लॉ स्टूडेंट पर बार काउंसिल एक्शन नहीं ले सकती: वकील बनने तक यह हक कॉलेज का; सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही यह बात
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नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक कोई लॉ स्टूडेंट वकील के तौर पर एनरोल नहीं हो जाता, तब तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) या स्टेट बार काउंसिल उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि लॉ स्टूडेंट के बर्ताव पर कार्रवाई करने का अधिकार उसके शैक्षणिक संस्थान यानी यूनिवर्सिटी या कॉलेज के पास है। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े एक मामले में की। छात्रों के एक ग्रुप ने यूनिवर्सिटी के एनुअल कॉन्वोकेशन इवेंट में CJI सूर्यकांत को बुलाने का विरोध किया था। इसके बाद BCI ने 13 अगस्त को एक आदेश जारी कर स्टूडेंट्स को वकील के तौर पर एनरोल न करने का आदेश दिया था।
विवादों में आया था BCI का फैसला
13 अगस्त को BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने स्टेट बार काउंसिल्स को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के उन स्टूडेंट्स को वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए, जिन्होंने CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने का विरोध किया था। हालांकि, BCI ने कुछ ही घंटे बाद यह आदेश वापस ले लिया। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। दो पूर्व NALSAR छात्रों ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
BCI के पास स्टूडेंट्स पर एक्शन लेने का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने कहा कि यह मामला सिर्फ दो स्टूडेंट का नहीं है, बल्कि यूनिवर्सिटी में बोलने और अपनी बात रखने की आजादी से जुड़ा है। उन्होंने कोर्ट से पूछा कि आखिर BCI ने किस कानूनी प्रावधान के तहत छात्रों के खिलाफ ऐसा आदेश जारी किया था।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि लॉ स्टूडेंट्स के बर्ताव पर कार्रवाई का BCI के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यह पूरी तरह स्टूडेंट के एजुकेशन इंस्टिट्यूट का मामला है। CJI ने यह भी कहा कि BCI का आदेश वापस लिए जाने से ही पता चलता है कि उसे अपनी गलती का एहसास हुआ था।
'गलती हुई थी, तभी आदेश वापस लिया'
CJI सूर्यकांत ने कहा कि हर व्यक्ति से हमेशा जिम्मेदारी से काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आदेश वापस लिया गया, इसका मतलब है कि शायद यह महसूस हुआ कि कोई गलती हुई थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया।
वहीं, BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कोर्ट से कहा कि मामला अब बंद हो चुका है और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। लेकिन जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इस मामले में कानूनी स्थिति साफ करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
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लॉ स्टूडेंड के बतौर वकील एनरोल होने के वक्त पावर BCI के पास
जस्टिस बागची ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि मान लीजिए कोई लॉ स्टूडेंट ऐसा काम करता है, जिसके कारण वह आगे चलकर Advocates Act के तहत वकील बनने के लिए अयोग्य हो सकता है। फिर भी अगर यूनिवर्सिटी उसे अपनी पढ़ाई जारी रखने देती है, तो BCI पढ़ाई के दौरान उसके खिलाफ रोक नहीं लगा सकती।
उन्होंने कहा कि जब वह स्टूडेंट पढ़ाई पूरी करने के बाद वकील के तौर पर एनरोलमेंट के लिए आवेदन करेगा, तब BCI यह देख सकती है कि वह वकील बनने की जरूरी शर्तें पूरी करता है या नहीं। यानी पढ़ाई के दौरान छात्र के व्यवहार पर कार्रवाई कॉलेज या यूनिवर्सिटी करेगी, जबकि वकील बनने के वक्त उसकी पात्रता की जांच BCI कर सकती है।

