कांग्रेस क्या स्टूडेंट्स और गठबंधन पॉलिटिक्स के बीच फंस गई: NEET पर Gen-Z के साथ खड़े थे, अब झारखंड में भी सपोर्ट का दबाव; राहुल गांधी का स्टैंड क्या है
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तस्वीर प्रयागराज में हुए 'छात्रों की गूंज' इवेंट की है। इसमें राहुल गांधी ने देश के एजुकेशन सिस्टम को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा था। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। NEET और दूसरे एग्जाम में गड़बड़ी को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोल रही कांग्रेस अब झारखंड में एक मुश्किल सियासी हालात में है। वजह यहां के स्टूडेंट हैं, जो JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। सोमवार (10 अगस्त) को इन युवा प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर मार्च भी निकाला।
झारखंड के स्टूडेंट्स के निशाने पर मोदी सरकार नहीं, बल्कि हेमंत सोरेन की सरकार है। इस सरकार में कांग्रेस भी हिस्सेदार है। जिस तरह NEET के मुद्दे पर कांग्रेस ने स्टूडेंट्स का साथ देते हुए केंद्र से सवाल पूछे थे, अब उसी तरह के सवाल उसकी अपनी गठबंधन की सरकार से पूछे जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने एक ओर उसकी गठबंधन की राजनीति है और दूसरी तरफ स्टूडेंट्स और युवा, जिनके साथ वह खड़े होने का दावा करती रही है। अब कांग्रेस इस चक्रव्यूह से कैसे निकलती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
NEET पेपर लीक पर आक्रामक रवैया और JPSC में सॉफ्ट स्टैंड?
कांग्रेस बीते काफी वक्त से परीक्षाओं में गड़बड़ी, एजुकेशन सिस्टम में खराबी और स्टूडेंट्स के फ्यूचर को मुद्दा बनाए हुए है।
NEET पेपर लीक के दौरान पार्टी ने केंद्र सरकार पर छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाया, देशभर में प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की।
कांग्रेस ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर स्टूडेंट्स के साथ आंदोलन किया। खुद राहुल गांधी PM आवास के बाहर धरना देते दिखे।
अब जब कुछ इसी तरह की मांगें झारखंड में उठीं तो कांग्रेस का वह रवैया सामने नहीं आया जो NEET पेपर लीक के लिए था। कांग्रेस यहां कश्मकश में है। अगर वह छात्रों की शिकायत को नजरअंदाज करती है तो BJP उस पर दोहरे मापदंड का आरोप लगा सकती है और अगर वह छात्रों के आंदोलन को पूरी ताकत से समर्थन देती है तो उसकी अपनी गठबंधन सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।

कांग्रेस खुद को कैसे बचा रही?
झारखंड में कांग्रेस ने फिलहाल सरकार का बचाव करने के बजाय प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स के साथ खड़े होने का फैसला किया है। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी छात्रों के अधिकार और न्याय की लड़ाई में पूरी ताकत के साथ खड़े हैं।
कांग्रेस के एक डेलिगेशन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी इस मुद्दे पर मुलाकात की और इसका जल्द से जल्द हल निकालने के लिए कहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी कह चुके हैं कि पार्टी झारखंड, पंजाब, दिल्ली या देश में कहीं भी छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है।
राहुल गांधी का क्या रुख है?
राहुल गांधी ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर ‘Ask Me Anything’ सेशन के दौरान छात्रों के मुद्दे पर बहुत कुछ कहा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सिस्टम महंगा और दबाव वाला हो गया है और सरकारों को छात्रों की बात सुननी चाहिए।
राहुल ने कहा कि उन्होंने देहरादून से लेकर कोटा तक एजुकेशन सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। इसी दौरान वह यह कहते दिखाई दिए कि हर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए, चाहे वह कांग्रेस की सरकार हो, केंद्र की सरकार हो या झारखंड की सरकार।
यानी साफ है कि राहुल गांधी और कांग्रेस युवाओं के साथ खड़ी भी है लेकिन झारखंड की सरकार पर स्टूडेंट्स की सभी मांग मानने के लिए ज्यादा दबाव भी नहीं डाल रही है। यानी कांग्रेस का हाथ फिलहाल दोनों के साथ नजर आ रहा है।

छात्रों की शिकायत क्या है?
झारखंड में चल रहा आंदोलन कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर है। फिलहाल सबसे बड़ा विवाद 14वीं JPSC सिविल सर्विस परीक्षा को लेकर है। प्रीलिमिनरी एग्जाम के रिजल्ट आने के बाद इस एग्जाम पर सवाल उठे थे। इनमें कैटेगरी के हिसाब से कटऑफ जारी नहीं करने और मेरिट लिस्ट से जुड़े सवाल शामिल हैं।
JPSC के चेयरमैन रहे एल खियांगते पर इस गड़बड़ी का सीधा-सीधा आरोप लगा। उन्हें फौरन इस्तीफा देना पड़ा था। इस मामले में CID की जांच चल रही है।
इसके अलावा छात्र JSSC की परीक्षाओं, खासकर कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। यानी अब मामला सिर्फ रिजल्ट सुधारने तक सीमित नहीं है। स्टूडेंट्स अब एग्जाम प्रोसेस में ज्यादा ट्रांसपरेंसी और कुछ एग्जाम के मामलों में सेंट्रेल एजेंसी ‘CBI’ की जांच की मांग कर रहे हैं।

हेमंत सोरेन सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने छात्रों की मांगों पर बातचीत का रास्ता अपनाया है। सरकार की ओर से न्याय और ट्रांसपरेंसी का भरोसा दिया गया है।
सरकार ने JPSC की एक परीक्षा रद्द करने पर सहमति जताई है लेकिन JSSC-CGL एग्जाम को रद्द करने की मांग को सरकार ने मानने से इनकार कर दिया।
सरकार का कहना है कि JSSC-CGL परीक्षा कोर्ट की निगरानी में हुई थी और इसके जरिए चुने गए उम्मीदवारों को नौकरी भी मिल चुकी है। सरकार के इस फैसले से प्रदर्शनकारी छात्र संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है।
अगर सरकार छात्रों की मांगों पर कोई रास्ता निकाल लेती है तो कांग्रेस कह सकती है कि उसके दबाव से समाधान हुआ। लेकिन अगर आंदोलन बढ़ता है, तो पार्टी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी होगी। उसे कोई एक रास्ता चुनना पड़ सकता है- गठबंधन सरकार का बचाव करना या अपनी वही छात्र राजनीति जारी रखना, जिसे वह BJP के खिलाफ सबसे बड़े मुद्दों में से एक बना चुकी है।
यही वजह है कि झारखंड का JPSC-JSSC विवाद अब सिर्फ भर्ती परीक्षाओं का मामला नहीं रह गया है। यह कांग्रेस की छात्र राजनीति और उसकी गठबंधन की मजबूरी दोनों की परीक्षा बन गया है।
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