वोटों की खातिर संत रविदास के सामने माथा टेकते हैं विपक्ष के नेता : मायावती

भाजपा और सपा पर संत रविदास के उपदेशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मायावती ने बुधवार को कहा कि वोटों के स्वार्थ की खातिर संतगुरु की उपेक्षा करने वाले नेता उनको माथा टेकते हैं।
वोटों की खातिर संत रविदास के सामने माथा टेकते हैं विपक्ष के नेता : मायावती
वोटों की खातिर संत रविदास के सामने माथा टेकते हैं विपक्ष के नेता : मायावतीSocial Media

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर संत रविदास के उपदेशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को कहा कि वोटों के स्वार्थ की खातिर संतगुरु की उपेक्षा करने वाले नेता उनको माथा टेकते हैं मगर उनका उपदेश मानकर करोड़ों गरीबों का भला नहीं करते।

यूपी विधानसभा के चुनावी माहौल के बीच संत रविदास की जयंती के मौके पर मायावती ने कहा कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' का अमर संदेश देने वाले महान संतगुरु का संदेश धर्म को राजनीतिक और चुनावी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि इंसानियत और जनसेवा के लिए समर्पित होने का है, जिसे सरकारों ने भुला दिया। उन्होने कहा '' वोटों के स्वार्थ की खातिर संतगुरु व उनके उपदेशों की हमेशा अनदेखी व उपेक्षा करने वाले नेतागण उनको माथा टेकते हैं, हालाँकि उनका उपदेश मानकर सरकारें असली में करोड़ों गरीबों का भला कर सकती हैं, लेकिन वे ऐसी नहीं करती हैं।"

मायावती ने कहा कि संत रविदास के आदर-सम्मान और उनकी स्मृति को बनाए रखने के लिए बसपा की सरकार ने उत्तर प्रदेश में कई काम किए जिनमें संत के नाम पर भदोही को जिला मुख्यालय का दर्जा सुरक्षित रखते हुए नया संत रविदास जिला बनाया, जिसे सपा सरकार ने जातिवादी व राजनीतिक द्वेष के कारण बदल दिया वहीं मौजूदा भाजपा सरकार ने भी इसका नाम अब तक बहाल नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि, वाराणसी में छोटी समझी जाने वाली जाति में जन्म लेने के बावजूद संत रविदास प्रभु-भक्ति के बल पर ब्रम्हाकार हुए। एक प्रबल समाज सुधारक के तौर पर वे आजीवन कड़ा संघर्ष करके समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ व उसमें सुधार लाने का पुरजोर कोशिश करते रहे थे। वे जाति-भेदभाव पर कड़ा प्रहार करते हुए कहते हैं कि मानव जाति एक है। इसलिए सभी को समान समझकर प्रेम करना चाहिए। उनका मानना था कि जाति-पांति व मानवता के समग्र विकास में बड़ा बाधक है।

मायावती ने कहा कि बसपा की स्थापना से पहले कांग्रेस,भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियों की सरकारों में दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी समाज) में समय-समय पर जन्मे इनके महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों की हमेशा ही उप़ेक्षा की गई। इनको आदर-सम्मान देना तो बहुत दूर की बात है, इनका हमेशा ही तिरस्कार किया गया, जिससे इन वर्गों के लोग हमेशा आहत व दु:खी रहे। लेकिन जब बसपा के नेतृत्व में इस समाज के लोग काफी कुछ संगठित व जागरूक हो रहे हैं तो वोटों की राजनीति के स्वार्थ में कांग्रेस, भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियों के लोग अब इनके संतों, गुरुओं व महापुरुषों के जन्मदिन के मौके पर इनके स्थलों आदि पर जाकर तरह-तरह की नाटकबाजी करते हुए हमेशा नजर आते हैं।

उन्होंने कहा कि, ऐसे तत्वों से जो केवल वोटों के स्वार्थ की राजनीति करने में माहिर हैं, उनसे बहुत सावधान रहने की जरूरत है। वैसे संतगुरु रविदास के उपदेश के मुताबिक सरकारें अगर मन चंगा करके काम करेंगी तो करोड़ों लोगों का भला हो सकता है व देश में भी विकास की गंगा जरूर बहेगी।

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