भारतीय रिफाइनरीज LPG प्रोडक्शन बढ़ाएं: ईरान संकट के बीच सरकार ने निर्देश जारी किए, कहा- सिर्फ IOCL, HPCL और BPCL को ही बेचें
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सरकार ने कहा- पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन में प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल न करें। इन्हें LPG में इस्तेमाल करें। (फाइल फोटो)
बिजनेस डेस्क। भारत ने रिफाइनरी कंपनियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डोमेस्टिक सप्लाई को प्रायोरिटी देने को कहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ये निर्देश ग्लोबल मार्केट में चल रही अनिश्चितताओं की वजह से दिए गए हैं ताकि देश में कुकिंग फ्यूल की उपलब्धता बनी रहे।
सरकार ने रिफाइनरीज से कहा कि वे LPG को केवल तीन सरकारी भारतीय ऑयल कंपनियों को बेचें। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल है।
LPG आपूर्ति डोमेस्टिक कस्टमर्स तक ही सीमित रखें
गुरुवार को जारी सरकारी आदेश के मुताबिक, इस एलपीजी को केवल IOC, HPCL और BPCL ही खरीद सकते हैं। इसके बाद ये कंपनियां LPG की आपूर्ति केवल डोमेस्टिक कस्टमर्स तक ही सीमित रखें। आदेश में रिफाइनरीज से ये भी कहा गया कि वे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन में प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल न करें। बल्कि इसका यूज LPG में किया जाए।
तेल-गैस की जरूरतों का 85% इंपोर्ट करता है भारत
भारत तेल और गैस की जरूरतों का करीब 85% इंपोर्ट करता है। अब यहां एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो रही है। कतर के रास लफ्फान में दुनिया का सबसे बड़ा LNG टर्मिनल ईरान के ड्रोन हमले के बाद बंद हो गया। इसके चलते वहां से प्रोडक्शन रुक गया है। इसके अलावा ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है। ये वो समुद्री रास्ता है, जहां से भारत के रोजाना आने वाले तेल और गैस के इंपोर्ट का करीब आधा हिस्सा गुजरता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल कंज्यूमर
LPG अब भारत के घरों में सबसे ज्यादा जरूरत की चीज बन गई है। देश में घरेलू प्रोडक्शन बढ़ रहा है, लेकिन फिर भी LPG की डिमांड पूरी करने के लिए भारत काफी हद तक इंपोर्ट पर निर्भर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 55-60% इंपोर्ट करता है। इससे ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग में रुकावट से घरेलू सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
देश पहले से ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल कंज्यूमर है। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 तक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खपत करीब 250 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी।
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