महिला अफसर को परमानेंट कमीशन क्यों नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन कोस्ट गार्ड को फटकार लगाई, कहा- महिलाओं को इस तरह अपमानित नहीं होने देंगे
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नेशनल डेस्क। इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 अगस्त) को सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने ICG को फटकार लगाते हुए पूछा कि अगर पुरुष अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दिया जा सकता है तो महिला अधिकारियों को क्यों नहीं? इसी के साथ कोर्ट ने इस मामले में फैसला लेने के लिए ICG को दो हफ्ते की डेडलाइन दी है।
मामला 14 साल से ICG में काम कर रहीं प्रियंका त्यागी का है। प्रियंका त्यागी शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट अधिकारी हैं। उन्होंने परमानेंट कमीशन न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अधिकारियों ने उन्हें परमानेंट कमीशन देने से इनकार कर दिया था और सेवा से रिलीज करने का आदेश भी दे दिया था।
साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कोस्ट गार्ड को प्रियंका त्यागी को फिर से सेवा में लेने का निर्देश दिया। हालांकि उन्हें अब तक परमानेंट कमीशन नहीं मिला।
प्रियंका त्यागी ईस्टर्न रीजन में समुद्री गश्त के लिए तैनात डॉर्नियर विमान की पहली ऑल-वुमन क्रू का हिस्सा रही हैं और विमान की कैप्टन भी रह चुकी हैं।
4500 घंटे उड़ाया डॉर्नियर, 300 से ज्यादा लोगों की जान बचाई
प्रियंका त्यागी की ओर से पेश वकील सिद्धांत शर्मा ने कोर्ट को बताया कि प्रियंका के पास करीब 4500 घंटे डॉर्नियर विमान उड़ाने की अनुभव है। उनके मुताबिक यह अनुभव पुरुष और महिला अधिकारियों समेत फोर्स में उनकी सीनियरिटी के हिसाब से सबसे ज्यादा है। वकील ने यह भी बताया कि प्रियंका त्यागी ने समुद्र में 300 से ज्यादा लोगों की जान बचाने में भूमिका निभाई है।
कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दोनों ओर की दलील सुनने के बाद सवाल उठाया कि जो अधिकारी लगातार 14 साल सेवा कर चुकी हैं, उन्हें परमानेंट कमीशन देने से कैसे इनकार किया जा सकता है।
कोर्ट ने इस मामले में फैसला लेने के लिए ICJ को दो हफ्ते का वक्त देते हुए कहा कि अगर इस दौरान फैसला नहीं लिया गया तो वह खुद प्रियंका त्यागी को सेवा में परमानेंट कमीशन देने का आदेश जारी कर सकता है।

कोस्ट गार्ड ने बताया इंफ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा
कोस्ट गार्ड की ओर से अटॉर्नी जनरल ने दलील दी कि इस मामले में फोर्स के इतिहास और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी देखना होगा। उन्होंने कहा कि नेवी की तरह कोस्ट गार्ड में महिलाओं के लिए सुविधाएं पहले से विकसित नहीं थीं।
उन्होंने कहा कि महिला अधिकारियों के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार करने में वक्त लगता है। अब नए आधुनिक जहाजों को शामिल किया जा रहा है और उनके हिसाब से सुविधाएं भी बनाई जा रही हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह मामला महिला अधिकारियों के खिलाफ भेदभाव का नहीं है।
'अपनी ही देरी का फायदा नहीं उठा सकते'
कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नजर नहीं आया। बेंच ने कहा कि कोस्ट गार्ड अपनी ही देरी का फायदा नहीं उठा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आप अपनी ही निष्क्रियता का फायदा नहीं उठा सकते। ये तकनीकी आपत्तियां काम नहीं करेंगी।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि प्रियंका त्यागी को उनके सीनियर अधिकारियों ने परमानेंट कमीशन के लिए सिफारिश की थी। ऐसे में कोस्ट गार्ड को उनकी दावेदारी पर विचार करना चाहिए था।
'कल कहेंगे हाइट सही नहीं, वजन कम है'
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कोस्ट गार्ड की दलीलों पर नाराजगी जताते हुए यह भी कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे महिला अधिकारी को कमीशन देने से बचने के लिए हर तरह के कारण खोजे जा रहे हैं।
कोर्ट ने कहा- कोस्ट गार्ड की पूरी कोशिश ऐसी है जैसे उन्हें महिला कमीशन के मुद्दे को खारिज करना हो। कल आप कहेंगे कि हाइट सही नहीं है और वजन ठीक नहीं है।
बेंच ने साफ कहा कि महिलाओं के मामले में इस तरह की तकनीकी आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। बेंच ने यह भी कहा कि वह महिला अधिकारियों को इस तरह अपमानित नहीं होने देगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की है।
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