CBSE पर राहुल गांधी के हमले जारी: 12th स्डूडेंट्स से बातचीत में कहा- स्कैनिंग फोन से हो तो गलत मार्किंग तय है; एक दिन पहले टेंडर पर सवाल उठाए थे
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नेशनल डेस्क। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी CBSE के ऑन स्क्रीन मॉनिटरिंग (OSM) सिस्टम में हो रही गड़बड़ी को लेकर लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं। सोमवार (1 जून) सुबह भी उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वह CBSE 12वीं बोर्ड के कुछ स्टूडेंट्स से बातचीत करते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में वह स्टूडेंट्स दिख रहे हैं, जिन्होंने CBSE के OSM सिस्टम और री-इवैल्यूएशन प्रोसेस पर सबसे पहले सवाल खड़े किए थे। इस वीडियो में राहुल यह कहते नजर आ रहे हैं कि CBSE की पूरी प्रोसेस ही एक बिजनेस बन गई है। उन्होंने कहा कि फोन से स्कैनिंग हो रही है, तो मार्किंग तो गलत होगी ही। उन्होंने यह भी कहा कि NEET हो या CBSE सारे एजुकेशन सिस्टम को पैसे कमाने की ओर मोड़ दिया गया है।
राहुल गांधी क्या-क्या बोले?
राहुल गांधी इस वीडियो में कहते दिख रहे हैं कि CBSE गड़बड़ी कर रही है और सजा बच्चों को मिल रही है। री-इवैल्यूएशन प्रोसेस में एक-एक सवाल के 25 रुपए वसूले जा रहे हैं। एक बच्चे को अपनी ही आंसर शीट जांचने के लिए 2000 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर बिजनेस किया जा रहा है।
स्टूडेंट्स से लंबी-चौड़ी बातचीत के बाद राहुल एक पोस्ट में लिखते हैं- CBSE में बैठे जेब-कतरों से सावधान। वह पहले गलत नंबर देते हैं और फिर पैसा वसूली करते हैं। एक-एक बच्चे को 2-2 हजार तक देने पड़ रहे हैं। 4 लाख बच्चे अगर री-चेकिंग की एप्लीकेशन डालें तो सोचिए कितनी कमाई होगी। गलती CBSE कर रहा है, सजा बच्चों को मिल रही है और कमाई सरकार की हो रही है।
उन्होंने यह भी लिखा कि जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती। बढ़ाई जाती है। और इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं।
एक दिन पहले स्कैनिंग टेंडर पर सवाल खड़े किए थे
राहुल गांधी ने 31 मई को एक स्टूडेंट की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा- CBSE के मई 2025 के टेंडर में यह अनिवार्य किया गया था कि उत्तर पुस्तिकाओं को ऑटोमेटिक रोबोटिक स्कैनरों से स्कैन किया जाए, उनकी बाइंडिंग सुरक्षित रखी जाए और स्कैनिंग कम से कम 300 DPI रिजॉल्यूशन पर हो।
लेकिन अगस्त में दोबारा जारी किए गए टेंडर में चुपचाप इन सभी शर्तों को हटा दिया गया। 'रोबोटिक स्कैनर' की जगह सिर्फ सामान्य 'स्कैनर' शब्द इस्तेमाल किया गया और रिजॉल्यूशन भी 300 DPI से घटाकर 200 DPI कर दिया गया।
अब हमें पता चल गया है कि इसका वास्तविक मतलब क्या था। खुलासा हुआ है कि COEMPT ने आंसर शीट्स को मोबाइल फोन से स्कैन किया।
राहुल गांधी ने लिखा था कि धुंधली कॉपी, गायब पन्ने और स्कैन न किए गए पेज ये सभी बच्चों की गलतियां नहीं हैं। यह उस टेंडर का रिजल्ट है, जिसे किसी खास वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया था। यह धोखाधड़ी है।

