राज्यों की बार काउंसिल में महिलाएं न के बराबर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ये पुरुषों का क्लब बन गईं, हिस्सेदारी बढ़ाओ
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सुप्रीम कोर्ट
नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (4 अगस्त) को कहा कि देशभर की बार काउंसिल अब 'पुरुषों का क्लब' बन गई हैं। कोर्ट ने कहा कि इन पर से पुरुषों का एकाधिकार खत्म होना चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों की बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को को-ऑप्ट (नामित) करने के निर्देश भी दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी और निर्देश बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और राज्य बार काउंसिलों के चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।
'बार काउंसिल पुरुषों का क्लब बन गई'
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा- बार काउंसिल अब पुरुषों का क्लब बन गई हैं। कुछ लोग इसे अपनी जागीर की तरह चलाते हैं। इस एकाधिकार को पूरी तरह खत्म करना होगा।
कोर्ट ने साफ किया कि बार काउंसिल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि जरूरी सुधार है।
सभी हाईकोर्ट के लिए क्या निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने राज्य के बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को नामित करें। इनमें एक महिला हाईकोर्ट की पूर्व जज हों और दूसरी सीनियर महिला वकील हों, जिनकी बार में अच्छी पहचान और सम्मान हो।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर कोई महिला बार काउंसिल का चुनाव हार गई है, तो भी वह को-ऑप्ट सदस्य चुनी जा सकती है।
बार काउंसिल में महिलाओं के लिए पहले से है 30% रिजर्वेशन
फिलहाल, महिलाओं के लिए राज्यों के बार काउंसिल में 30% रिजर्वेशन है। इसमें 20% सीटें सीधे चुनाव से भरी जाती हैं, जबकि बाकी 10% सीटें को-ऑप्शन के जरिए भरे जाने का सिस्टम है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इसी अरेंजमेंट को असरदार तरीके से लागू करने के लिए है।
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