क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, OPEC+ ने लगातार 5वीं बार बढ़ाया सप्लाई
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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि 2026 में दुनिया में रोजाना करीब 40 लाख बैरल अतिरिक्त तेल उपलब्ध हो सकता है। यह वैश्विक मांग का लगभग 4% होगा। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर उस लेवल पर आ गई हैं। जहां वे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध से पहले थीं। कुछ महीने पहले ब्रेंट क्रूड करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। अब इसकी कीमत 71-72 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड 68-69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। इस गिरावट की वजह OPEC+ का उत्पादन बढ़ाना और सऊदी अरब का एशिया के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कटौती करना माना जा रहा है।
OPEC+ ने लगातार 5वीं बार उत्पादन बढ़ाया
रविवार को OPEC+ के सात प्रमुख देशों सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला मंजूर किया। यह लगातार 5वां महीना है जब OPEC+ उत्पादन बढ़ा रहा है, जबकि बाजार में तेल की कीमतें कमजोर बनी हुई हैं।
किन देशों का उत्पादन कितना बढ़ेगा
नए लक्ष्य के मुताबिक सऊदी अरब और रूस अपने उत्पादन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी करेंगे।
- सऊदी अरब रोजाना 62,000 बैरल अतिरिक्त तेल निकालेगा।
- रूस भी 62,000 बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाएगा।
- सऊदी अरब का कुल उत्पादन बढ़कर 1.04 करोड़ बैरल प्रतिदिन होगा।
- रूस का उत्पादन बढ़कर 98.8 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच जाएगा।
- अल्जीरिया और ओमान भी सीमित मात्रा में उत्पादन बढ़ाएंगे।

सऊदी अरामको ने 20 साल की सबसे बड़ी कटौती की
OPEC+ के फैसले के साथ ही सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अगस्त के लिए एशियाई ग्राहकों को मिलने वाले 'अरब लाइट क्रूड' की आधिकारिक बिक्री कीमत में 20 साल से ज्यादा समय की सबसे बड़ी मासिक कटौती कर दी। अब यह तेल ओमान और दुबई बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम कीमत पर बेचा जाएगा। यह जुलाई के मुकाबले 11 डॉलर की कमी है और जून 2020 के बाद सबसे निचला स्तर भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एशिया में रूस और ईरान के सस्ते तेल से मुकाबला करने और अपनी हिस्सेदारी बचाने के लिए उठाया गया है, न कि किसी नए प्राइस वॉर की शुरुआत के लिए।
OPEC ने 2026 की डिमांड का अनुमान भी घटाया
उत्पादन बढ़ाने के बीच OPEC ने भविष्य की डिमांड को लेकर अपना अनुमान भी कम किया। जून की रिपोर्ट में संगठन ने 2026 के लिए वैश्विक तेल मांग वृद्धि का अनुमान दूसरी बार घटाया।
अब OPEC का अनुमान है कि अगले साल ऑयल की डिमांड में प्रतिदिन 9.70 लाख बैरल की बढ़ोतरी होगी, जबकि पहले यह अनुमान 11.7 लाख बैरल प्रतिदिन था। हालांकि OPEC का कहना है कि ग्लोबल इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है, लेकिन बाजार में निवेशकों का भरोसा पहले जितना मजबूत नहीं दिख रहा।
स्टेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई सामान्य हो रही
युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र से तेल सप्लाई काफी प्रभावित हुई थी। OPEC के आंकड़ों के अनुसार 2026 की पहली तिमाही से लेकर मई तक सऊदी अरब, इराक और कुवैत का संयुक्त उत्पादन करीब 60 लाख बैरल प्रतिदिन तक घट गया था। अब स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है।
- सऊदी अरब का एक्सपोर्ट वॉर से पहले के लगभग 90% स्तर तक लौट आया है।
- UAE का कहना है कि उसका एक्सपोर्ट पूरी तरह सामान्य हो चुका है।
- कई टैंकर फिर से स्टेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं।
- तेल पाइपलाइन के जरिए भी भेजा जा रहा है ताकि समुद्री रास्ते पर दबाव कम रहे।

अभी स्टॉक से पूरी हो रही है बाजार की डिमांड
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में पहुंच रहा काफी तेल नए उत्पादन से नहीं बल्कि पहले से जमा भंडार से आ रहा है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि होर्मुज से गुजरने वाला तेल अब रोजाना 1 करोड़ बैरल से ज्यादा हो सकता है। सैक्सो बैंक के कमोडिटी स्ट्रैटेजी प्रमुख ओले हैनसेन का कहना है कि अगर शिपिंग पूरी तरह सामान्य रही तो जुलाई में सुधार और अगस्त में सप्लाई में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्या कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं
कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार उतना मजबूत नहीं है जितना मौजूदा कीमतें दिखा रही हैं। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक 19 जून को खत्म हुए सप्ताह में अमेरिका का कुल कच्चा तेल भंडार घटकर 74.33 करोड़ बैरल रह गया। यह अक्टूबर 1984 के बाद सबसे निचला स्तर है।
eToro की मार्केट एनालिस्ट नघम हसन का कहना है कि अगर बाजार में वास्तव में तेल की भरपूर सप्लाई होती तो रणनीतिक भंडार लगातार कम नहीं हो रहे होते। उनका मानना है कि यदि कूटनीतिक बातचीत धीमी पड़ती है या फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें दोबारा चढ़ सकती हैं।
क्या भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में आम लोगों को अभी राहत नहीं मिली है। हालांकि कुछ बदलाव जरूर हुए हैं। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल 3 रुपए प्रति लीटर सस्ता किया है। 1 जुलाई से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 183.50 रुपये घटाई गई है।

