ग्रेच्युटी के नए नियम: अब 1 साल की नौकरी पर भी मिलेगा पैसा, जानिए नया कैलकुलेशन फॉर्मूला
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ग्रेच्युटी के नियम 1 नवंबर 2025 से लागू माने जाएंगे। इस तारीख से ग्रेच्युटी की गणना नए नियमों के अनुसार की जाएगी। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। 1 अप्रैल से लागू हुए नए लेबर कोड्स ने कर्मचारियों के लिए कई बदलाव किए हैं। इनमें PF, सैलरी स्ट्रक्चर और ग्रेच्युटी (Gratuity) से जुड़े नियम शामिल हैं। सबसे बड़ा बदलाव सैलरी को लेकर है, जिससे ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन करने का तरीका बदल गया है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि ये नए नियम 21 नवंबर 2025 से लागू माने जाएंगे। इस तारीख से ग्रेच्युटी के नए नियम प्रभावी होंगे।
आइए इन बदलावों से जुड़े सवालों को आसान भाषा में समझ लेते हैं...
ग्रेच्युटी के नए नियम क्या कहते हैं?
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को लेकर हुआ है। अब कोई कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहा है। उसने एक साल की सर्विस पूरी कर ली है, तो उसके कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर उसे ग्रेच्युटी मिलेगी।
वहीं, स्थायी कर्मचारियों के लिए पहले की तरह 5 साल की नौकरी पूरी करना जरूरी है। अगर कर्मचारी रिटायर होता है, रिजाइन देता या किसी बीमारी के कारण नौकरी छोड़ता है। तब भी उसे ग्रेच्युटी दी जाएगी।
कौन-कौन ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं?
अब नए नियमों के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार बन गए हैं। अगर उन्होंने कम से कम 1 साल काम किया है, तो उन्हें उनके काम के समय के हिसाब से ग्रेच्युटी दी जाएगी, लेकिन अगर किसी का कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ 11 महीने का है, तो उसे ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी।

ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन कैसे होता है?
ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन कर्मचारी की लास्ट सैलरी और नौकरी के सालों के आधार पर होती है। आम तौर पर हर पूरे साल के लिए 15 दिन की सैलरी के हिसाब से ग्रेच्युटी मिलती है।
इसका फॉर्मूला होता है: ग्रेच्युटी= आखिरी सैलरी x 15/26 x कुल काम के साल
अगर कर्मचारी काम के हिसाब से पेमेंट पर काम करता है, तो उसकी पिछले तीन महीनों की औसत कमाई के आधार पर ग्रेच्युटी तय की जाती है। वहीं, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए यह रकम उनके काम के समय के अनुसार निकाली जाती है।
ग्रेच्युटी का पैसा कब मिलता है?
किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का भुगतान 30 दिनों के अंदर करना जरूरी है। जब वह इसके लिए एलिजिबल हो जाता है। ग्रेच्युटी की गणना करते समय बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस को शामिल किया जाता है। वहीं, बोनस, बिजली-पानी या मेडिकल जैसी सुविधाएं, PF में कंपनी का कंट्रीब्यूशन, ट्रैवल अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को नहीं जोड़ा जाता है।
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