रूसी क्रूड पर 100% टैरिफ से जुड़ा बिल US सीनेट में पास: भारत-चीन समेत 5 देश टारगेट पर, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलनी बाकी
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अमेरिकी पार्लियामेंट के अपर हाउस यानी सीनेट ने शुक्रवार को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की मंजूरी देने वाला बिल पास कर दिया।- फाइल
इंटरनेशनल डेस्क। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने से जुड़ा बिल अमेरिकी सीनेट (US Senate) ने शुक्रवार को 86-11 वोट से पास कर दिया। इस बिल के पास होने के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को रुसी तेल, गैस और दूसरे क्रूड और पेट्रो प्रोडक्टस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की मंजूरी मिल जाएगी। इस बिल में भारत और चीन समेत पांच देशों को सीधे निशाने पर रखा गया है। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि 100% टैरिफ लगा दिया गया है। बिल में सिर्फ टैरिफ की मैक्सिमम लिमिट तय की गई है। अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलनी बाकी है।
कौन से पांच देश टारगेट पर
- चीन (China)
- भारत (India)
- स्लोवाकिया (Slovakia)
- हंगरी (Hungary)
- अजरबैजान (Azerbaijan)
आगे बढ़ने से पहले, जान लीजिए अमेरिकी संसद का स्ट्रक्चर
अमेरिकी संसद को यूएस कांग्रेस (US Congress) कहते हैं। इसमें भी भारतीय संसद के तरह दो सदन होते हैं। अमेरिका का हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) भारत की लोकसभा (Lok Sabha) जैसा है, जहां जनता सीधे सांसद चुनती है। वहीं अमेरिकी सीनेट (Senate) की भारत की राज्यसभा (Rajya Sabha) की तरह है। यहां पर हर राज्यों के प्रतिनिधि यानी सांसद अपनी-अपनी पार्टियों के प्राइमरी इलेक्शन जीतकर पहुंचते हैं।

हाउस में ट्रम्प की पार्टी के पास 218 वोट
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) में डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) के पास फिलहाल 218 सांसद हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) के पास 212 सीटें हैं और 4 सीटें खाली हैं। किसी नॉर्मल बिल को पास कराने के लिए साधारण बहुमत (Simple Majority) यानी 218 वोट चाहिए। ऐसे में रिपब्लिकन पार्टी के पास अकेले भी बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या मौजूद है। हालांकि, 218 का आंकड़ा बेहद मामूली अंतर से है। अगर एक भी रिपब्लिकन सांसद गैरहाजिर रहता है या बिल के खिलाफ वोट करता है, तो पार्टी के लिए इसे अकेले पास कराना मुश्किल हो सकता है।
100% टैरिफ बिल पर विपक्ष का भी मिल सकता है साथ
रूस पर पाबंदियों और टैरिफ वाले इस बिल (Bill) के मामले में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) को डेमोक्रेट्स (Democrats) के समर्थन की जरूरत पड़ने की संभावना कम है। US सीनेट में यह बिल 86-11 के भारी बहुमत से पास हो चुका है। रूस पर सख्ती को लेकर दोनों पार्टियों में काफी हद तक सहमति है। इसलिए हाउस (House) में भी इसे दोनों पार्टियाें का समर्थन (Bipartisan Support) मिलने की संभावना है। बिल कानून बनता है तो राष्ट्रपति ट्रम्प को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत और चीन समेत पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल कब और किस रेट से करना है, यह आगे ट्रम्प प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगा।

पूर्व रिपब्लिकन सीनेटर के नाम पर बिल का नाम
इस बिल का ऑफिशियल नाम रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट रखा गया है। बिल के तहत यह जरूरी नहीं है कि अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन को इन सभी देशों पर एक्शन लेना ही होगा । इसमें टैरिफ का एक्चुअल रेट तय करने का अधिकार यूएस ट्रेढ रिप्रेजेंटेटिव (USTR) को दिया गया है। यानी आगे चलकर टैरिफ 100% तक हो सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी देशों पर 100% टैरिफ लगाया ही जाए।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर भी पाबंदियां लगाने का प्रावधान
बिल के स्पॉन्सर्स का कहना है कि टैरिफ इतना ज्यादा होना चाहिए कि चीन और भारत जैसे बड़े खरीदार रूसी तेल खरीदना कम करें। हालांकि, इसमें कुछ देशों के लिए छूट का प्रावधान भी है। अगर कोई देश अपनी टोटल नेचुरल गैस जरूरत का 15% से कम रूस से खरीदता है और इन इम्पोर्ट को कम करने के लिए कदम उठा रहा है, तो उसे इससे बाहर रखा जा सकता है। बिल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूस के सीनियर पॉलिटिकल और मिलिट्री लीडर्स, रशियन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और रशियन एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर भी सैंक्शंस का प्रावधान है।

