ऑनलाइन गेमिंग बिल लोकसभा में पास: पैसों के लेनदेन वाले गेम्स बैन हो सकते हैं, स्किल बेस्ड गेम्स पर भी खतरा; 4 साल में दोगुने हुए गेमर्स
Published:
4 min read

बिल के तहत बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस मनी बेस्ड ऑनलाइन गेम्स के लिए मनी प्रॉसेसिंग या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। (सिम्बॉलिक इमेज)
लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन बिल पास हो गया है। केंद्र सरकार ने बुधवार यानी आज (20 अगस्त 2025) को इसे पेश किया था। इसका मकसद उन ऑनलाइन गेमिंग्स को रोकना है, जिन्हें पैसों से खेला जा रहा है। यूनियन कैबिनेट ने 19 अगस्त को इसे मंजूरी दी थी।
इस ड्राफ्ट में रियल मनी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने का प्रस्ताव है, जो अलग-अलग राज्यों या विदेश से चलाए जाते हैं। बिल पारित होने से मनी बेस्ड सभी गेमिंग के ट्रांजेक्शंस पर बैन लग जाएगा। फिर चाहे वो गेम स्किल बेस्ड ही क्यों न हों।
ऑनलाइन गेमर्स की संख्या 2020 में 36 करोड़ से बढ़कर 2024 में 50 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
बैंक-फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे
इस प्रस्तावित बिल के तहत बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस मनी बेस्ड ऑनलाइन गेम्स के लिए मनी प्रोसेस या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। इस बिल में रियल मनी वाले गेमिंग विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा ई-स्पोर्ट्स और बिना पैसे वाले स्किल-बेस्ड गेम्स को बढ़ावा देने वाले गेम्स भी शामिल हैं। नॉन-रजिस्टर्ड या इलीगल गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है।
3 साल सजा मुमकिन
प्रस्तावित बिल के मुताबिक- इस तरह के गेम्स ऑफर करने वालों को तीन साल की सजा और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। इतना ही नहीं विज्ञापन देने वालों को भी दो साल तक की जेल और 50 लाख रुपए तक का फाइन या फिर दोनों देना पड़ सकते हैं। हालांकि गेम खेलने वालों (विक्टिम) के लिए किसी सजा या जुर्माने की बात इस प्रपोज्ड बिल में नहीं है।
मनी बेस्ड गेम्स से मेंटल हेल्थ खराब पर असर पड़ता है
प्रस्ताव में कहा गया कि पैसे से खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स में लोगों को लालच आ जाता है। इसके चलते जब गेमर्स को नुकसान होता है तो उनकी मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। मनी बेस्ड ऑनलाइन गेम्स से मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी की आशंका भी होती है।
गेमिंग इंडस्ट्रीज ने कहा- इससे भारी नुकसान होगा
देश की प्रमुख ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री एसोसिएशंस ने इस बिल को लेकर चिंता जताई है। इंडस्ट्रीज का कहना है कि इस बिल में स्किल-बेस्ड गेम्स भी शामिल हैं। उन पर भी रोक लगाई जा सकती है। ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रस्तावित ऑनलाइन गेमिंग बिल पर दखल की मांग की है।
AIGF ने कहा कि मनी बेस्ड गेम्स पर रोक लगने से गेमिंग इंडस्ट्री को भारी नुकसान हो सकता है। बिल के पास होने से वैध और कानूनी तरीके से गेम खेलने वाले करोड़ों गेमर्स इलीगल गेमिंग नेटवर्क और अनरेगुलेटेड ऑपरेटर्स की ओर बढ़ सकते हैं। इसके चलते इंडस्ट्री और गेमर्स को नुकसान हो सकता है।
फेडरेशन ने कहा- बैन से गेमिंग सेक्टर खत्म हो जाएगा
फेडरेशन का कहा- भारत का ऑनलाइन स्किल-गेमिंग सेक्टर अभी 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का है। हर साल करीब 31,000 करोड़ रुपए की कमाई करता है। ये सेक्टर 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा टैक्स देता है। 2 लाख से ज्यादा नौकरियां भी जेनरेट या ऑपरेशनल हैं। भारत में ऑनलाइन गेमर्स की संख्या 2020 में 36 करोड़ से बढ़कर 2024 में 50 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
जून 2022 तक इस सेक्टर में 25,000 करोड़ रुपए से ज्यादा विदेशी निवेश आया है। अगर पूरी तरह बैन लगा दिया गया, तो ये बढ़ता हुआ सेक्टर खत्म हो सकता है। इससे उन यूजर्स को नुकसान होगा जो स्किल-बेस्ड गेम्स खेलते हैं। सरकार को बैन लगाने की बजाए ऐसे नियम बनाने चाहिए जो यूजर्स सेफ्टी को प्रमोट करते हों।
86% इनकम रियल मनी बेस्ड गेम्स से होती है
ड्रीम11, गेम्स24x7, विनजो, गेम्सक्राफ्ट, 99गेम्स, खेलोफैंटेसी और माय11सर्कल जैसी बड़ी गेमिंग कंपनियां पर इसका असर पड़ सकता है। भारत का ऑनलाइन गेमिंग मार्केट अभी 3.7 बिलियन डॉलर का है। 2029 तक इसके 9.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद थी। अभी इनकम का करीब 86% हिस्सा रियल मनी बेस्ड गेम्स से आता है। अगर इन्हें बंद कर दिया गया, तो गेमिंग इंडस्ट्री खत्म हो जाएगी।

