट का मतलब है कि फ्यूल में आसानी से आग लग सकती है, जिससे इसके हैंडलिंग और स्टोरेज को लेकर डर पैदा होता है।
पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल का प्लान नहीं
मंत्री ने ये भी साफ किया है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की मौजूदा 20% की लिमिट से ज्यादा बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। एथेनॉल का मिश्रण बढ़ाने के बारे में कोई भी कदम उठाने से पहले डिटेल्ड साइंटिफिक और टेक्निकल स्टडीज की जाएंगी। सरकार ऐसा कोई भी फैसला लेने से पहले ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिसर्च इंस्टीट्यूशंस से भी सलाह लेंगी।
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