मस्क Vs ऑल्टमैन Vs पिचाई Vs वेनफेंग Vs जुकरबर्ग: AI इंडस्ट्री का बॉस कौन होगा; Gemini, META और DeepSeek भी मैदान में, आइए जानते हैं
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इलॉन मस्क (राइट) और सैम ऑल्टमैन (लेफ्ट) ने 2015 में OpenAI की शुरुआत की थी। मस्क 2018 में इससे अलग हो गए थे। (फाइल फोटो)
अरबों डॉलर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मार्केट पर फुल कंट्रोल के लिए एक तरह की जंग शुरू हो चुकी है। यह एक तरह से लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का वर्ल्ड वॉर है। इसमें इलॉन मस्क, सैम ऑल्टमैन, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई और टिम कुक जैसे टेक जाइंट्स के CE0 या मालिक शामिल हैं। वहीं, चीन से नया खिलाड़ी डीपसीक भी मैदान में उतर चुका है। सीधी बात है- जो AI पर कब्जा करेगा, वही भविष्य की दुनिया को चलाने का दम रखेगा।
इस आर्टिकल में हम इन्हीं टेक जाइंट्स के बारे में जानने की कोशिश करते हैं...तो नॉलेज जर्नी में आप भी हमारे हमसफर बनिए...
आखिर इतना बड़ा कॉम्पिटिशन क्यों
AI अब सिर्फ चैटबॉट तक सीमित नहीं है। ये वो टेक्नोलॉजी है, जिसके बारे में साफ हो चुका है कि ये दुनिया की सोचने-समझने की दिशा और दशा बदल सकता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गैरी मार्कस ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया- जिसके पास AI होगा, अब वही लोगों की राय और दुनिया का भविष्य तय कर पाएगा। असली बदलाव तभी आएगा जब कोई नया AI आए।
मस्क Vs ऑल्टमैन, एक्स से कोर्ट तक
इलॉन मस्क (X) और सैम ऑल्टमैन (OpenAI) अब बिजेनस कॉम्पटीटर्स के बजाए दुश्मनों की तरह बर्ताव कर रहे हैं। मस्क ने Apple पर आरोप लगाया कि वो OpenAI का पक्ष ले रहा है। अपने ऐप स्टोर में ChatGPT को फायदा पहुंचाने के लिए रैंकिंग में गड़बड़ी की। सैम ने जवाब में इलॉन पर इल्जाम लगाया कि वो अपनी कंपनी X का इस्तेमाल दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए करते हैं। दोनों की लड़ाई अब कोर्ट तक पहुंच चुकी है।
असल में मस्क खुद OpenAI के शुरुआती पार्टनर थे। 2018 में अलग हो गए। उनका मानना था कि ये ओपन सोर्स रहना चाहिए। बाद में Microsoft ने 14 अरब डॉलर का निवेश किया और ChatGPT दुनिया का सबसे बड़ा AI चैटबॉट बन गया। इसके बाद 2023 में इलॉन ने खुद की AI कंपनी xAI शुरू की। Grok इसका एक जेनरेटिव चैटबॉट है।
OpenAI और xAI अपने एआई मॉडल्स को लगातार अपडेट कर रहे हैं। आइए जानते हैं दोनों AI बॉट क्या फीचर्स रोलआउट कर चुके हैं...
