चुनाव आयोग पर खुलासे के बाद विपक्ष एक्शन में: राहुल गांधी बोले- यह राजद्रोह, केजरीवाल ने कहा- CEC को अरेस्ट करो; महाराष्ट्र-बंगाल में फिर से चुनाव की मांग उठी
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यह तस्वीर राहुल गांधी के वीडियो पोस्ट से ली गई है। राहुल गांधी ने साफ कहा कि जब वक्त आएगा तो ऐसे अवैध फैसले लेने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
नेशनल डेस्क। चुनाव आयोग को लेकर हुए नए खुलासे पर अब विपक्ष एक्शन में है। कांग्रेस से लेकर आम आदमी पार्टी और शिवसेना से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी इस मुद्दे पर इलेक्शन कमीशन और केन्द्र सरकार को घेरने में लग गई है। तमाम विपक्षी नेताओं के रिएक्शन आ रहे हैं।
दरअसल, 'द इंडियन एक्सप्रेस' की बुधवार (23 सितंबर) को आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि SIR और इससे जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच मतभेद थे। रिपोर्ट में बताया गया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की है।
विपक्ष ने इस खुलासे को अपने 'वोट चोरी' और 'SIR' के खिलाफ अभियान से जोड़ते हुए पेश किया। तमाम विपक्षी पार्टियों ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि वे कई सालों से चुनावों में हो रही धांधली की शिकायत कर रहे थे और अब नए खुलासे से साबित हो गया कि चुनाव आयोग के भीतर भी कुछ अधिकारी यह मानते हैं कि गड़बड़ हो रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह राजद्रोह है और जब सरकार बदलेगी तो ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में CEC ज्ञानेश कुमार को अरेस्ट करने की मांग कर डाली। वहीं, शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ठाकरे ने हाल ही में हुए कुछ चुनावों को भी फिर से कराने की मांग की है।
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पहले जानें रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी की आपत्तियां वोटर लिस्ट से जुड़े कई अहम मामलों पर थीं। इनमें नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन, वोटर के नाम हटाने, वोटर डेटा संभालने वाले सॉफ्टवेयर और पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से जुड़ी अपील शामिल थीं। दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाया था कि क्या उनकी जानकारी और मंजूरी के बिना कुछ फैसले लिए गए। इन आपत्तियों की लिखित कॉपी CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी। रिपोर्ट की कुछ खास बातें...
- नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए Form 6 में SIR से जुड़े सवाल जोड़े गए। नए आवेदकों से पूछा गया कि उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में था या नहीं। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि Form 6 चुनाव नियमों के तहत तय है और इसमें इस तरह का बदलाव नियम बदले बिना नहीं किया जा सकता। बाद में संधू ने भी जोशी की शिकायत को सपोर्ट किया। संधू ने इसे अनअथॉराइज्ड और अवैध बताते हुए हटाने की बात कही थी।
- विवेक जोशी ने वोटर डेटा के धीरे-धीरे दिल्ली में सेंट्रलाइज्ड होने पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव कानून के तहत अधिकार प्राप्त अधिकारी ही करें और इसके लिए ऑडिट भी किया जाए।
- संधू ने भी इलेक्टोरल रोल से जुड़े काम के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर 'ERONet' तक राज्य के अधिकारियों की पहुंच न होने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा था कि कई राज्यों के चुनाव अधिकारियों के पास सिस्टम का प्रॉपर और कम्पलीट एक्सेस नहीं है।
- संधू और जोशी ने चुनाव आयोग के IT सिस्टम में किए जा रहे बदलावों को लेकर कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को भी पत्र लिखा था। दोनों को आशंका थी कि इन बदलावों से वोटर लिस्ट से जुड़े सिस्टम की मॉनिटरिंग और कंट्रोल में बदलाव हो सकता है।
- संधू ने सवाल उठाया था कि पश्चिम बंगाल में ज्यूडिशियल जांच के बाद जिन वोटर के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखे गए थे, उन्हें हटाने की अपील किसने और किस अधिकार के तहत दाखिल कीं।
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टाइम आएगा, बचोगे नहीं: राहुल गांधी
राहुल गांधी एक वीडियो पोस्ट में कहते दिख रहे हैं- मैं इलेक्शन कमीशन और इनके अफसरों को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो, वो गलत कर रहे हो। यह राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। ये मत भूलिये कि टाइम आएगा और हम आपको पकड़ेंगे। आप बचने वाले नहीं हो।
कांग्रेस लीडर ने इस वीडियो के साथ यह भी लिखा कि वोट चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और संविधान पर हमला है। BJP-RSS और EC मिलकर यह देशद्रोह कर रहे हैं। वक्त आने पर न्याय जरूर होगा।
मोदी-शाह की शह पर ये सब हो रहा: अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने इस मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि मोदी जी और अमित शाह वोटों की बहुत बड़ी चोरी करके चुनाव जीत रहे हैं। इस चोरी के सरगना ज्ञानेश कुमार हैं। हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करके तुरंत उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए और पिछले कुछ सालों में जितने चुनाव हुए हैं, वे सब रद्द करके दोबारा करवाए जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ इलाके के ERO को वोट add या delete करने का अधिकार होता है। दोनों चुनाव आयुक्तों का आरोप है कि वेबसाइट से ही ERO की access रिस्ट्रिक्ट करके उसकी पावर छीन ली गई है। दिल्ली में बैठे कुछ लोगों के पास पूरे देश की वोटर लिस्ट का एक्सेस है। जिसकी मर्जी चाहे वोट जोड़ सकते हैं और जिसकी मर्जी चाहे हटा सकते हैं। हमारी मांग है कि पिछले 3 सालों में जितने भी बदलाव वोटर लिस्ट के अंदर किए गए हैं, वे खारिज करके 3 साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान ले: अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट को शेयर करते हुए लिखा- ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की आजादी नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
महाराष्ट्र-बंगाल में फिर से चुनाव हो: उद्धव ठाकरे
शिवसेना (UBT) के सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि ज्ञानेश कुमार का असली चेहरा देश के सामने आ गया। चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह धोखेबाजों को दे दिया। महाराष्ट्र चुनाव के ठीक पहले 40 लाख नाम काटे और जोड़े गए। यह सब सत्ता की लालच में किया गया।
ठाकरे ने कहा- महाराष्ट्र में ही नहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी यही हुआ। कर्नाटक में लोकसभा चुनाव से पहले धांधली हुई। ऐसे सभी चुनावों के नतीजों को रद्द कर यहां फिर से चुनाव होने चाहिए।

SIR वोटरों को हटाने की प्रोसेस, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें: CPI(M)
CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने कहा- चुनाव आयोग में तीन चीफ होते हैं। बहुमत से फैसले लिए जाते हैं। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने अपने साथियों को नजरअंदाज किया। यह अवैध है और अलोकतांत्रिक भी है। इसीलिए हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हैं। अगर वह रिजाइन नहीं करते हैं तो केन्द्र सरकार को उन्हें इस पद से हटा देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट से साफ हो गया कि SIR में ढेरों गड़बड़ियां हैं। उन्होंने इसे वोटरों को हटाने की प्रोसेस बताते हुए कहा कि इसे फौरन रोक देना चाहिए और इस पर सभी दलों से चर्चा के बाद आगे कोई फैसला लिया जाना चाहिए।

