पेट्रोल-डीजल खरीद के नियम बदले: बल्क में नहीं खरीद सकेंगे, ट्रकों के लिए भी सीमा तय हुई
Published:
3 min read

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण पेट्रोलियन आपूर्ति और शिपिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। (फोटो सोर्स- एएनआई)
बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कंज्यूमर रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में फ्यूल खरीद नहीं सकेंगे। सरकार ने उन्हें अपनी जरूरत का पेट्रोल और डीजल सिर्फ अधिकृत ब्लक बिक्री केंद्रों से खरीदने के लिए कहा है। सरकार का कहना है कि यह फैसला देशभर में ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी रोकने और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए लिया गया है।
डीजल खरीद की सीमा भी तय
सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, पेट्रोल पंप ऑपरेटर अब किसी भी ग्राहक या गाड़ी को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही बेच सकेंगे। साथ ही खरीदा गया डीजल आगे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम खासतौर पर उन कमर्शियल कस्टमर्स को प्रभावित कर सकता है, जो रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीद रहे थे।
ट्रक ऑपरेटर और कंपनियां प्रभावित होंगी
कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां और बड़े व्यावसायिक कंज्यूमर बल्क डिपो की बजाय रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद रहे थे, क्योंकि वहां कीमत कम थी। इस वजह से कई इलाकों में रिटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कमी की स्थिति बनने लगी थी।
दिल्ली में रिटेल पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत 95.20 रुपए प्रति लीटर है, जबकि बल्क बिक्री के लिए यही डीजल करीब 134.40 रुपए प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है। कीमतों में इस बड़े अंतर के कारण कमर्शियल कस्टमर रिटेल पंपों का इस्तेमाल कर रहे थे।
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया
सरकार के मुताबिक, ईंधन की जमाखोरी और गलत उपयोग को रोकना जरूरी हो गया था। इसके अलावा देश के सभी हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन रही थी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से फ्यूल की आपूर्ति व्यस्थित होगी। उपभोक्ताओं को भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
OMCs को हो रहा भारी नुकसान
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लंबे समय से ईंधन बिक्री पर दबाव झेल रही हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिटेल कस्टमर्स को डीजल बेचने पर कंपनियों को करीब 36.5 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। वहीं, पेट्रोल की बिक्री पर लगभग 9 रुपए प्रति लीटर का घाटा बताया गया है।
देश में एक लाख से अधिक फ्यूल स्टेशन हैं। इनमें से लगभग 90% पेट्रोल पंप सरकारी तेल कंपनियों के कंट्रोल में हैं। ऐसे में ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ये प्रतिबंध शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेंगे। अगर स्थिति सामान्य होती है, तो सरकार अलग आदेश जारी कर इन्हें वापस ले सकती है।
यह भी पढ़ें-

