EPFO के पांच नए नियम: जॉब चेंज करने पर ऑटोमेटिक होगा PF ट्रांसफर; कर्मचारी आधार OTP से खुद कर सकते हैं एग्जिट डेट डिक्लेयर
Published:
4 min read

अब क्लेम सीधे EPFO को भेजे जाते हैं, जिसमें कंपनी के इंवॉल्वमेंट की जरूरत नहीं होती है। (फाइल फोटो)
बिजनेस डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अंडर करीब 8 करोड़ एक्टिव मेंबर हैं। वे EPF को केवल रिटायरमेंट से ज्यादा मानते हैं। यह अक्सर उनकी पहली और सबसे विश्वसनीय लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट होती है। सरकार EPF नियमों में कई बदलाव करती रहती है। इस खबर में हम जॉब चेंज करने पर फंड ट्रांसफर के लिए EPFO नियमों में हुए हाल के पांच बदलावों पर चर्चा करेंगे।
EPFO ने नौकरी बदलने पर PF अकाउंट ट्रांसफर की प्रोसेस को सरल बनाया है, जिसमें ज्यादातर मामलों में ऑनलाइन ट्रांसफर क्लेम को पूर्व या वर्तमान एंप्लॉयर के जरिए प्रोसेस करने की जरूरत को हटा दिया गया है।
अब क्लेम सीधे EPFO को भेजे जाते हैं, जिसमें कंपनी के इंवॉल्वमेंट की जरूरत नहीं होती है। इसके चलते ट्रांसफर क्लेम के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी कंपनी की मंजूरी की जरूरत नहीं होती जब कोई सदस्य नौकरी छोड़कर किसी दूसरी कंपनी में शामिल होता है। इस प्रोसेस ने क्लेम जमा करने पर उसके निपटारे के समय में काफी कमी ला दी है। इससे मेंबर्स की शिकायतों में कमी आई है।
EPF ट्रांसफर प्रोसेस में अब क्या बदलाव आया है
अब तक नौकरी बदलने वाले करीब हर कर्मचारी को एक समस्या ने परेशान किया है। वो है EPF ट्रांसफर प्रोसेस। मेंबर्स ने मिसिंग डिटेल्स, मिसमैच डेट्स, अलग-अलग UAN लिंक्ड अकाउंट, कंपनी की देरी, और HR की लंबी प्रोसेस जैसी कई परेशानियों का अनुभव किया है। हालांकि EPFO ने जरूरी बदलाव किए हैं, जो EPF ट्रांसफर प्रोसेस को तेजलक्ष्य रखते हैं।
1. जॉब चेंज करने पर ऑटोमेटिक EPF ट्रांसफर
हाल तक कर्मचारियों को EPF ट्रांसफर के लिए फॉर्म 13 का इस्तेमाल करके मैन्युअल रूप से आवेदन करना पड़ता था। इसे पुरानी कंपनी से वेरीफाईड कराना पड़ता था और प्रोसेस पूरी होने के लिए हफ्तों या महीनों का इंतजार करना पड़ता था।
अब EPF ट्रांसफर ऑटोमेटिकली हो जाएगा, जब कर्मचारी नई नौकरी में शामिल होगा और नई कंपनी जॉइनिंग की डेट अपडेट कर देगी। कर्मचारी का UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) वही रहता है। इससे प्रोसेस में देरी नहीं होती है। साथ ही पेपरवर्क पूरी तरह से कम जाता है।
पहले कई ट्रांसफर पेंडिंग रह जाते थे, क्योंकि कंपनी समय पर रिक्वेस्ट अप्रूव नहीं करती थी। कर्मचारियों को सही स्टेप नहीं पता होता था। अब, सिस्टम स्वयं हस्तांतरण को ट्रिगर कर देता है।
2. लाइफटाइम के लिए एक UAN, जॉब चेंज पर नया UAN नहीं
हालांकि प्रति कर्मचारी एक UAN पहले से ही एक नियम था, लेकिन एडमिनिस्ट्रेटिव एरर या गलत डिटेल्स के कारण कई वर्कर्स के पास कई UAN हो गए।
EPFO ने अब इस नियम को मजबूत किया है। यदि पहले से एक UAN मौजूद है तो नया UAN बनाने को ब्लॉक कर दिया जाता है। आधार-बेस्ड वेरिफिकेशन अब डुप्लिकेशन को रोकता है। साथ ही पुराने और नए PF अकाउंट को ऑटोमेटिकली एक ही यूएएन से लिंक कर दिया जाता है। इसके चलते वर्कर्स को अब कई UAN को मर्ज करने की जरूरत नहीं होती है।
3. आधार + e-KYC से कंपनी के वेरिफिकेशन में तेजी
पहले EPF ट्रांसफर अक्सर एंप्लॉयर के सिग्नेचर मैच न होने , KYC पूरी न होने या ज्वाइनिंग/लीविंग डेट के मेल न खाने के कारण अटक जाते थे।
अब EPFO आधार-बेस्ड ई-साइन, KYC ऑटो-वेरिफिकेशन और एंप्लॉयर के साथ API इंटीग्रेशन, HRMS सिस्टम का इस्तेमाल करता है। इससे वेरिफिकेशन का समय काफी कम हो गया है। जिन ट्रांसफर में पहले 30-45 दिन लगते थे, अब उन्हें 7-10 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है। कभी-कभी तो इससे भी कम समय में प्रोसेस हो जाती है।
4. EPF पासबुक ट्रांसफर के बाद कंबाइंड बैलेंस दिखाती है
पहले कर्मचारियों को पुरानी पासबुक, नई पासबुक और ट्रांसफर क्लेम का स्टेटस कंपेयर करके मैन्युअली यह चेक करना पड़ता था कि ट्रांसफर सफल हुआ है या नहीं।
अब ट्रांसफर पूरा होने के बाद पुराने खाते में जीरो बैलेंस दिखाई देता है। नई पासबुक में पूरा कंबाइंड बैलेंस दिखाई देगा और इससे PF कॉन्ट्रिब्यूशन की कंटीन्यूटी पर नजर रखना आसान हो जाता है।
5. पिछली कंपनी के लिए एग्जिट डेट अनिवार्य कर दी गई
ट्रांसफर में देरी का एक सबसे बड़ा कारण ये था कि पुरानी कंपनी ने एग्जिट डेट अपडेट नहीं की। EPFO ने अब इसे अनिवार्य कर दिया है। अगर एंप्लॉयर टाइमलाइम के भीतर इसे अपडेट नहीं करता है, तो कर्मचारी आधार OTP का इस्तेमाल करके एग्जिट डेट खुद डिक्लेयर कर सकता है। इसके बाद सिस्टम उसे ऑटो अप्रूव कर देगा।
यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है, जिनका अपने पिछले एंप्लॉयर के साथ विवाद था या जिनके HR ने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

