राम मंदिर दान चोरी की जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: SIT से कहा- इन्वेस्टिगेशन जल्द पूरी करें, गड़बड़ी मिली तो सुधार के आदेश देंगे
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राम मंदिर में दान चोरी से जुड़ी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई हैं। इन्हीं पर कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की।
नेशनल डेस्क। अयोध्या के राम मंदिर में दान के पैसों में गड़बड़ी की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 अगस्त) को सख्त रुख दिखाया। कोर्ट ने जांच कर रही SIT से कहा कि वह जांच को जल्द पूरा करे ताकि मंदिर के सिस्टम में जरूरत के मुताबिक सुधार भी जल्द हो सके। कोर्ट ने SIT से अब तक की जांच की प्रोग्रेस की रिपोर्ट भी मांगी है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने SIT को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि SIT सीधे कोर्ट के प्रति जवाबदेह है और सबसे पहले अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखेगी।
SIT रिपोर्ट देखने के बाद दान के सिस्टम में बदलाव संभव
कोर्ट ने संकेत दिया कि SIT की रिपोर्ट देखने के बाद वह राम मंदिर में श्रद्धालुओं से मिलने वाले दान के मैनेजमेंट को लेकर कुछ सुधार के निर्देश दे सकता है।
यानी मामला सिर्फ कथित गड़बड़ी की जांच तक सीमित नहीं रह सकता। अगर कोर्ट को दान के पैसे के मैनेजमेंट में कमियां मिलती हैं, तो वह आगे की व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठा सकता है।

CM योगी के SIT रिपोर्ट का जिक्र करने पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि मामला अभी कोर्ट में चल रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक तौर पर SIT की जांच के नतीजों का जिक्र किया है।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर SIT को जांच रिपोर्ट सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के सामने रखनी है, इधर-उधर नहीं। कोर्ट ने कहा कि जांच में किसी तरह की कमी पाई जाती है तो कोर्ट अतिरिक्त निर्देश जारी कर सकता है।
कोर्ट बोला- जांच में सुधार की जरूरत है तो सुझाव दें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता या कोई भी जिम्मेदार और जनहित में काम करने वाला व्यक्ति जांच को बेहतर और ज्यादा साफ-सुथरा बनाने के लिए सुझाव दे सकता है। ये सुझाव सॉलिसिटर जनरल के ऑफिस को दिए जा सकते हैं, जिन्हें आगे SIT तक पहुंचाया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि SIT इन सुझावों पर निष्पक्ष तरीके से विचार करेगी।
चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर जांच ठीक तरीके से चल रही है तो अलग बात है, लेकिन अगर जांच में कहीं कमी है या उसे बेहतर बनाने की जरूरत है, तो कोर्ट इस मामले में आगे के निर्देश देने के लिए तैयार है।
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