SCO समिट से अमेरिका को कड़ा संदेश: ट्रम्प की धमकियों के बीच भारत-चीन का साथ आना क्यों जरूरी, जानिए मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के मायने
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एससीओ की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-चीन सहयोग 280 करोड़ लोगों के हित में है। (फोटो सोर्स- नरेंद्र मोदी/X हैंडल)
बिजनेस डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शामिल होने चीन पहुंचे हैं। ट्रम्प टैरिफ और तेजी से बदलते वैश्विक घटनाक्रमों के बीच तिआनजिन में PM मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की।
ये मुलाकात SCO की शो स्टॉपर रही। दोनों नेताओं का गर्मजोशी से मिलना डोनाल्ड ट्रम्प को साफ संदेश है कि दुनिया उनकी धुन पर नहीं नाचती। प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग की मुलाकात से भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।
20 साल पहले की तस्वीर
2000 के दशक की शुरुआत की बात करें तो भारत-चीन का व्यापार लगभग न के बराबर था। भारत से चीन में आयरन जाता था। चीन के प्रोडक्ट्स भारतीय बाजारों में गिने-चुने ही दिखते थे। धीर-धीरे हालात बदलने लगे। चीन 'वर्ल्ड फैक्ट्री' बन गया और भारत ने भी अपने बाजार खोल दिए।
2010 तक चीन के मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स और सोलर पैनल भारतीय मार्केट में छा गए। बदले में भारत लौह अयस्क और कुछ दवाइयां बेचता रहा, लेकिन संतुलन पूरी चरह चीन के पक्ष में झुक गया। 2024-25 में भारत-चीन बिलिटेरियल ट्रेड 127.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इससे चीन, अमेरिका के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।
रेयर अर्थ मेटल्स नई मुसीबत
वहीं, भारत दोहरी मुश्किलों का सामना भी कर रहा है। एक तरफ इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर सोलर मॉड्यूल में चीन से इम्पोर्ट बढ़ रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका ने 50% टैरिफ लगा दिया है। ऐसे में वैश्विक व्यापार की हवाएं बदल गई हैं। इस चुनौती का एक महत्वपूर्ण कॉम्पोनेन्ट 'रेयर अर्थ मेटल्स' हैं, जो EV व्हीकल्स, स्मार्टफोन, मिसाइल और डिफेंस टेक्नोलॉजी में बड़ी जरूरत पड़ती है। इनमें नियोडिमियम और डिस्प्रोसियम जैसे मेटल्स शामिल हैं।
रेयर अर्थ मैगनेट मार्केट का 90% से ज्यादा का हिस्सा चीन के कंट्रोल में है। अप्रैल 2025 से चीन ने धातुओं के एक्सपोर्ट पर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इसका असर दुनिया भर में सप्लाई चेन पर पड़ा है।
मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और बजाज ऑटो जैसी कंपनियां चेतावनी दे चुकी हैं कि अगर जल्द हल नहीं निकला तो प्रोडक्शन रुक सकता है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM) ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि चीनी बंदरगाहों पर रोके गए खेपों को जल्द छुड़वाया जाए।
तिआनजिन में मोदी-जिनपिंग मुलाकात
SCO समिट के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। ग्लोबल ट्रेड में संतुलन के लिए दोनों देशों ने आपसी व्यापार और इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने पर सहमति जताई है।
मोदी ने कहा- हमारे संबंधों को किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। विकास के रास्ते में भारत-चीन साझेदार हैं। उन्होंने चीन राष्ट्रपति को अगले साल ब्रिक्स मीटिंग के लिए भारत आने का न्योता दिया।
वहीं, जिनपिंग ने वीजा, कनेक्टिविटी और व्यापारिक बाधाएं कम करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) का साथ आना जरूरी है।
आगे का रास्ता
भारत को सिर्फ कच्चा माल नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू सेक्टर जैसे आईटी सर्विसेज, दवाइयां और ग्रीन टेक्नोलॉजी में निर्यात बढ़ाना होगा। वहीं, चीन के लिए भारत का बड़ा उपभोक्ता बाजार बेहद अहम है। खासतौर पर जब अमेरिका और यूरोप उस पर दबाव डाल रहे हैं।
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