कहीं आपको भी तो नहीं “स्‍लीप एपनिया”, ऐसे करें लक्षणों की पहचान

'डेंटल स्लीप मेडिसिन' पर हुई एक कॉन्फ्रेंस में अनुमान लगाया गया कि भारत में लगभग 40 लाख लोग स्लीप एपनिया से पीड़ित हैं। इसमें 8 घंटे सोने वाला व्यक्ति 120 से 239 बार सांस लेना बंद कर देता है।
स्‍लीप एपनिया
स्‍लीप एपनियाRaj Express

राज एक्सप्रेस। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन स्‍लीप एपनिया से जूझ रहे हैं। सोते समय उनकी सांसें अटक जाती हैं, जिससे निपटने के लिए उन्‍हें सी पैप मशीन का यूज करना पड़ता है। वे पिछले 15 साल से इस बीमारी से ग्रस्‍त हैं। बता दें कि स्‍लीप एपनिया नींद से जुड़ी बीमारी है। इसमें सोते समय अचानक से व्‍यक्ति सांस लेना बंद कर देता है। लेकिन कुछ देर में सांसे फिर चलने लगती हैं।

“जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी” में छपी एक स्टडी के मुताबिक स्‍लीप एपनिया में सांस थमने के कारण मौत होने की संभावना ज्यादा होती है। अगर इसके संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो व्‍यक्ति को हाई ब्‍लड प्रेशर, हार्ट अटैक, डायबिटीज और हैडेक सिंड्रोम सहित कई बीमारियाें का खतरा बढ़ जाता है। बावजूद इसके स्‍लीप एपनिया से पीड़ित लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो जरा संभल जाइए और इसके लक्षणों पर ध्‍यान दीजिए। क्‍योंकि यह बीमारी बहुत खतरनाक है और आपकी सांसे रोक सकती है।

नींद में खर्राटे लेना ऐसा हाफना

अगर आप नींद में जरूरत से ज्‍यादा खर्राटे लेते हैं या हाफते हैं, तो ये स्‍लीप एपनिया के लक्षण हैं। हालांकि , सभी खर्राटे लेने वालों को एपनिया नहीं होता , लेकिन ये दोनों अक्‍सर साथ-साथ चलते हैं। जैसे-जैसे खर्राटे तेज होते हैं, एपनिया की समस्या बढ़ती जाती है। अगर आपको एपनिया है, तो सांस लेने में रुकावट के कारण खर्राटे आते हैं। ये एपनिया एपिसोड है और ऐसा एक रात में कई बार हो सकता है।

नींद के दौरान बेचैनी

एपनिया से पीड़ित लोग अक्‍सर रातों में करवट बदलते रहते हैं। या फिर उन्‍हें बेचैनी महसूस होती है, जिस कारण नींद नहीं आती। इसके अलावा अगर सांस लेने में दिक्कत हो रही हो, तो यह स्‍लीप एपनिया के शुरुआती संकेत माने जाते हैं।

थकावट महसूस होना

कई बार होता है कि हम पूरी रात सोते हैं, लेकिन सुबह उठकर ऐसा लगता है कि हम सोए ही नहीं और दिनभर थकावट महसूस होती है। अगर ऐसा आपके साथ भी है, तो एपनिया आपकी नींद उड़ा रहा है। नींद की कमी के चलते आपके व्‍यवहार में चिड़चिड़ापन आने के साथ आपकी परफॉर्मेंस में भी कमी देखने को मिल सकती है।

मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ना

कुछ लोगों को ऑब्सट्रक्टिव स्‍लीप एपनिया का खतरा ज्‍यादा रहता है। इसमें गले की मांसपेशियां ढीली पड़ने के साथ फेफड़ों का एयर सर्कुलेशन ब्‍लॉक हो जाता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में एपनिया के लक्षण ज्‍यादा देखे जाते हैं। हालांकि, मेनोपॉज के बाद ज्‍यादा वजन होने से महिलाओं में स्‍लीप एपनिया होने का खतरा ज्यादा रहता है।

नींद के झोंके आना

अगर आपको बैठते, पढ़ते, टीवी देखते या गाड़ी चलाते समय नींद के झोंके आने लगे , तो यह स्‍लीप एपनिया का संकेत है। इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। आमतौर पर जिन लोगों में ये लक्षण दिखते हैं, उन्‍हें किसी भी चीज पर फोकस करने और याद रखने में समस्‍या होती है।

स्‍लीप एपनिया एक खतरनाक स्थिति है। जो सोते समय व्‍यक्ति की सांस लेने में रुकावट पैदा करती है। समय के साथ स्‍लीप एपनिया रिस्‍की हो सकता है। इसलिए इसका जल्‍द से जल्‍द निदान और उपचार महत्वपूर्ण है।

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