मिडिल ईस्ट तनाव का असर: डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 92.52 तक गिरा
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क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और डॉलर की बढ़ती मांग से रुपये पर दबाव बढ़ा है। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले लेवल पर पहुंच गया। कारोबार की शुरुआत में रुपया 92.20 प्रति डॉलर पर ओपन हुआ और थोड़ी देर में गिरकर 92.52 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और डॉलर की बढ़ती डिमांड के कारण रुपए पर प्रेशर बढ़ गया है। सोमवार (9 मार्च) कच्चे तेल की कीमतों में करीब 25% की बढ़ोतरी देखी गई। यह बढ़कर लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
ऑयल इम्पोर्ट बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ी
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत जैसे देशों में क्रूड ऑयल इम्पोर्ट किया जाता है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो आयातकों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है। इस वजह से डॉलर की डिमांड बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है।
करेंसी एक्सपर्ट के.एन.डे ने ANI से बातचीत में बताया कि शुक्रवार के मुकाबले सोमवार को रुपया 46 पैसे के बड़े गैप के साथ ओपन हुआ। उन्होंने कहा कि फिलहाल रुपया 92.29 से 92.30 के आसपास कारोबार कर रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर मार्केट में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है तो RBI हस्तक्षेप कर सकता है, ताकि स्थिति को कंट्रोल किया जा सके।'
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
एनरिच मनी के CEO पोनमुदी आर ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपया इस समय अपने नए ऑल-टाइम हाई लेवल पर ट्रेड कर रहा है। उन्होंने कहा, 'मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई से जुड़ी समुद्री रास्तों पर असर पड़ा है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई हैं।' निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की तरफ रुख कर रहे हैं। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि ऑयल इम्पोर्ट महंगा हो जाता है। इससे रुपये पर दबाव बना रहता है।
चार्ट संकेत दे रहे हैं डॉलर मजबूत रह सकता है
पोनमुदी आर के मुताबिक, मौजूदा चार्ट पैटर्न डॉलर की मजबूती की तरफ इशारा कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में डॉलर लगातार ऊपर की तरफ बढ़ रहा है और नए हाई बनाए हैं। अगर USD/INR 92.30-92.32 के स्तर से ऊपर बनी रहती है, तो डॉलर में तेजी देखने को मिल सकती है। यह नए स्तर तक पहुंच सकता है।
91.90-92.00 के बीच सपोर्ट मिल सकता है
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डॉलर-रुपया जोड़ी 91.90 से 92.00 के लेवल से नीचे आती है तो मार्केट में थोड़ी मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। ऐसे में रिजर्व बैंक हस्तक्षेप कर सकता है, ताकि रुपये में ज्यादा गिरावट न आए। फिलहाल ग्लोबल अनसर्टेनिटी और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों के कारण डॉलर मजबूत बना है। यही वजह है कि रुपये पर दबाव है।
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