UPI चार्ज के मुद्दे पर घमासान जारी: सरकार का दावा- MDR को मंजूरी देने वाली कमिटी में कांग्रेस सांसद भी थे, जवाब मिला- पैनल के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया
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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार के उन दावों को खारिज किया है, जिसमें कहा जा रहा है कि UPI पर चार्ज लगाने को मंजूरी देने वाली कमिटी में कांग्रेस के 5 सांसद भी थे।
नेशनल डेस्क। 2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% फीस लगाने के प्रस्ताव को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच घमासान जारी है। कांग्रेस इस बदलाव का विरोध कर रही है और इस फैसले को वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है। इसी बीच सरकार की ओर से दावा किया गया है कि जिस कमिटी ने इस तरह की फीस लगाने की मंजूरी दी, उसमें कांग्रेस सांसद भी थे लेकिन तब किसी ने कोई आपत्ति नहीं ली। उधर कांग्रेस की ओर से भी इस पर जवाब आया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कमिटी में इस तरह के चार्ज पर बातचीत हुई लेकिन तब सरकार ने ऐसे किसी प्रस्ताव का जिक्र नहीं किया।
सरकार का दावा- 5 कांग्रेस सांसद बैठक में मौजूद थे
सरकार की ओर से एक अधिकारी ने कहा कि 12 अगस्त को UPI पेमेंट पर MDR लगाने का प्रस्ताव फाइनेंस पर संसद की स्थायी कमिटी के सामने पेश हुआ। इसे मंजूरी दिए जाने के वक्त 5 कांग्रेस सांसद मौजूद थे। अधिकारी ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ के नाम बताए।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि इस प्रस्ताव पर किसी कांग्रेस सांसद की असहमति दर्ज नहीं है। इसी आधार पर सरकार की ओर से कांग्रेस से सवाल किया गया कि अगर उसके सांसदों ने समिति में MDR का समर्थन किया था तो राहुल गांधी अब UPI पर फीस लगाने का विरोध क्यों कर रहे हैं।

गौरव गोगोई बोले- सरकार के पास कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि जब वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कमिटी मेंबर्स से मुलाकात की, तब UPI पर टैक्स या फीस लगाने का कोई खास प्रस्ताव उनके सामने नहीं था।
उन्होंने कहा कि बैठक में UPI पर MDR की जरूरत को लेकर बात जरूर हुई थी और कुछ सवाल भी उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकार के प्रतिनिधियों के पास हमारे सवालों का कोई ठोस या संतोषजनक जवाब नहीं था।
मनीष तिवारी ने भी दावे को नकारा
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी गोगोई की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि समिति के सामने UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का कोई खास प्रस्ताव नहीं रखा गया था।
तिवारी के मुताबिक, समिति के सामने यह तय नहीं किया गया था कि फीस कितनी होगी, किस रकम पर लागू होगी, इसकी मैक्सिमम लिमिट क्या होगी या किन लोगों और ट्रांजैक्शन को इससे छूट मिलेगी।
उन्होंने कहा कि समिति में MDR की जरूरत और इसके असर को लेकर बातचीत जरूर हुई थी, लेकिन किसी तय फीस या नियम पर सहमति नहीं बनी थी।
UPI पर 0.4% MDR का मतलब क्या है?
सरकार के नए नियम के मुताबिक, 15 अक्टूबर से दुकानदारों को किए जाने वाले 2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगाया जाएगा।
यानी अगर कोई व्यक्ति किसी दुकानदार या कारोबारी को 10000 का UPI पेमेंट करता है, तो इस ट्रांजैक्शन पर दुकानदार को 40 रुपए चार्ज देना होगा।
सरकार का कहना है कि इस चार्ज से ग्राहक पर कोई असर नहीं होगा। जबकि विपक्षी पार्टियों का कहना है कि दुकानदार पर लगा यह चार्ज इनडायरेक्टली ग्राहक पर ही लगेगा क्योंकि दुकानदार इस एक्स्ट्रा चार्ज को ग्राहक से ही वसूलेगा।
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