क्रूड ऑयल में 112% का उछाल: 146 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा, क्या पेट्रोल-डीजल महंगा होगा; यहां कुछ अहम सवाल और जवाब
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भारत अपनी जरूरत का 85% क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करता है। (फोटो सोर्स- फ्रीपिक)
बिजनेस डेस्क। देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं या नहीं। इस पर फिर से चर्चा तेज हो गई है। वजह है क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आई बड़ी तेजी। भारत जिस कीमत पर ऑयल इम्पोर्ट करता है। वह 146 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इसका औसत फरवरी में 69.01 डॉलर था। सिर्फ एक महीने में कीमत करीब 112% तक बढ़ गई हैं।
इतनी तेजी से कीमत बढ़ने का असर सिर्फ तेल कंपनियों पर नहीं, बल्कि पूरी इकोनॉमी पर पड़ सकता है।
कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़ी कीमतें
हाल के दिनों का ट्रेंड देखें तो क्रूड ऑयल के कीमतों में लगातार उछाल आया है। यह 26 फरवरी को 70.90 डॉलर था, जो 12 मार्च तक 127.20 डॉलर हो गया। इसके बाद 13 मार्च को 136.56 डॉलर, 16 मार्च को 142.69 डॉलर और 18 मार्च तक 146.39 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इस तेजी की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई में आई दिक्कते हैं।

OME कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव
इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती है, तो कंपनियों का पूरा गणित बिगड़ जाता है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल पर लगभग 6.3 रुपए प्रति लीटर का मार्जिन कम हो सकता है। वहीं, LPG पर 10.2 रुपए प्रति किलो का नुकसान बढ़ सकता है। इससे सालाना करीब 32,800 करोड़ का अतिरिक्त बोझ आएगा।
जहां एक तरफ तेल निकालने वाली कंपनियों को ज्यादा कीमत का फायदा मिल रहा है। वहीं, रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनियों पर प्रेशर बढ़ रहा है। हालांकि रिफाइनिंग मार्जिन में थोड़ा सुधार हुआ है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में सप्लाई में दिक्कत के कारण रिफाइंड ऑयल की कीमतें भी बढ़ी हैं।

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे
पिछले कुछ महीनों से तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं, जबकि क्रूड ऑयल महंगा होता रहा। इसका सीधा असर यह हुआ कि कंपनियों की लागत बढ गई, लेकिन आमदनी उस हिसाब से नहीं बढ़ी। अगर यही स्थिति लंबे समय तक चलती रही, तो कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की संभावना कम है। सरकार 31 मार्च से पहले कीमतों में बदलाव नहीं करना चाहती, ताकि टैक्स कलेक्शन और बजट बैलेंस पर असर न पड़े। इसके अलावा, भारत रूसी से क्रूड ऑयल का इम्पोर्ट बढ़ सकता है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है।
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