चंडीगढ़ बॉर्डर पर फिर किसानों का डेरा: पानी के हक से MSP तक 4 बड़े मुद्दे, 7 दिन चलेगा धरना
Published:
4 min read

पंजाब-चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों का यह लेटेस्ट धरना 7 सितंबर तक चलेगा।
नेशनल डेस्क। पंजाब के किसान एक बार फिर चंडीगढ़ बॉर्डर पर जुट गए हैं। अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर किसानों ने हफ्तेभर के धरने का ऐलान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा की अगुआई में किसान एयरपोर्ट रोड के पास धरना दे रहे हैं। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा और ट्रैफिक के लिए खास इंतजाम किए हैं।
किसान संगठनों का कहना है कि कई साल से मांगें उठाने के बावजूद सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं लिया गया। भारतीय किसान यूनियन (BKU) लखोवाल के सीनियर लीडर हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि अब 32 किसान संगठनों ने मिलकर आंदोलन को तेज करने का फैसला किया है।
'साढ़े 4 साल से मांगें उठा रहे, कोई सुनने को तैयार नहीं'
हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, SDM और DC समेत कई अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा- हम 32 किसान संगठनों का गठजोड़ हैं और लंबे समय से हम मांगें उठा रहे हैं। साढ़े चार साल हो गए, लेकिन कोई हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। पहले सरकार ने कुछ मांगों पर सहमति जताई थी, लेकिन उन पर अमल अब तक नहीं हुआ।
पानी के मुद्दे पर पंजाब सरकार से खास मांग
किसानों ने पंजाब के पानी के अधिकार को लेकर पंजाब सरकार को भी घेरा। लखोवाल ने कहा कि पंजाब सरकार यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि पानी का मामला केंद्र सरकार के अधिकार में है।
उन्होंने मांग की कि पंजाब विधानसभा का स्पेशल सेशन बुलाया जाए और पानी को लेकर हुए पुराने समझौतों को रद्द करने की मांग विधानसभा के जरिए उठाई जाए।
लखोवाल ने कहा कि इन समझौतों को हुए करीब 25 साल बीत चुके हैं। किसान संगठन चाहते हैं कि पंजाब सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा में खुलकर अपना पक्ष रखे।
22 फसलों के MSP पर कानून की मांग
किसानों की सबसे बड़ी मांगों में से एक 22 फसलों के लिए कानूनी MSP गारंटी है। लखोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 22 फसलों के लिए MSP तय किया जाता है, लेकिन किसानों को इसकी कानूनी गारंटी मिलनी चाहिए।
उनका कहना है कि सिर्फ MSP घोषित करने से किसानों की समस्या हल नहीं होगी। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों को उनकी फसल का MSP जरूर मिले।
'कॉरपोरेट का कर्ज माफ हो सकता है तो किसानों का क्यों नहीं?'
किसान संगठनों ने कर्ज को लेकर भी सरकार से सवाल किया है। लखोवाल ने कहा कि अगर बड़े कॉरपोरेट का लाखों करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया जा सकता है, तो किसानों के कर्ज पर भी सरकार को राहत देनी चाहिए।
इसके साथ ही किसान संगठन फसल बीमा योजना को सही तरीके से लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि फसल खराब होने पर किसानों को मदद मिल सके।
FTA के खिलाफ देशभर में आंदोलन की तैयारी
किसान संगठनों ने Free Trade Agreement यानी FTA को लेकर भी देशभर में आंदोलन की चेतावनी दी है। लखोवाल ने कहा कि किसान संगठन इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन के लिए तैयार हैं और कई जगह पहले से प्रदर्शन हो रहे हैं।
किसानों का कहना है कि FTA जैसी नीतियों का असर सीधे खेती और किसानों की कमाई पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।
यह भी पढ़ें...

