NEET पीड़ितों को मुआवजा नहीं दिया तो फिर से धरने पर बैठेंगे: अभिजीत दीपके का सरकार को अल्टीमेटम, कहा- सांसद खरीदने के लिए पैसे हैं, बच्चों के लिए नहीं
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अभिजीत दीपके का कहना है कि सरकार अब वादा खिलाफी कर रही है।
नेशनल डेस्क। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर जल्द ही NEET पेपर लीक के पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला तो वह एक बार फिर से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ जाएंगे।
दीपक ने सोमवार (3 अगस्त) को बताया कि अब तक पीड़ित परिवारों को केन्द्र सरकार की ओर से मुआवजा नहीं दिया गया है।
दीपके ने क्या-क्या कहा?
दीपके ने कहा कि NEET पेपर लीक के कारण कुछ स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया था। ऐसे में हमारी चुनिंदा मांगों में से एक मांग यह भी थी कि ऐसे बच्चों की फैमिली को मुआवजे के तौर पर 1-1 करोड़ दिए जाएं। केन्द्र सरकार इस पर राजी भी हुई थी लेकिन अब तक किसी भी परिवार को यह पैसा नहीं मिला है।
उन्होंने कहा- हम चाहते हैं कि सरकार अपने वादे के मुताबिक मांगों को पूरा करे, नहीं तो हमें फिर से आंदोलन करना पड़ेगा।
दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार मुआवजे के मुद्दे पर नियम-कायदों का हवाला देकर देरी कर रही है। उन्होंने कहा- जब सांसद-विधायक खरीदने होते हैं तो करोड़ों रुपये फौरन निकाल लिए जाते हैं लेकिन मुआवजा देने के नाम पर नियम याद आ जाते हैं।
सरकार ने मानी थी तीनों मांगे, तब खत्म हुआ था प्रदर्शन
CJP ने अपनी दो बड़ी मांगों के साथ जंतर-मंतर पर जून में प्रोटेस्ट शुरू किया था। इसमें शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ मुआवजे की बात थी। इनके साथ ही कुछ और भी छोटी-बड़ी डिमांड थी। इन सभी को लेकर जब बात नहीं सुनी गई तो CJP ने 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान किया। इस मार्च के दौरान पुलिस और प्रोटेस्टर्स के बीच झड़प हुई। कई युवाओं के खिलाफ FIR दर्ज होने लगीं। ऐसे में CJP ने अपनी तीसरी मांग के तौर पर सरकार से सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुए केस वापस लेने को कहा था।
25 जुलाई को सरकार इन सभी तीन बड़ी मांग पर राजी हुई और 37 दिन के बाद CJP ने धरना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया। फिलहाल, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है लेकिन बाकी दोनों मांगों पर पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है।

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाने पर भी नाखुश हैं दीपके
अभिजीत दीपके ने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर प्रह्लाद जोशी के अपॉइंटमेंट पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा- हमारी मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी और वह पूरी हुई। लेकिन उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाया गया। हमनें उन्हें बिलकिस बानो गैंगरेप केस के दोषियों का सम्मान करते हुए देखा था। स्कूल जाने वाली लड़कियों को जब यह पता चलेगा कि उनके शिक्षा मंत्री इस तरह के शख्स हैं तो उन पर क्या असर पड़ेगा? इसलिए हम उनकी नियुक्ति का समर्थन नहीं करते।
20 जुलाई की हिंसा पर दिल्ली पुलिस पर आरोप
20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमले के सवाल पर दीपके ने दावा किया कि प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए बाहरी लोगों और दिल्ली पुलिस के बीच मिलीभगत थी।
उन्होंने कहा- मैं आंदोलन की शुरुआत से कह रहा था कि बाहर के लोगों को भेजकर माहौल बिगाड़ा जाएगा और आरोप CJP पर लगाया जाएगा। जहां मुझे जांच के बिना प्रवेश नहीं दिया जा रहा था, वहीं 2100 अपराधी खुलेआम घूम रहे थे। यह दिल्ली पुलिस पर बड़ा सवाल है।
दीपके ने आरोप लगाया कि 19 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर मंच के पीछे पत्थरों से भरा ट्रक खड़ा किया था और एक डैमेज वैन भी पहले से वहां मौजूद थी। उनके अनुसार, अगले दिन हुई पत्थरबाजी पहले से तय प्लानिंग का हिस्सा थी।

अमित शाह पर भी उठाए सवाल
दीपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के रहते यह सब कैसे हो सकता है? उनकी पुलिस 12 साल की बच्चियों पर कार्रवाई करने में तो एक्टिव हो जाती है, लेकिन अपराधियों को नहीं रोक पाती। खुद दिल्ली पुलिस कह चुकी है कि प्रोटेस्ट साइट पर 2100 अपराधी मौजूद थे। यह अमित शाह और दिल्ली पुलिस की बड़ी नाकामी है। वैसे मैं इसे नाकामी नहीं बल्कि उनकी प्लानिंग का हिस्सा मानता हूं।
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