Artemis 2 मिशन में हो रहा iPhone 17 Pro Max का इस्तेमाल: NASA ने एस्ट्रोनॉट्स को क्यों दिए यह फोन, जानिए कैसे हुआ सिलेक्शन
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आर्टेमिस 2 के एस्ट्रोनॉट्स ने अपने मिशन के पहले डाउनलिंक इवेंट के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। (फोटो सोर्स- नासा)
टेक डेस्क। नासा का आर्टेमिस 2 (Artemis 2) मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक है। 50 साल बाद पहली बार कोई इंसानी मिशन डीप स्पेस यानी पृथ्वी से दूर भेजा गया। इतना ही नहीं यह 21वीं सेंचुरी का नासा का पहला मून मिशन है।
वहीं, iPhone 17 Pro Max को भी डीप स्पेस मिशन के लिए मंजूरी दी गई है। ओरियन स्पेसक्राफ्ट में मौजूद हर एस्ट्रोनॉट के पास यह स्मार्टफोन है, जिससे वे अपनी फैमिली के लिए फोटो और वीडियो कैप्चर कर सकें। दुनिया के साथ भी शेयर कर सकें।
डीप स्पेस मिशन में iPhone का इस्तेमाल क्यों खास है?
नासा अपने मिशन में आमतौर पर प्रोफेशनल कैमरे या GoPro जैसे डिवाइस का इस्तेमाल करता है। इस बार iPhone 17 Pro Max को शामिल करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। स्पेस एजेंसी अपने मिशन पेज पर लगातार फोटोज शेयर कर रहा है, जो iPhone से ली गई है। यह फोन सितंबर 2025 में लॉन्च हुआ था। अब अंतरिक्ष में इस्तेमाल हो रहा है।

नासा कैसे तय करता है कौन-सा डिवाइस सुरक्षित है?
नासा किसी भी डिवाइस को मिशन में शामिल करने से पहले एक लंबी प्रक्रिया अपनाता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के रिसर्चर टोबियास नीदरविजर के हवाले से बताया है कि हर डिवाइस को सुरक्षा और संभावित खतरों को ध्यान में रखकर टेस्ट किया जाता है।
अंतरिक्ष में जीरो ग्रैविटी और माइक्रोग्रैविटी की वजह से चीजें अलग तरीके से काम करती हैं। इनसे कुछ खास तरह के खतरे भी पैदा होते हैं।
उदाहरण के लिए अगर iPhone का सिरेमिक शील्ड डिस्प्ले या कैमरे का सफायर ग्लास टूट जाए, तो उसके टुकड़े नीचे गिरने के बजाय हवा में तैरते रहेंगे। ये टुकड़े किसी एस्ट्रोनॉट को नोट पहुंचा सकते हैं।
iPhone को पास करने के लिए नासा की 4-स्टेप प्रोसेस
नासा किसी भी डिवाइस को क्लियर करने के लिए चार स्टेप का प्रोसेस अपनाता है। सबसे पहले डिवाइस को सेफ्टी पैनल के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद पैनल उस डिवाइस से जुड़े खतरों की पहचान करता है। फिर उन खतरों से निपटने के लिए एक ठोस प्लान तैयार किया जाता है। आखिर में यह देखा जाता है कि वह प्लान वास्तव में काम करेगा या नहीं। तब जाकर किसी डिवाइस को इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है।

Apple का क्या रोल रहा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने इस प्रक्रिया में सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं निभाई है, लेकिन पहली बार है जब iPhone को अर्थ ऑर्बिट और डीप स्पेस में इस्तेमाल के लिए क्वालिफाई किया गया है। अब iPhone 17 Pro Max सिर्फ एक स्मार्टफोन नहीं, बल्कि अब अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बन चुका है।
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