पहले चैटजीपीटी के बारे में जान लेते हैं
OpenAI ने चैटजीपीटी को नवंबर 2022 में रिसर्च प्रिव्यू के रूप में जारी किया था। कंपनी के कई वर्जन हैं। इनमें फ्री, गो, प्लस और प्रो कुल चार सब्सक्रिप्शन प्लान हैं। हाल ही में कंपनी ने नया वर्जन GPT-5 और भारत के लिए ChatGPT Go प्लान पेश किया है।
- GPT-5 पुराने मॉडल्स GPT-4o, o3, o4-Mini, GPT 4.1 और GPT 4.5 को रिप्लेस करेगा। इसके दो वर्जन GPT-5 Mini और GPT-5 Nano हैं।
- फ्री यूजर्स GPT-5 और GPT-5 Mini यूज कर पाएंगे। Plus यूजर्स को इन्हीं मॉडल्स में ज्यादा सुविधा मिलेगी। Pro प्लान में एक्सक्लूसिव मॉडल्स 'GPT-5 PRO' और 'GPT-5 Thinking' के साथ अनलिमिटेड GPT-5 का एक्सेस मिलेगा।
- ChatGPT Go भारतीय यूजर्स के लिए लाया गया है। इसमें 399 रुपए महीने में फ्री वर्जन से ज्यादा फीचर्स मिलते हैं। भारत से मिले फीडबैक के आधार पर दूसरे देशों में शुरू किया जाएगा।
- वहीं, स्टूडेंट्स के लिए फ्री और इंटरैक्टिव लर्निंग टूल 'स्टडी मोड' भी लॉन्च किया है। यह टूल 11 भारतीय भाषाओं जैसे हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगू आदि में अवेलेबल है।
- o1, o1 mini, o3 और o3-pro रीजनिंग मॉडल्स है, जो टफ साइंस, इंजीनियरिंग, मैथ्स वर्क के लिए डिजाइन किए गए हैं।
आइए अब ग्रोक के बारे में जान लेते हैं
ग्रोक xAI का एआई चैटबॉट है, जिसे इलॉन मस्क ने 2023 में लॉन्च किया था। इसका नाम रॉबर्ट ए.हेनलिन के नोवल 'स्ट्रेंजर इन अ स्ट्रेंज लैंड' से लिया गया है। ग्रोक का मतलब है- किसी चीज को गहराई से समझना।
ग्रोक के वर्जन
- ग्रोक-0, 33 बिलियन पैरामीटर्स के साथ xAI का पहला मॉडल था। ग्रोक-1 नवंबर 2023 में रिलीज हुआ। यह शुरुआत में बीटा वर्जन में था। इसे अपाचे 2.0 लाइसेंस के तहत ओपन सोर्स किया गया।
- मार्च 2024 में ग्रोक 1.5 आया। इसमें रीजनिंग, डॉक्यूमेंट्स, पिक्चर और ग्राफ को समझने की काबिलियत थी। अगस्त 2024 में ग्रोक-2 और ग्रोक-2 मिनी बेहतर चैट, कोडिंग और रीजनिंग एबिलिटी के साथ आए।
- ग्रोक-3 फरवरी 2025 में बीटा वर्जन लॉन्च हुआ। यह xAI सबसे एडवांस मॉडल है। इसमें डीप सर्च और थिंक मोड शामिल हैं, जो रियल टाइम में वेब सर्च और डीप एनालिसिस करता है।
- ग्रोक 4 इस साल जुलाई में रिलीज किया गया। यह सबसे इंटेलिजेंट मॉडल माना जाता है। इसमें नेटिव टूल यूज और रियल टाइम सर्च इंटीग्रेशन है। यह सुपर ग्रोक और प्रीमियम सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है।
ये भी जान लीजिए कि बाकी ‘बिग प्लेयर्स’ क्या कर रहे हैं....
Google- डेली 8.5 अरब सर्च का डेटा है, जिससे उसका AI जेमिनी ट्रेन हो रहा है। Apple अब तक चुप है, लेकिन टेक एक्सपर्ट मानते है कि अगर इसके कोई AI वाला iPhone स्टाइल प्रोडक्ट निकाला तो सब बदल सकता है।
META - के CEO मार्क जुकरबर्ग भी AI पर पूरा फोकस कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वह रिसर्चर्स, साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स को अपनी सुपरइंटेलिजेंस लैब में शामिल करने के लिए 10 करोड़ डॉलर (करीब 860 करोड़ रुपए) का पैकेज ऑफर कर रहे हैं। मार्क ने AI सर्च स्टार्टअप परप्लेक्सिटी के CEO अरविंद श्रीनिवास और ओपनआई के को-फाउंडर इल्या सुतस्केवर से संपर्क भी किया है।
DeepSeek- चीन का AI चैटबॉट DeepSeek मई 2023 आया था। इसके फाउंडर लियांग वेनफेंग हैं। DeepSeek ने कम इन्वेस्टमेंट में बड़ा काम किया है। इसका R1 मॉडल करीब 52 करोड़ रुपए में डेवलप किया गया, जबकि OpenAI के GPT-4 की लागत 840 करोड़ रुपए थी। यह फ्री और ओपन सोर्स है।
तो फिलहाल इस रेस में सबसे आगे कौन
सीएनबीसी के स्क्वॉक बॉक्स पर टी. रो प्राइस के पोर्टफोलियो मैनेजर टोनी वांग ने कहा- चैटजीपीटी इंगेजमेंट के मामले में बाकियों को पीछे छोड़ चुका है। मेटा हर साल अरबों डॉलर खर्च कर रही है। Google के पास दुनिया का सबसे बड़ा डेटा है। Apple चुपचाप सही वक्त का इंतजार कर रहा है, यानी ये रेस अभी खत्म नहीं हुई है। अगर मैं ये कहूं कि अभी कोई बहुत आगे या बहुत पीछे है, तो गलत होगा। मसला तो ये कि अभी ये बस शुरू ही हुई है।

