स्मार्ट ग्लास से गुपचुप रील बनाई, 4 लाख व्यूज मिले: अब पीड़ित ने Meta को लीगल नोटिस भेजा, 2 करोड़ मुआवजा और माफी की मांग; कानून क्या कहता है
Published:
5 min read

नेशनल डेस्क। दिल्ली के एक शख्स ने फेसबुक-इंस्टा और वाट्सएप की पैरेंट कंपनी ‘Meta’ को लीगल नोटिस भेजा है। कंपनी के स्मार्ट ग्लास से गुपचुप तरीके से वीडियो बनने, उसके वायरल होने और मजाक उड़ने के चलते शख्स ने यह एक्शन लिया है। इस नोटिस में Meta से 2.05 करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की गई है। इसके साथ ही सार्वजनिक तौर पर माफी की भी मांग रखी गई है।
आउटलुक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के पॉश इलाके ‘खान मार्केट’ के एक कैफे से यह पूरी कहानी शुरू होती है। यहां बैठे एक शख्स ने Ray-Ban Meta स्मार्ट ग्लास से दूसरे शख्स का वीडियो बनाया। यह वीडियो बिना जानकारी दिए बनाया गया। फिर इस वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया गया।
26 जुलाई को एक इंस्टाग्राम रील के तौर पर पोस्ट हुए इस वीडियो को महज 10 दिन में ही 4 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा। कमेंट बॉक्स में कई व्यूअर्स ने वीडियो में दिख रहे शख्स का मजाक भी बनाया। वायरल होने पर जब यह वीडियो पीड़ित के पास पहुंचा तो उसने इसे इंस्टा प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए एक के बाद एक कई स्टेप लिए, लेकिन जब बात नहीं बनी तो आखिर में उसे Meta को लीगल नोटिस भेजना पड़ा।
पहले इंस्टाग्राम पर शिकायत
पीड़ित का कहना है कि उसने वीडियो हटाने के लिए इंस्टाग्राम पर शिकायत करने की कोशिश की लेकिन उसे ऐप पर प्राइवेसी के उल्लंघन के लिए शिकायत करने की कोई कैटेगरी नहीं मिली। इसके बाद भारत में Meta के ग्रीवेंस (शिकायत) अधिकारी से भी कॉन्टैक्ट किया गया, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि, 28 और 30 जुलाई को इंस्टाग्राम की ओर से उससे कॉन्टैक्ट किया गया और बताया गया कि वीडियो ने प्लेटफॉर्म के कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन नहीं किया है।
इसके बाद इस मामले में Internet Freedom Foundation (IFF) आगे आया। IFF ने पीड़ित की मुफ्त कानूनी मदद की और Meta को लीगल नोटिस भेजा।

लीगल नोटिस में क्या-क्या?
IFF का कहना है कि Meta ने ऐसा डिवाइस बनाया जो सामान्य चश्मे की तरह है। उसे अलग पहचानना मुश्किल है। ऐसे में अगर इसका इस्तेमाल आसपास के लोगों की जानकारी के बिना रिकॉर्डिंग करने के लिए होता है, तो कंपनी की जिम्मेदारी बनती है।
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि Meta स्मार्ट ग्लास में रिकॉर्डिंग और फोटो क्लिक के लिए इतना छोटा इंडिकेटर है, जो आसानी से नजर भी नहीं आता। यानी सामने मौजूद व्यक्ति के लिए इसे देख पाना आसान नहीं है। ऐसे में गुपचुप वीडियो-फोटो लिए जा सकते हैं।
इस मामले को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें सिर्फ वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी की बात नहीं हो रही, बल्कि स्मार्ट ग्लास बनाने वाली कंपनी की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया गया है।
कानून क्या कहता है
यह मामला इसलिए खास हो जाता है क्योंकि भारत में आसपास मौजूद लोगों को बिना जानकारी दिए उनके वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर कानून अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
Digital Personal Data Protection Act (DPDPA), 2023 में लोगों के निजी डेटा को लेकर नियम हैं। लेकिन इसमें सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध कराए गए पर्सनल डेटा को लेकर एक बड़ा अपवाद है। इसी वजह से किसी पब्लिक प्लेस पर लोगों की रिकॉर्डिंग जैसे मामलों में कानून का स्टैंड साफ नहीं है।
दूसरी तरफ Information Technology Act का सेक्शन 66E किसी इंसान की प्राइवेट एरिया की तस्वीर या वीडियो बिना परमिशन के लेने और उसे वायरल करने को अपराध मानता है। लेकिन इसका दायरा काफी सीमित है। किसी कैफे, सड़क या दूसरे पब्लिक प्लेस पर सामान्य तरीके से किसी व्यक्ति को रिकॉर्ड करने के हर मामले को यह सेक्शन कवर नहीं करता।

क्या अब स्मार्ट ग्लास के इस्तेमाल पर नए नियम की जरूरत है?
दिल्ली का यह मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है- अगर कैमरा इतना छोटा हो कि सामने वाले को पता ही न चले कि रिकॉर्डिंग हो रही है, तो उसकी प्राइवेसी की जिम्मेदारी किसकी होगी?
स्मार्ट ग्लास अब सिर्फ फोटो खींचने या वीडियो बनाने का गैजेट नहीं रह गया है। इसमें कैमरा, माइक्रोफोन और AI जैसी तकनीकें जुड़ रही हैं। पब्लिक प्लेस पर इनका इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह सवाल भी खास होता जा रहा है किसी व्यक्ति की जानकारी और सहमति के बिना उसकी रिकॉर्डिंग कब गलत मानी जाएगी।
ऐसे में दिल्ली का यह मामला भारत में उन शुरुआती मामलों में से एक है, जहां स्मार्ट ग्लास के डिजाइन को ही प्राइवेसी से जुड़े नुकसान के लिए सवालों के घेरे में रखा गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि Meta और वीडियो बनाने वाला शख्स इस नोटिस पर क्या जवाब देते हैं और क्या यह मामला भारत में स्मार्ट ग्लास के इस्तेमाल को लेकर जरूरी नए कानूनी नियमों की बहस को आगे बढ़ाता है।
यह भी पढ़ें...

