नॉर्थ टेक सिम्पोज़ियम-2023 में राजनाथ सिंह
नॉर्थ टेक सिम्पोज़ियम-2023 में राजनाथ सिंह Raj Express

नॉर्थ टेक सिम्पोज़ियम-2023 में राजनाथ सिंह, संबोधन में कहीं ये बातें...

नॉर्थ टेक सिम्पोज़ियम-2023 में राजनाथ सिंह ने कहा- SIDM की स्थापना हुए तो वैसे लगभग 6 वर्ष हो गए, लेकिन यदि मैं पिछले 4.5 वर्षों की बात करूँ तो ऐसे अनेक अवसर आए हैं।

जम्मू कश्‍मीर, भारत। जम्मू में SIDM द्वारा आयोजित 'नॉर्थ टेक सिम्पोज़ियम-2023' में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए और अपना संबोधन दिया।

नॉर्थ टेक सिम्पोज़ियम-2023 में राजनाथ सिंह ने कहा- SIDM की स्थापना हुए तो वैसे लगभग 6 वर्ष हो गए, लेकिन यदि मैं पिछले 4.5 वर्षों की बात करूँ तो ऐसे अनेक अवसर आए हैं, जहाँ मुझे आप लोगों से बातचीत करने का मौका मिला तथा हमने आपकी समस्याएं सुनने व उनका समाधान करने का भी भरपूर प्रयास किया है। इसी synergy और प्रयासों का परिणाम है, कि पिछले वित्तीय वर्ष में हमारा domestic defence production record 1 लाख करोड़ रुपए, और हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट, रिकॉर्ड 16,000 करोड़ रुपए के आंकड़े को भी पार कर गया।

मैंने हमेशा से इस बात पर जोर दिया है, कि Research and development हमारे लिए इस तेज गति से भागती हुई दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में मददगार सिद्ध होता है। इसलिए R&D किसी भी देश के विकास के लिए, उसके आधारभूत तत्वों में से एक होता है। R&D के लिए हमें पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है। हालांकि यह एक risky venture होता है, क्योंकि इसमें नए तरीके से सोचना पड़ता है, और हो सकता है कि कई बार आपको वह परिणाम न मिले जिसको लक्ष्य बनाकर आपने R&D का कार्य शुरू किया था, लेकिन इसके बावजूद हमें इसकी ओर ध्यान देना पड़ेगा।।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • एक राष्ट्र के रूप में हम एक transitional phase से गुजर रहे हैं। यदि हमें कोई technology, imitation या फिर transfer के through मिलती है, तो इसमें भी कुछ गलत नहीं है, लेकिन हम इन आधारों पर एक विकसित राष्ट्र बनने का सपना नहीं देख सकते।

  • हमें अपने खुद के patents file करने पड़ेंगे, उसके लिए R&D में अच्छा खासा निवेश करना पड़ेगा। हाँ, ऐसा जरूर हो सकता है कि उस खर्चे से profitability पर दबाव बने, ऐसा अवश्य हो सकता है कि उस खर्चे से हमारा आज का profit कम हो जाए, लेकिन दूरगामी दृष्टिकोण से वह आपके उद्योग के लिए, और हमारे देश के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगा।

  • हमारे यहां एक से बढ़कर एक IITs, IIMs और IISCs जैसे संस्थान हैं। यह सारे संस्थान अपने-अपने स्तर पर R&D के क्षेत्र में काम करते हैं, लेकिन हमें उनके कार्यों को defence sector से भी जोड़ने की आवश्यकता है। ऐसा करके हम अपने defence sector में एक R&D culture develop कर पाएँगे।

  • इस culture को develop करने में हमें अपने देश के human resources के साथ-साथ यदि विदेश से भी कुछ हासिल हो, तो भी हमें इसमें संकोच नहीं करना चाहिए। विदेश में top universities, top Companies, space agencies व scientific research organizations में ऐसे अनेक brilliant भारतीय मूल के लोग हैं, जिनका भारत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव है। हमें यह प्रयास करना होगा कि हमारे R&D में हमें उनका भी सहयोग मिले।

  • यदि वो भारतीय मूल के नहीं भी हैं, यदि वो अन्य देशों के भी हों और यदि वो भारत की growth story का हिस्सा बनना चाहते हों, तो हमें उन engineers और scientists को अपने R&D sector से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। हमें सिर्फ scientists व engineer ही नहीं बल्कि manager, legal experts और financial experts भी बेहतरीन रखने होंगे, चाहे वह हमें अपने देश से मिले या फिर विदेश से।

  • अब स्थिति यह है कि यदि आप नए-नए ideas लेकर आ रहे हैं, R&D का कार्य कर रहे हैं तो काम करने के घंटे से आपका आकलन नहीं किया जा सकता। पुराने मापन के आधार पर आपके काम को मापा नहीं जा सकता, इसलिए हमें नए HR standards को भी अपनाना होगा।

  • एक ऐसा work culture develop करना पड़ेगा, जहां senior और junior का concept हो, superior और inferior का नहीं, क्योंकि जो top most scientists होते हैं, वह इतनी ज्यादा hierarchy में काम नहीं कर सकते। हमें employees के weekends और holidays को respect करने की आदत डालनी होगी। हमें महिलाओं को भी अधिक effectiveness के साथ R&D से जोड़ना होगा। इसके लिए हमें maternity leave policy, creche system और workplace पर उनके अधिकारों की दिशा में भी काम करना पड़ेगा।

  • Companies के मामले में dynastic ownership को सही ठहराया जा सकता है, लेकिन dynastic level पर कंपनी का management करना कई बार कंपनी के लिए, और उसके employees के लिए घातक सिद्ध हो जाता है। यदि आप पिछले कुछ दशकों से भारत की राजनीतिक परिदृश्य का आकलन करें, तो आप पाएंगे की ऐसी कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी हैं, जो dynastic control पर चल रही हैं। और मुझे आपको यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि यदि dynastic control पर कोई कंपनी या राजनीतिक दल का management चले तो अंत में उसकी दुर्गति होनी तय है।

  • SIDM का जो कार्य है इसमें कई बार export के लिए हमें quality assurance की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि buyer तो high quality के equipment ही खरीदना चाहेगा। हमने SIDM के सामने आने वाली quality से related जो भी समस्याएं हैं उनका हमेशा समाधान किया है। लेकिन साथियों, हमें यहां इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है, कि buyer या सरकार तो अपनी तरफ से quality check की कोशिश करेगी ही, लेकिन उसके अतिरिक्त आप स्वयं अपने अंदर एक Internal evaluation  की व्यवस्था बना सकते हैं।

  • आजादी के समय से ही Defence procurement में corruption and favouritism की शिकायत आती रही है। आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि, एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है। ऐसे लोगों के corruption and malpractices के कारण जनता का संस्थानों पर से विश्वास उठने लगता है, जिसे एक लोकतांत्रिक देश में बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

  • इसलिए बड़ा अच्छा होगा, कि SIDM एक internal Vigilance mechanism का भी निर्माण करे, और आप खुद अपने level पर ही कुछ कदम उठाए। या देखें कि यदि कोई आपसे affiliated company गलत कर रही है या फिर गलत information pass कर रही है तो आप उसे government की नजरों के सामने ले आएँ। इस प्रकार के कार्य न सिर्फ संस्थानों में, बल्कि भारत के लोकतंत्र में भी जनता का भरोसा और बढ़ाएंगे।

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