भारत के पास 74 दिन का ऑयल रिजर्व: सरकार बढ़ा रही 6.5 मिलियन टन क्षमता; 41 देशों से इम्पोर्ट जारी
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भारत अपने तेल भंडार को मजबूत करने साथ इम्पोर्ट के सोर्स भी बढ़ा रहा है। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच संसद में पेट्रोलियम मंत्री सुरेश गोपी ने देश के तेल भंडार को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश के तीन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में अभी 3.372 मिलियन टन कच्चा तेल है। यह इन भंडारों की कैपेसिटी का करीब दो-तिहाई हिस्सा है। ये आंकड़े इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) के डेटा पर आधारित है।
हालांकि मंत्री ने यह भी साफ किया कि इन भंडारों का स्तर बदलता रहता है। यह मार्केट की स्थिति, सप्लाई और कंजम्पशन पर निर्भर करता है। साथ ही यह भंडार सिर्फ क्रूड ऑयल का होता है। इसमें पेट्रोल-डीजल जैसे तैयार ईंधन शामिल नहीं होते।
कितने दिन का तेल भंडार
भारत के पास लगभग 74 दिनों का स्टॉक मौजूद है। कुल भंडार में SPR और तेल कंपनियों के पास मौजूद तैयार ईंधन शामिल हैं। इसका मतलब है कि अगर सप्लाई अचानक रुक जाए, तो देश करीब ढाई महीने तक अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है।
सरकार आने वाले समय में अपने तेल भंडार को और मजबूत करने पर काम कर रही है। इसके तहत 6.5 मिलियन टन अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जा रही है। इस योजना में ओडिशा में नया भंडार बनाया जाएगा, जिसमें चार मिलियन टन ऑयल स्टोर किया जाएगा। इसके अलावा कर्नाटक में मौजूदा स्टोरेज को 2.5 मिलियन टन तक बढ़ाया जा रहा है।

मौजूदा क्षमता और इमरजेंसी में उपयोग
सुरेश गोपी ने बताया कि फिलहाल भारत के SPR की कुल क्षमता 5.33 मिलियन टन है। ये भंडार पूरी तरह भर दिए जाएं, तो किसी बड़े संकट या युद्ध की स्थिति में करीब 9.5 दिनों तक सप्लाई बनाए रखने में मदद कर सकता है।
स्टेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता क्यों चिंता की बात
भारत के लिए कच्चे तेल की सप्लाई का बड़ा हिस्सा स्टेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से आता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट में से एक है। साल 2024 में हर दिन करीब 20 से 25 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से गुजरा था। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के कारण यहां से गुजरने वाले टैंकरों पर खतरा बढ़ गया है, जिससे भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ गई है।
बता दें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का अधिकांश तेल बाहर से खरीदता है। देश को हर दिन करीब 5.5 से 6 मिलियन बैरल कच्चा तेल चाहिए। फाइनेंशियल ईयर 2026 में अब तक भारत ने करीब 226 मिलियन टन तेल इम्पोर्ट किया है, जो कुल जरूरत का करीब 88.7% है। इस पर करीब 110 अरब डॉलर खर्च हुए हैं।
पहले कहां से आता था तेल और अब क्या बदलाव हुआ
युद्ध से पहले भारत अपने तेल का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों जैसे- इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से खरीदता था। यह सप्लाई ज्यादातर होर्मुज के रास्ते आती थी, लेकिन हाल के तनाव के बाद भारत ने अपनी रणनीति बदली है। नए देशों से भी तेल खरीदना शुरू किया है। इन नए सप्लायर देशों में अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, कोलंबिया, ब्राजील और मेक्सिको शामिल हैं।
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