पुराने तेल टैंकरों पर एक्शन का प्रावधान
बिल में रूस के पुराने और री-फ्लैग्ड ऑयल टैंकरों पर एक्शन का भी प्रावधान है। इन टैंकरों का इस्तेमाल रूस मौजूदा अमेरिकी सैंक्शंस (US Sanctions) से बचने के लिए करता है। प्रेसिडेंट को सैंक्शंस या दूसरी पाबंदियों से छूट देने का अधिकार भी मिलेगा। इसके लिए उन्हें कांग्रेस को बताना होगा कि फैसला अमेरिका के नेशनल इंटरेस्ट में है। यानी ट्रम्प के पास एक्शन लेने या रोकने का विकल्प रहेगा। बिल में ईरान सैंक्शंस एक्ट (Iran Sanctions Act), 1996 को 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है।
क्या भारत पर 100% टैरिफ लगेगा
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत पर वाकई 100% टैरिफ (Tariff) लगेगा। फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। सीनेट (Senate) से पास बिल में 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति है, लेकिन वास्तविक दर यूएसटीआर (USTR) तय करेगा। प्रेसिडेंट को नेशनल इंटरेस्ट के आधार पर छूट (Waiver) देने का अधिकार भी है। हर 180 दिन में फैसले की समीक्षा होगी। यानी अब टैरिफ लगाने, रेट बदलने या छूट देने के सभी अहम फैसले अमेरिकी सरकार और प्रेसिडेंट ट्रम्प अपनी सहूलियत के हिसाब से ले सकते हैं।

रूस से तेल खरीद पर भारत का रुख
यह बिल ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) पर बातचीत चल रही है। भारत पहले रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए एडिशनल टैरिफ को अनफेयर बता चुका है। भारत पर पहले 25% का एडिशनल लेवी लगाया गया था, जिसे बाद में ट्रेड नेगोशिएशंस के बाद हटा दिया गया। भारत का कहना रहा है कि रूस का तेल सिर्फ भारत नहीं खरीद रहा। कई दूसरे देश भी रूसी एनर्जी खरीद रहे हैं। भारत का कहना है कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरतों के हिसाब से तय करते हैं कि क्रूड कहां से और कितना खरीदना है।

बिल पास होने के बाद ट्रम्प पर प्रेशर बढ़ेगा
सीनेट से पास होने के बाद अब बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा। हाउस 31 अगस्त को दोबारा काम शुरू करेगा। अगर हाउस भी इसे उसी रूप में पास करता है, तो बिल प्रेसिडेंट ट्रम्प के पास सिग्नेचर के लिए जाएगा। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के अफसरों ने मौजूदा बिल को तैयार करने में भूमिका निभाई है। ट्रम्प ने भी हाउस में बिल पास होने के संकेत दिए हैं। ऐसे में भारत के लिए बड़ा सवाल है कि हाउस में बिल का अंतिम रूप क्या होगा और ट्रम्प इसका इस्तेमाल किस तरह करते हैं।
इंडिया-US ट्रेड डील पर भी असर संभव
भारत के नेगोशिएटर्स पहले ही अमेरिका से मांग कर चुके हैं कि ट्रेड डील में नई दिल्ली को बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे ट्रेड राइवल्स के मुकाबले कंपटीटिव एडवांटेज (Competitive Advantage) दिया जाए। ऐसे में रूसी तेल पर इस नए टैरिफ का मुद्दा बातचीत को मुश्किल बना सकता है। दूसरी तरफ, सीनेट का बिल ट्रम्प को गुंजाइश देता है कि वह टैरिफ की दर 100% से कम रखें या नेशनल इंटरेस्ट के आधार पर छूट दें। अब यह देखना अहम होगा कि ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन टैरिफ बढ़ाता है या फिर मौजूदा टैरिफ बरकरार रखता है।

