मोदी का जिनपिंग से रिश्ते मजबूत करने का वादा: 50 मिनट की मीटिंग के बाद बोले- हमसे 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े; जिनपिंग ने कहा- हमारा साथ आना जरूरी
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PM नरेंद्र मोदी ने रविवार को तियानजिन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से 50 मिनट तक बातचीत की। इसके बाद दोनों देशों ने आपसी रिश्ते मजबूत करने की बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चीन के तियानजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह दोनों की बीते 10 महीनों में पहली बैठक थी। दोनों नेताओं की मीटिंग 50 मिनट चली। मीटिंग में मोदी ने जिनपिंग से दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करने का वादा किया।
बैठक में बॉर्डर टेंशन कम करने और ट्रेड बढ़ाने पर बातचीत हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल भी इसमें मौजूद रहे। जिनपिंग ने चर्चा खत्म होने के बाद कहा- भारत-चीन दुनिया के दो सभ्य देश हैं। मौजूदा हालात में हमारा साथ आना जरूरी है।
'अब सीमा पर शांति और स्थिरता'-मोदी
डेलिगेशन-लेवल बातचीत में मोदी ने कहा- कजान में हमारी सार्थक बातचीत हुई थी। हमारे रिश्ते को सकारात्मक दिशा मिली है। अब सीमा पर शांति और स्थिरता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो चुकी है। दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स भी शुरू की जा रही हैं। भारत-चीन सहयोग से 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हैं। यह पूरी मानवता के लिए जरूरी है। हम आपसी संबंधों को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
'ड्रैगन और हाथी का साथ आना जरूरी'-जिनपिंग
मीटिंग में जिनपिंग ने कहा- मौजूदा हालात में दोनों देशों का साथ आना जरूरी है। भारत और चीन दुनिया के दो सभ्य देश हैं। दुनिया बदलाव की ओर बढ़ रही है। भारत और चीन के रिश्तों को पॉजिटिव दिशा मिली है। सीमा पर शांति और स्थिरता आई है। मौजूदा समय में ड्रैगन और हाथी का साथ आना अच्छी बात है। हम अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आपसी भरोसे में हम मजबूती लाएंगे। दोनों देशों की आबादी 8 अरब से ज्यादा है। ऐसे में हमारा साथ आना बेहद अहम है।
बता दें कि इससे पहले मोदी- जिनपिंग की पिछली मुलाकात 2024 में रूस के कजान में BRICS सम्मेलन के दौरान हुई थी। मोदी गलवान संघर्ष के बाद पहली बार चीन पहुंचे। मोदी सात साल बाद चीन विजिट पर हैं।
SCO समिट ऐसे समय में हो रही जब भारत-अमेरिका के रिश्तों में टैरिफ की वजह से तल्खी आई है। ऐसे में यह समिट भारत-चीन रिश्तों को रीसेट करने में अहम भूमिका निभा सकता है। वहीं, दूसरी ओर यह नेपाल के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिहाज से भी कारगर हो सकती है।
चीन-रुस दोनों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश
SCO में मोदी की मौजूदगी चीन और रूस दोनों के साथ मिलकर स्ट्रेटजी बनाने की कोशिश है। SCO की मेजबानी इस बार चीन कर रहा है। 10 मेम्बर वाले ग्रुप में रूस, भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान और मिडिल ईस्ट के देश शामिल हैं। इस बार समिट में 20 देशों के नेता पहुंचे हैं, जिनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और नेपाल के केपी शर्मा ओली भी शामिल हैं।
सोमवार को होगी पुतिन मोदी की मुलाकात
सोमवार को PM मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलग मीटिंग करेंगे। इस दौरान रूस से सस्ते तेल की खरीद, डिफेंस कोऑपरेशन पर चर्चा होगी। दिसंबर में पुतिन के भारत दौरे की तैयारी पर भी बातचीत हो सकती है। रुसी राष्ट्रपति ऑफिस ने कहा है कि इस मीटिंग में मोदी-पुतिन की दिसंबर में होने वाली शिखर वार्ता को लेकर भी चर्चा होगी। पुतिन ने कहा- SCO एक जस्टिफाइड और मल्टीपोलर ग्लोबल सिस्टम बनाने में मदद करेगा। भारत के लिए यह बैठक अपने एनर्जी और सिक्योरिटी इंटरेस्ट के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
नेपाल के पीएम ओली भी चीन पहुंचे
इस बार SCO में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भी पहुंचे हैं। SCO में नेपाल के प्रधानमंत्री की मौजूदगी भी भारत के लिए अहम है, क्योंकि हाल के महीनों में काठमांडू ने बीजिंग के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं। मोदी की चीन विजिट से नेपाल से रिश्ते नॉर्मलाइज करने में मदद मिलेगी। इस समिट में भारत के तीन पड़ोसी देश, यानी पाकिस्तान, चीन और नेपाल की मौजूदगी रहेगी। यही वजह है कि यह समिट को भारत की विदेश नीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
समिट में PAK भी होगा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सम्मेलन में मौजूद रहेंगे। हालांकि मोदी और शरीफ की सीधी मुलाकात की कोई योजना नहीं है, लेकिन दोनों देशों के रिश्ते हमेशा चर्चा में रहते हैं। पाकिस्तान लगातार कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन इस मंच पर उसे ज्यादा अहमियत नहीं मिलती। भारत का फोकस आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख तैयार करने पर होगा। चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा है, इसलिए समिट में मोदी की मौजूदगी पाकिस्तान को भी एक इनडाइरेक्ट मैसेज है।
मालदीव के प्रेसिडेंट भी मौजूद रहेंगे
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु की मौजूदगी भी चर्चा में है। उनका शुरुआती रुख भारत के खिलाफ और चीन से नजदीकी बढ़ाने में था। इलेक्शन के वक्त एंटी इंडिया जर्सी पहनने के साथ एंटी इंडिया बयान भी दे रहे थे। हाल ही में भारतीय PM मालदीव के दौरे पर गए थे। इसमें मुइज्जु ने मोदी का शानदार वेलकम किया था।
हालांकि, हिंद महासागर में चीन का बढ़ता दखल भारत के लिए चुनौती बना हुआ है। इस सम्मेलन में मुइज्जु और मोदी का आमना-सामना अहम माना जा रहा है। भारत की कोशिश होगी कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते अच्छे रहें और चीन को लेकर एक बैलेंस्ड स्ट्रेटजी बनाई जा सके।

