2025 में ऑटो इंडस्ट्री ने पकड़ी तेज रफ्तार: टू-व्हीलर और SUV की डिमांड ने बिक्री बढ़ाई, SIAM रिपोर्ट में सामने आया ग्रोथ ट्रेंड
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जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच ऑटो इंडस्ट्री ने बिक्री में 5.1% की ग्रोथ दर्ज की है। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने साल 2025 का अंत मजबूत नोट पर किया। दिसंबर में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री में उछाल देखने को मिला है। इस दौरान पीवी सेल्स 26.8% बढ़कर 3,99,216 यूनिट तक पहुंच गई।
ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े ये आंकड़े सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने जारी किए हैं। जिनमें दिसंबर 2025 की बिक्री, अक्टूबर-दिसंबर में डबल डिजिट ग्रोथ और 2024 के मुकाबले पूरे साल की परफॉर्मेंस सामने आई है।
टू-व्हीलर सेगमेंट में सबसे तेज उछाल
दो पहिया सेगमेंट ने शानदार प्रदर्शन किया। बिक्री 39.4% बढ़कर 15.4 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इस ग्रोथ में स्कूटर सबसे आगे रहे, जिनकी बिक्री में 42.1% की तेजी रही। वहीं, मोटरसाइकिल की सेल 37.7% और मोपेड की बिक्री 39.4% बढ़ी।
यह ट्रेंड खासतौर पर शहरों और कस्बों में मजबूत डिमांड को दिखाता है। दिसंबर 2025 में थ्री-व्हीलर सेगमेंट की बिक्री 17.4% बढ़कर 61,924 यूनिट रही। पैसेंजर और गुड्स कैरियर में डबल डिजिट ग्रोथ रही। हालांकि ईवी थ्री-व्हीलर सेगमेंट में मिला-जुला रुझान रहा।
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अक्टूबर-दिसंबर क्वार्टर इंडस्ट्री के लिए खास
इस दौरान पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 20.6% बढ़कर 12.8 लाख यूनिट पहुंच गई। इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह यूटिलिटी व्हीकल्स रही, जिनकी बिक्री 20.9% बढ़ी। इससे यह साफ है कि लोग अब बड़ी और फीचर्स वाली गाड़ियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस क्वार्टर में कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री 21.5% बढ़कर 2,90,085 यूनिट हो गई।
2025 में ऑटो बिक्री का हाल
पूरे साल जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच ऑटो इंडस्ट्री ने डोमेस्टिक बिक्री में 5.1% की ग्रोथ दर्ज की। पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 5% बढ़कर 44.9 लाख यूनिट रही। कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री 7.7% बढ़कर 10.3 लाख यूनिट तक पहुंच गई। थ्री-व्हीलर सेगमेंट में 8.2% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि टू-व्हीलर बिक्री दो करोड़ यूनिट के पार चली गई।
GST में कटौती बनी ग्रोथ की वजह
SIAM के प्रेसिडेंट शैलेश चंद्रा के मुताबिक, GST दरों में कटौती से गाड़ियां सस्ती हुई और इससे पूरे सेक्टर को नई रफ्तार मिली। उन्होंने कहा कि यह पॉजिटिव रुझान 2026 में भी जारी रहेगा। मजबूत आर्थिक हालात, बेहतर अफॉर्डेबिलिटी और सरकार की सपोर्टिव नीतियां इसमें मदद करेंगी।
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