फेडरल रिजर्व की छठी बैठक खत्म, जेरोम पावेल 2 बजे करेंगे ब्याज दर पर नीतिगत घोषणा

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की 30 अप्रैल से एक मई के बीच हुई छठी बैठक आज संपन्न हो गई। फेड चेयरमैन प्रेस कांफ्रेंस कर देंगे बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी।
फेडरल रिजर्व की छठी बैठक खत्म
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हाईलाइट्स

  • फेडरल रिजर्व की छठी बैठक में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव होने की संभावना नहीं

  • कहा जा रहा फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल छठी बैठक में अपना कठोर रुख बनाए रखेंगे

  • महंगाई पूर्व निर्धारित स्तर के पास नहीं आई तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं

  • इस साल कटौती की उम्मीद 'कम', महंगाई काबू में नहीं रही तो दरों में बढ़ोतरी भी संभव

राज एक्सप्रेस। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की 30 अप्रैल से एक मई को बीच होने वाली छठी बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की कोई संभावना नहीं है। माना जा रहा है कि फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल छठी बैठक में भी अपना कठोर रुख बनाए रखेंगे। इस बात की संभावना अधिक है कि फेडरल रिजर्व के अधिकारी लगातार छठी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेंगे। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी बुधवार को अपनी दो दिवसीय नीति बैठक के समापन पर अपनी बेंचमार्क दर के लिए टारगेट रेंज 5.25% से 5.5% पर रखेगी। यह दर जुलाई में पहली बार दो दशक के उच्चतम स्तर पर जा पहुंची थी।

ब्याज दरों में कटौती की फिलहाल संभावना नहीं

फेड रिजर्व इस पर बुधवार को दोपहर दो बजे के बाद कोई घोषणा कर सकता है। इसके कुछ देर बाद फेडरल बैंक के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। कहा जा रहा है कि नीति निर्माता तब तक ब्याज दरों में कटौती के लिए तैयार नहीं हैं, जब तक उन्हें पक्का यकीन नहीं हो जाता कि महंगाई 2 फीसदी के स्तर पर आ गई है। नीति निर्माता इस दर को किसी स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए उपयुक्त मानते हैं। इस साल अब तक दरों में तीन कटौतियां करने की बात की जा रही थी, लेकिन पॉवेल आज अपनी प्रेस कांफ्रेंस में यह स्पष्ट कर सकते हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की योजना स्थगित ही रखी जाएगी।

महंगाई से तय होगा आगे कैसी रहेंगी ब्याज दरें

आगे क्या होगा यह महंगाई की स्थिति में सुधार से तय होगा। बैंक ऑफ अमेरिका कॉर्प के अर्थशास्त्री माइकल गैपेन के अनुसार हमें किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हमें कुछ समय तक इंतजार करने को कहा जा सकता है। किसी भी नीति को अपना असर दिखाने के लिए एक निश्चित समय की जरूरत होती है। महंगाई से मुकाबले की यही रणनीति है कि आप जहां हैं, वहीं देर तक बने रहें और मौजूदा स्थितियों के साथ अनुकूलन करने का प्रयास करें। अगर हमें ऐसा करना पड़ा, तो हम तब तक रुके रहेंगे जब तक कि महंगाई लक्षित सीमा में नहीं आ जाती।

महंगाई बेकाबू हुई तो और बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

उल्लेखनीय है कि फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद होने वाली नीतिगत घोषणा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही जाने वाली बातों के संकेत फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने 16 अप्रैल के भाषण में ही दे दिए थे। फेड चेयरमैन ने कहा था कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय बैंक, नीतिगत ब्याज दरों को जब तक जरूरी होगा कठोर बनाए रखेगा। माइकल गैपेन ने कहा पूरी उम्मीद है पॉवेल आगे भी नीतिगत दरों को आगे भी कठोर रुख बनाए रखेंगे। अब इस साल उनसे कटौती की उम्मीद कम है। वह यह भी संकेत दे सकते हैं कि अगर महंगाई नियंत्रण में नहीं रही, तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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