देश में कितनी गाड़ियां E20 के लिए फिट: सरकार बोली- नंबर नहीं पता, ऐसी कोई स्टडी नहीं की; एथेनॉल प्रोग्राम के फेवर में कहा- अब तक इंजन में गड़बड़ी का कोई मामला नहीं आया
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एक सवाल के जवाब में बताया कि सरकार के पास देश में E20 कम्पैटिबल गाड़ियों का डेटा नहीं है।
नेशनल डेस्क। E20 पेट्रोल को लेकर चल रही कंट्रोवर्सी के बीच केंद्र सरकार ने संसद में माना कि देश में कितनी गाड़ियां E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह कम्पैटिबल (अनुकूल) हैं, इसका कोई आकलन नहीं किया गया है। हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि साइंटिफिक टेस्टिंग और ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ हुई स्टडी के आधार पर E20 पेट्रोल पूरी तरह सेफ है और इससे गाड़ियों को कोई बड़ा नुकसान होने का सबूत नहीं मिला है।
संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी सामने आई। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद नीरज दांगी ने इस बारे में सवाल किया था। जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने इस तरह का कोई डेटा नहीं जुटाया है कि भारत में कुल कितने वाहन E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह फिट हैं।
सरकार बोली- कई संस्थानों ने स्टडी की
सरकार ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को स्टेप बाय स्टेप तरीके से शुरू किया गया है। इसमें नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियां, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और अन्य तकनीकी संस्थानों की राय और टेस्ट शामिल रहे हैं।
सरकार के मुताबिक इन संस्थानों ने इंजन की मजबूती, परफॉर्मेंस, स्टार्ट होने की क्षमता, जंग लगने की संभावना, पार्ट्स की क्वालिटी, प्रदूषण और माइलेज जैसे कई पहलुओं पर लैब और सड़क दोनों स्तर पर टेस्ट किए। इन सभी में E20 पेट्रोल सुरक्षित पाया गया।
पुराने वाहनों में नहीं पड़ा असर
सरकार ने कहा कि स्टडी में यह भी सामने आया कि पुराने वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से परफॉर्मेंस में कोई बड़ा बदलाव या इंजन के खराब होने सबूत नहीं मिले।
संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, E15 पेट्रोल पिछले साढ़े तीन साल से और E19-E20 पेट्रोल पिछले ढाई साल से इस्तेमाल हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन फ्यूल ब्लेंड पर चली हैं। सरकार का दावा है कि एथेनॉल की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने का कोई मामला सामने नहीं आया।
कंपनियों ने भी नहीं बताई कोई बड़ी समस्या
सरकार ने कहा कि वाहन कंपनियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी E20 पेट्रोल की वजह से जंग लगने, पार्ट्स जल्दी घिसने या गाड़ी की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या दर्ज नहीं हुई है। कंपनियां E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहनों की वारंटी भी पहले की तरह दे रही हैं।
माइलेज थोड़ा कम हो सकता है
सरकार ने माना कि जो वाहन पहले E10 पेट्रोल के हिसाब से बनाए गए थे, उनमें 3% से 5% तक माइलेज कम हो सकता है। लेकिन इसके बदले E20 पेट्रोल में बेहतर पिकअप और कम प्रदूषण जैसे फायदे मिलते हैं।
संसद में कंपनियों का डेटा भी रखा
सरकार ने बताया कि एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की। इनमें करीब 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी थे जो मूल रूप से E20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद E20 पेट्रोल से जुड़ी जंग, ज्यादा घिसाव या पार्ट्स की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या सामने नहीं आई।
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