Global Oil Crisis: जंग थमी तो भी हालात नॉर्मल होने में 2 साल लगेंगे; इसकी वजह क्रूड प्रोसेसिंग, ये क्या-कैसे होती है- यहां डीटेल नॉलेज गाइड
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बिजनेस/इंटरनेशनल डेस्क. मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान की जंग अभी थमी हुई है। ईरान अपने कब्जे वाले ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मूज’ से कार्गो शिप और टैंकर को निकलने की मंजूरी देने में आनाकानी कर रहा है। यही वजह है कि दुनिया के ज्यादातर देशों में क्रूड ऑयल सप्लाई चेन डिस्टर्ब हो चुकी है। CNN से बातचीत में ग्लोबल फ्यूल एनर्जी एक्सपर्ट निक वेड ने कहा- मान लीजिए इस हफ्ते जंग पूरी तरह थम जाती है, स्ट्रैट ऑफ होर्मूज फ्री ट्रेड के लिए खुल जाता है…तो भी दुनिया में फ्यूल सप्लाई चेन नॉर्मल होने में कम से कम 2 साल लगेंगे।
यहां ‘राज एक्सप्रेस’ आपको दुनिया के लिए इस वक्त बेहद जरूरी तेल के इस मुद्दे पर गंभीर और नॉलेज बेस्ड इन्फॉर्मेशन दे रहा है। चलिए, शुरू करते हैं…
सब ठीक होने के बाद भी 2 साल क्यों लगेंगे
निक वेड कहते हैं- कई कंटेनर तो अब तक ऑयल रिग या अपने पोर्ट्स पर खड़े हैं। होर्मूज पहुंचने और इसे क्रॉस करने में ही उन्हें एक महीना लगेगा। इसके बाद यह अपने-अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचेंगे। किसी देश का जहाज होगा, उसका रजिस्ट्रेशन किसी और देश में होगा। इसका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी लंबा होता है।
लिहाजा, इसमें काफी वक्त लगता है। इसके बाद यह क्रूड कार्गो शिप या कंटेनर उस देश की फिक्स्ड रिफाइनरीज पर पहुंचेंगे। वहां भी इनका नंबर आने में वक्त लगेगा। खाली होकर ये फिर ऊपरी दी गई प्रोसेस को दोहराएंगे। इसे ही सप्लाई चेन कहते हैं।
वेड के मुताबिक- एक कार्गो को खाली करना, फिर उसे वापस उसी क्रूड रिग या पोर्ट पर भेजना…ऐसा ही चलता रहेगा। फिर वो वक्त आएगा जब डिमांड और सप्लाई बैलेंस हो जाएगी…लेकिन इसमें तकरीबन दो साल लग जाएंगे।

रिफाइनरी में क्रूड से पेट्रोल कैसे बनता है…
BBC और Petrohub वेबसाइट के मुताबिक- क्रूड ऑयल से प्योर पेट्रो प्रोडक्ट्स तैयार करने का एक प्रोसेस होता है। इसे टेक्निकली Fractional distillation of crude oil (FDC) भी कहा जाता है। दुनिया में हजारों रिफाइरीज में क्रूड को रिफाइन करके डिफरेंट प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। भारत समेत कई देशों में बेहतरीन और हाईटेक रिफाइनरीज मौजूद हैं। ये देश आम दिनों में रिफाइन ऑयल जरूरतमंद देशों को सप्लाई करते हैं। अब इस टेक्निकल प्रोसेस को समझ लेते हैं।
क्रूड ऑयल क्या है
फ्यूल एनर्जी सेक्टर की मशहूर ब्रिटिश कंपनी ‘Crown Oil’ के मुताबिक- यह डार्क ब्लैक कलर का ऑयल होता है। इसे ही कच्चा तेल कहा जता है। आमतौर पर इसे काम्पलेक्स हाइड्रोकार्बन भी कहा जाता है। इसे जमीन या समंदर में मौजूद गहरे कुओं (oil wells or oil rigs at sea) से निकाला जाता है। मिडिल ईस्ट के अलावा रूस, अमेरिका, नॉर्वे और बाकी कुछ देश में भी यह तेल के कुंए हैं।
पेट्रोलियम क्या है
पेट्रोलियम शब्द का मतलब कोई एक प्रोडक्ट नहीं है। दरअसल, पेट्रोलियम एक जरिया है, और इसको जैसे-जैसे और अलग-अलग लेवल पर रिफाइन किया जाता है तो मल्टीपल प्रोडक्ट निकलते हैं। जैसे, पेट्रोल-डीजल, कैरोसिन, नेफ्था और बाकी प्रोडक्ट। दरअसल, Hydrocarbons एक चेन होती है। इसमें कार्बन और हायड्रोजन अलग-अलग ऑर्गनिक मटैरियल की तरह होते हैं। जब इन्हें fractional distillation (प्रोसेस के जरिए टुकड़ों में अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार करना) किया जाता है, तब पेट्रो प्रोडक्ट मिलते हैं।

कुछ और आसानी से समझाइए…
- दरअसल, रिफाइनरीज में क्रूड को 350°C से 600°C तक गर्म किया जाता है। यहां ये ध्यान रखना होगा कि ये रिफाइनरी के टेक्निकल एडवांसमेंट (आसान भाषा में संशोधन की क्षमता) पर डिपेंड करता है।
- रिफाइनरीज किसी टॉवर के डिजाइन जैसी होती हैं। इन टॉवर में अंदर कई तरह के मजबूत स्टील से बने कॉलम्स होते हैं। इन कॉलम्स में छेद वाली ट्रे लगी होती हैं।
- रिफाइन होने के बाद प्रोडक्ट इन्हीं अलग-अलग ट्रे में भाप के तौर पर पहुंचता है। वहां ये ठंडा किया जाता है।
- ठंडा होने पर ये लिक्विड फॉर्म (जैसे पेट्रोल-डीजल या कैरोसिन) के तौर पर जमा हो जाता है।
- बाद में इसे क्वॉलिटी चेक के बाद पाइप लाइन के जरिए कार्गो या कंटेनर तक पहुंचाया जाता है।
आमतौर पर fractional distillation तीन तरह से किया जाता है। आप यूं भी कह सकते हैं कि तीन तरह की रिफाइनरीज होती हैं। इनसे मिलने वाला फाइनल प्रोडक्ट भी इनकी रिफाइन कैपेसिटी और टेक्नोलॉजी पर डिपेंड करता है।
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