मिडिल ईस्ट के बीच IEA का बड़ा फैसला: 400 मिलियन बैरल इमरजेंसी ऑयल जारी करेगी, एशिया बाजारों को पहले मिलेगा तेल
Published:
4 min read

IEA ने 400 मिलियन बैरल इमरजेंसी तेल बाजार में जारी करने का फैसला किया। (फोटो सोर्स- एएनआई)
बिजनेस डेस्क। दुनिया में बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अपने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल मार्केट में जारी करने का फैसला किया है। यह तेल सबसे पहले एशिया और ओशिनिया के मार्केट में पहुंचेगा। जबकि अमेरिकी और यूरोप को सप्लाई मार्च के आखिरी से मिलना शुरू होगी।
IEA के मुताबिक, यह कदम मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण पैदा हुए ऑयल सप्लाई संकट को कम करने के लिए उठाया गया है।
एशिया और ओशिनिया को तेल पहले मिलेगा
15 मार्च को जारी बयान में IEA ने बताया कि सदस्य देशों ने अपने इम्प्लीमेंटेशन प्लान एजेंसी को भेजे हैं। इन योजनाओं के अनुसार, एशिया-ओशिनिया क्षेत्र के देशों को इमरजेंसी तेल तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। इस क्षेत्र में मुख्य बाजार जापान, साउथ कोरिया और ऑस्ट्रेलिया हैं।
IEA सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि वे अपने इमरजेंसी भंडार से 400 मिलियन बैरल ऑयल बाजार में उपलब्ध कराएंगे। यह एजेंसी के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आपातकालीन तेल रिलीज है।
यह IEA के सरकारी रिजर्व में रखे 1.2 बिलियन बैरल तेल का करीब एक-तिहाई हिस्सा है। यह फैसला उस समय लिया गया जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी आपूर्ति पर असर पड़ने लगा।
यह भी पढ़ें- LPG Cylinder Booking: Indane, HP, Bharat गैस सिलेंडर घर बैठे मंगवाएं, WhatsApp, मिस्ड कॉल और PhonePe से ऐसे बुक करें
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से संकट बढ़ा
यह संकट तक गहराया जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई। इस समुद्री रास्ते के दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई होती है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।
भारत ने IEA के फैसला का स्वागत किया
भारत ने इस फैसले का स्वागत किया है। सरकार ने कहा कि वह वेस्ट एशिया की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे असर पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वह ग्लोबल मार्केट को स्थिर रखने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के साथ मिलकर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।
IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फातिह बिरोल ने एक वीडियो बयान में कहा कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के संघर्ष ने तेल और गैस बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से सप्लाई कम हुई है। उसे पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है।' उन्होंने साफ कहा कि 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करना एक बड़ा कदम है, लेकिन लंबी अवधि में स्थिरता तभी आएगी। जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवाजाही फिर से शुरू होगी।
यह भी पढ़ें- मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बड़ा अपडेट: सरकार बोली- पेट्रोल-डीजल,LPG की कमी नहीं; PNG-CNG की भी सप्लाई जारी
खाड़ी देशों में तेल उत्पादन में कटौती
IEA की मार्च 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी देशों में तेल उत्पादन पर असर पड़ा है। 10 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन कम हो गया है। इस कटौती का असर सऊदी अरब, इराक, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे तेल उत्पादक देशों पर पड़ा है।
एजेंसी का कहना है कि मिडिल ईस्ट में उड़ानों के रद्द होने और LPG सप्लाई में रुकावट के कारण ऑयल की डिमांड पर असर पड़ेगा। मार्च और अप्रैल में तेल मांग पहले के अनुमान से करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन कम रह सकती है।
IEA का इमरजेंसी ऑयल रिजर्व सिस्टम कैसे काम करता है
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का इमरजेंसी ऑयल रिजर्व किसी बड़े टैंक में नहीं रखा जाता है। यह अलग-अलग सदस्य देखों में रखे भंडार का एक कॉर्डिनेटेड सिस्टम है। IEA का सदस्य बनने के लिए किसी भी देश को इतना तेल स्टॉक रखना जरूरी है, जो उसके पिछले साल के करीब 90 दिनों के इम्पोर्ट के बराबर हो।
जब IEA सदस्य देश अपने रिजर्व से तेल निकालकर बाजार में बेचते हैं, तो यह तेल रिफाइनरी और ट्रेडर्स को खुले मार्केट में उपलब्ध कराया जाता है।
यह भी पढ़ें-
देश में LPG सिलेंडर की कमी नहीं: तेल कंपनियों ने कहा- सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित, घबराकर बुकिंग न करें

